सदमा की अंशु कुमारी बनी थर्ड स्टेट टॉपर, दिहाड़ी मजदूरी का काम करते हैं पिता

Published by :KumarVishwat Sen
Published at :06 May 2026 9:56 PM (IST)
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JAC Inter Result

बेटी अंजु कुमारी को मिठाई खिलाते पिता. फोटो: प्रभात खबर

JAC Inter Result: सदमा की अंशु कुमारी ने इंटर आर्ट्स 2026 में 473 अंक लाकर झारखंड में तीसरा स्थान हासिल किया. दिहाड़ी मजदूर की बेटी ने कठिन हालात में पढ़ाई कर सफलता पाई. शिक्षक बनने का सपना रखने वाली अंशु की उपलब्धि से परिवार और क्षेत्र में खुशी और गर्व का माहौल है. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

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सदमा से रोहित लाल महतो की रिपोर्ट

JAC Inter Result: झारखंड के ओरमांझी प्रखंड के सदमा से एक प्रेरणादायक सफलता की कहानी सामने आई है. पीएम श्री प्रोजेक्ट प्लस टू हाई स्कूल, सदमा की छात्रा अंशु कुमारी ने इंटर आर्ट्स परीक्षा 2026 में 473 अंक हासिल कर पूरे राज्य में तीसरा स्थान प्राप्त किया है. उनकी इस उपलब्धि से पूरे क्षेत्र में खुशी और गर्व का माहौल है.

आर्थिक तंगी के बीच हासिल की बड़ी सफलता

अंशु कुमारी एक साधारण परिवार से आती हैं. उनके पिता श्रवण लोहरा दिहाड़ी मजदूर हैं, जबकि माता किरण देवी भी मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करती हैं. कई बार काम नहीं मिलने के कारण परिवार को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ता है. इन कठिन परिस्थितियों के बावजूद अंशु ने अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया और लगातार मेहनत करती रहीं.

नानी घर रहकर की पढ़ाई

अंशु ने बताया कि घर की स्थिति को देखते हुए उन्होंने नानी के घर चडी गांव में रहकर पढ़ाई की. वहां उन्होंने पूरी एकाग्रता के साथ पढ़ाई पर ध्यान दिया. वह प्रतिदिन 8 से 10 घंटे तक अध्ययन करती थीं. उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने सोशल मीडिया से दूरी बनाए रखी और मोबाइल का उपयोग नहीं किया, जिससे पढ़ाई में ध्यान केंद्रित कर सकीं.

मेहनत और अनुशासन बना सफलता का मंत्र

अंशु कुमारी को पहले से ही विश्वास था कि वह 90 प्रतिशत से अधिक अंक लाकर सफलता हासिल करेंगी. उनका मानना है कि नियमित पढ़ाई, अनुशासन और आत्मविश्वास ही सफलता की कुंजी है. उन्होंने कठिनाइयों को अपनी ताकत बनाया और लगातार अपने लक्ष्य की ओर बढ़ती रहीं.

शिक्षक बनकर करना चाहती हैं सेवा

अंशु कुमारी का सपना आगे चलकर एक सफल शिक्षक बनने का है. वह अपने माता-पिता के सपनों को पूरा करना चाहती हैं और समाज के लिए योगदान देना चाहती हैं. उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, शिक्षकों और परिवार के अन्य सदस्यों—नाना-नानी, मामा-मामी और चाचा-चाची—को दिया है.

माता-पिता की भावुक प्रतिक्रिया

अंशु की सफलता की खबर जब उनके माता-पिता तक पहुंची, तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा. उस समय दोनों मजदूरी के लिए गांव से बाहर गए हुए थे और उन्हें रिजल्ट की जानकारी भी नहीं थी. जब उन्हें फोन पर बताया गया कि उनकी बेटी स्टेट टॉपर बनी है, तो वे तुरंत घर पहुंचे. मां किरण देवी ने अंशु को गले लगाकर खुशी के आंसू बहाए. उन्होंने कहा कि खुद पढ़ाई पूरी न कर पाने का मलाल हमेशा रहा, लेकिन बेटी की सफलता ने वह कमी पूरी कर दी.

विद्यालय में भी जश्न का माहौल

विद्यालय की प्रधानाध्यापिका सीमा रानी गुप्ता ने अंशु की इस उपलब्धि पर खुशी जताई. उन्होंने कहा कि अंशु ने विद्यालय का नाम रोशन किया है और अन्य छात्रों के लिए प्रेरणा बनी हैं. उन्होंने अंशु के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उन्हें बधाई दी.

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प्रेरणा बनी अंशु की सफलता

अंशु कुमारी की कहानी यह साबित करती है कि कठिन परिस्थितियां भी सफलता की राह में बाधा नहीं बन सकतीं, यदि इरादे मजबूत हों. उनकी उपलब्धि आज हजारों छात्रों के लिए प्रेरणा बन गई है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं.

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लेखक के बारे में

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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