दिल्ली से आएगा 6,500 करोड़ रुपये का ‘पानी’: हेमंत सरकार ने बढ़ाई रफ्तार, पोर्टल पर डेटा लॉक

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की फाइल फोटो, Pic Credit- X
Jal Jeevan Mission Jharkhand: झारखंड सरकार ने जल जीवन मिशन के तहत केंद्र से 6,500 करोड़ रुपये का लंबित फंड पाने के लिए एसएनए स्पर्श पोर्टल पर डेटा और एनओसी अपलोड करने की प्रक्रिया तेज कर दी है. पढ़ें, पूरी रिपोर्ट
रांची से सतीश सिंह की रिपोर्ट
Jal Jeevan Mission Jharkhand, रांची : झारखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्येक घर तक नल से शुद्ध जल पहुंचाने की महत्वाकांक्षी योजना को गति देने के लिए राज्य सरकार ने अपनी कवायद को बेहद तेज कर दी है. केंद्र सरकार से जल जीवन मिशन (जेजेएम) के तहत लंबित पड़ी भारी-भरकम राशि को हासिल करने के लिए पेयजल एवं स्वच्छता विभाग युद्ध स्तर पर काम कर रहा है. इसी सिलसिले में केंद्र सरकार के ‘एसएनए स्पर्श पोर्टल’ (SNA Sparsh Portal) पर जल जीवन मिशन की उन तमाम चालू और पूरी हो चुकी योजनाओं का विस्तृत विवरण अपलोड किया जा रहा है, जिनमें झारखंड सरकार अपने कोटे की राशि (राज्यांश) पहले ही खर्च कर चुकी है. डेटा अपलोडिंग के साथ-साथ इन सभी योजनाओं के उपयोगिता और अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) भी पोर्टल पर डाले जा रहे हैं, ताकि वित्तीय लेन-देन में कोई तकनीकी अड़चन न रहे.
दिल्ली में MOU के बाद बनी सहमति
इस पूरी कवायद की पृष्ठभूमि हाल ही में नई दिल्ली में तैयार हुई थी. बीते 2 जून को नई दिल्ली में ‘जल जीवन मिशन 2.0’ को लेकर केंद्र और झारखंड सरकार के बीच एक उच्चस्तरीय समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए थे. इस महत्वपूर्ण बैठक में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल के सामने वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 के लिए राज्य की लगभग 6,500 करोड़ रुपये की लंबित केंद्रीय सहायता राशि को जल्द से जल्द जारी करने का आग्रह किया था. इस पर केंद्रीय अधिकारियों ने भरोसा दिया था कि एनओसी और अन्य कागजी प्रक्रियाओं में केंद्र पूरा सहयोग करेगा, बशर्ते राज्य सरकार निर्धारित मानकों और अपनी 50 प्रतिशत राज्यांश की हिस्सेदारी का कड़ाई से पालन करे.
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एमओयू की है कड़ी शर्त
जल शक्ति मंत्रालय के नियमों और एमओयू की शर्तों के अनुसार, केंद्र सरकार से फंड की अगली किस्त पाने के लिए झारखंड को पहले अपने हिस्से की मैचिंग ग्रांट (राज्यांश) को धरातल पर खर्च करके दिखाना होगा. दिल्ली में हुए एमओयू के करीब एक महीना बीतने को है, लेकिन अब तक एसएनए स्पर्श पोर्टल पर झारखंड का पूरा तकनीकी डेटा और एनओसी समय पर उपलब्ध नहीं कराए जाने के कारण केंद्र की ओर से राशि जारी नहीं हो पाई है. इस देरी को गंभीरता से लेते हुए पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के आलाधिकारियों ने पूरी कागजी और तकनीकी प्रक्रिया को फास्ट-ट्रैक मोड पर डाल दिया है ताकि केंद्र से मिलने वाला फंड बिना किसी देरी के सीधे राज्य के खाते में आ सके.
जेजेएम 2.0 में मिला 2,500 करोड़ का विशेष बोनस
झारखंड सरकार इस मेगा मिशन के तहत दिसंबर 2028 तक राज्य के शत-प्रतिशत ग्रामीण घरों में नल से जल पहुंचाने के बड़े और ऐतिहासिक लक्ष्य को लेकर आगे बढ़ रही है. भौगोलिक रूप से कठिन माने जाने वाले झारखंड के पठारी इलाकों में इस लक्ष्य को समय पर हासिल करने के लिए ‘जेजेएम 2.0’ के तहत केंद्र सरकार ने झारखंड को 2,500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त विशेष आवंटन (बोनस फंड) भी मंजूर किया है. विभाग का प्रयास यह है कि इस महीने के अंत तक सभी तकनीकी औपचारिकताएं पूरी कर ली जाएं, ताकि जैसे ही फंड रिलीज हो, वैसे ही ग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं के निर्माण कार्य की गति को दोगुना किया जा सके.
विभागीय मंत्री का आधिकारिक बयान
मामले की जानकारी देते हुए झारखंड के पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने कहा कि जेजेएम 2.0 को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के बीच एमओयू की सभी आधिकारिक प्रक्रियाएं सफलतापूर्वक पूरी हो चुकी हैं. हमारी सरकार केंद्रांश की बड़ी राशि को समय पर प्राप्त करने के लिए अनिवार्य तकनीकी और कागजी प्रक्रियाएं पूरी करने में जुटी है. विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे दिन-रात काम करके स्पर्श पोर्टल पर डेटा फीडिंग पूरी करें, ताकि ग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं को बिना किसी बजटीय रुकावट के तेजी से पूरा किया जा सके.
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By समीर उरांव
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