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डॉ बासुदेव दास को हटाकर सीआईपी में नए निदेशक की नियुक्ति का इंडियन साइकेट्रिक सोसाइटी ने किया विरोध

इस महत्वपूर्ण पद पर गैर-विशेषज्ञ चिकित्सा अधिकारी, जिसकी मनोचिकित्सा में कोई विशेषज्ञता नहीं है, को इस पद पर नियुक्त किया जाना सही नहीं है. सोसाइटी ने मंत्री और स्वास्थ्य विभाग के महानिदेशक से यह भी आग्रह किया है कि इस महत्वपूर्ण संस्थान की बागडोर किसी विशेषज्ञ मनोचिकित्सक को ही सौंपी जानी चाहिए.

डॉ बासुदेव दास को केंद्रीय मनश्चिकित्सा संस्थान (सीआईपी) के निदेशक के पद से हटाकर उनकी जगह डॉ तरुण कुमार को डायरेक्टर की जिम्मेदारी सौंपे जाने का इंडियन साइकेट्रिक सोसाइटी ने विरोध किया है. सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ विनय कुमार तथा महासचिव डॉ अरविंद ब्रह्मा ने अलग-अलग चिट्ठी लिखकर स्वास्थ्य मंत्री डॉ मनसुख मंडाविया से कहा है कि विभाग ने जल्दबाजी में यह कदम उठाया है. साथ ही यह भी कहा है कि डॉ बासुदेव दास को अपना पक्ष रखने का मौका तक नहीं दिया गया. यहां तक कि इसकी कोई वजह भी नहीं बताई गई है. सोसाइटी के दोनों पदाधिकारियों ने कहा है कि इस कार्रवाई से सोसाइटी के सदस्यों के साथ-साथ चिकित्सकों और सीआईपी के कर्मियों में रोष है. इन्होंने कहा है कि डॉ दास के नेतृत्व में सीआईपी लगातार प्रगति कर रहा था. डॉ तरुण कुमार, जिन्हें सीआईपी का नया निदेशक नियुक्त किया गया है, वे गैर-विशेषज्ञ चिकित्सा अधिकारी हैं. सोसाइटी की ओर से यह भी कहा गया है कि झारखंड की राजधानी रांची के कांके स्थित सीआईपी देश का पहला संस्थान है, जहां मनोचिकित्सा प्रशिक्षण और अनुसंधान दोनों होते हैं. ऐसे में इस महत्वपूर्ण पद पर किसी गैर-विशेषज्ञ चिकित्सा अधिकारी, जिसकी मनोचिकित्सा में कोई विशेषज्ञता नहीं है, को इस पद पर नियुक्त किया जाना सही नहीं है. सोसाइटी ने मंत्री और स्वास्थ्य विभाग के महानिदेशक से यह भी आग्रह किया है कि इस महत्वपूर्ण संस्थान की बागडोर किसी विशेषज्ञ मनोचिकित्सक को ही सौंपी जानी चाहिए.

डॉ बासुदेव दास ने ओपीडी में देखे एक लाख से अधिक मरीज

सोसाइटी के पदाधिकारियों ने कहा है कि प्रोफेसर डॉ बासुदेव दास ने समर्पण और प्रतिबद्धता के साथ सीआईपी में काम किया है. इस दौरान मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में उनकी उल्लेखनीय उपलब्धियां भी हैं. उन्होंने लगभग एक लाख बाह्य रोगियों (ओपीडी) और 8,000 आंतरिक रोगियों का उपचार प्रदान किया है, जो विशेषज्ञता को दर्शाता है. साथ ही यह भी बताता है कि रोगियों को उन पर कितना विश्वास है. डॉ दास मानसिक स्वास्थ्य के प्रति लोगों को जागरूक करने में भी अहम भूमिका निभा रहे हैं.

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साइकेट्रिक सोसाइटी ने की डॉ दास को फिर से बहाल करने की मांग

इंडियन साइकेट्रिक सोसाइटी ने कहा है कि डॉ दास के दृष्टिकोण और नेतृत्व ने हमारे क्षेत्र में मानसिक स्वास्थ्य को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. उन्हें अचानक और बिना किसी स्पष्टीकरण के हटाए जाने से संगठन चिंतित है. ऐसा लगता है कि इस बारे में निर्णय लेने में न तो पारदर्शिता बरती गई है, न निष्पक्षता का ख्याल रखा गया है और न ही उचित प्रक्रिया का पालन किया गया है. नियमित रूप से नियुक्त निदेशक स्तर के अधिकारी को तथ्यों के आधार पर ही हटाया जा सकता है. ऐसे नहीं. सोसाइटी ने स्वास्थ्य मंत्री और स्वास्थ्य विभाग के महानिदेशक से आग्रह किया है कि वे इस निर्णय पर पुनर्विचार करें. डॉ दास को सीआईपी कांके रांची के निदेशक के रूप में फिर से बहाल करें.

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डॉ बासुदेव दास को हटाकर सीआईपी में नए निदेशक की नियुक्ति का इंडियन साइकेट्रिक सोसाइटी ने किया विरोध 3

स्वास्थ्य मंत्रालय ने दिया था ये आदेश

उल्लेखनीय है कि 20 अक्टूबर 2023 को स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से एक आदेश जारी किया गया था, जिसमें कहा गया था कि तत्काल प्रभाव से डॉ तरुण कुमार, सीएमओ (एसएजी) को सीआईपी रांची का डायरेक्टर नियुक्त किया जाता है. साथ ही तत्कालीन डायरेक्टर डॉ बासुदेव दास को निर्देश दिया गया था कि वह डॉ तरुण कुमार को कार्यभार सौंप दें. मंत्रालय की ओर से जारी आदेश में उसी दिन यानी 20 अक्टूबर की शाम पांच बजे तक मंत्रालय को इस आदेश की अनुपालना के बारे में सूचित करने का भी निर्देश दिया गया था.

Mithilesh Jha
Mithilesh Jha
मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है। उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवरेज करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ में भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है। मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है

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