कर्नाटक के सीएम सिद्धरमैया के शपथ ग्रहण में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की उपस्थिति के मायने

कर्नाटक में कांग्रेस पार्टी भारतीय जनता पार्टी को हराकर सत्ता पर काबिज हुई है. इसलिए इसका जश्न भी बड़ा था. शपथ ग्रहण समारोह में गैर-भाजपा दलों की एकजुटता भी दिखी. सिद्धारमैया के शपथ ग्रहण समारोह में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी शामिल हुए.
कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार बन गयी. सिद्धरमैया ने मुख्यमंत्री और डीके शिवकुमार ने डिप्टी चीफ मिनिस्टर पद की शपथ ली. शनिवार को बेंगलुरु के श्री कांतीरवा स्टेडियम में आयोजित यह शपथ ग्रहण समारोह कई मायने में अहम रहा. कर्नाटक में कांग्रेस पार्टी भारतीय जनता पार्टी को हराकर सत्ता पर काबिज हुई है. इसलिए इसका जश्न भी बड़ा था. शपथ ग्रहण समारोह में गैर-भाजपा दलों की एकजुटता भी दिखी. सिद्धारमैया के शपथ ग्रहण समारोह में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी शामिल हुए.
हाल के वर्षों में जहां भी गैर-भाजपा सरकार बनी है, वहां विपक्षी एकजुटता प्रदर्शित करने की पूरी कोशिश हुई है. कर्नाटक में भी यही हुआ. झारखंड में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) की अगुवाई वाली सरकार में कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) दोनों की हिस्सेदारी है. इसलिए हेमंत सोरेन का कर्नाटक जाना लाजिमी है. लेकिन, इसका संकेत स्पष्ट है कि अगले साल यानी वर्ष 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव में भाजपा के खिलाफ सभी दल एकजुट होकर लड़ेंगे.
वर्ष 2024 में लोकसभा के बाद झारखंड में विधानसभा के भी चुनाव होने हैं. मार्च-अप्रैल में संसदीय चुनाव होंगे, तो अक्टूबर-नवंबर में झारखंड विधानसभा के चुनाव होने की संभावना है. पिछली बार यानी वर्ष 2019 के विधानसभा चुनाव में झामुमो, कांग्रेस और राजद ने मिलकर हेमंत सोरेन के नेतृत्व में चुनाव लड़ा था और भाजपा 25 सीट पर सिमट गयी थी. महागठबंधन को बहुमत से कहीं ज्यादा सीटें मिलीं और दूसरी बार प्रदेश में बहुमत की सरकार बनी. यूपीए उस प्रदर्शन को झारखंड में दोहराना चाहेगी. यह एक तरह से यूपीए में हेमंत सोरेन के बढ़ते कद का भी संकेत है.
कर्नाटक सरकार के शपथ ग्रहण में हेमंत सोरेन के अलावा कई अन्य राज्यों के मुख्यमंत्री भी शामिल हुए. समारोह में हेमंत सोरेन को राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के साथ बैठे थे. अशोक गहलोत के बगल में कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी और पार्टी के वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे थे. मंच पर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन भी मौजूद थे. इस समारोह के माध्यम से कांग्रेस ने विपक्षी एकजुटता का संदेश देने का प्रयास किया.
मंच पर उपस्थित भाजपा विरोधी नेताओं ने एक-दूसरे का हाथ पकड़कर विजयी मुद्रा में ऊपर उठाया और एकजुटता का संदेश दिया. कुछ ऐसा ही दृश्य 5 साल पहले बेंगलुरु में एचडी कुमारस्वामी के शपथ ग्रहण समारोह में दिखा था. सिद्धरमैया के शपथ ग्रहण समारोह में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और कांग्रेस के कई अन्य वरिष्ठ नेता शामिल हुए.
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के प्रमुख शरद पवार, बिहार के मुख्यमंत्री एवं जनता दल (यूनाइटेड) के शीर्ष नेता नीतीश कुमार, बिहार के उप मुख्यमंत्री एवं राजद नेता तेजस्वी यादव, झारखंड के मुख्यमंत्री और झामुमो नेता हेमंत सोरेन, नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) के नेता फारूक अब्दुल्ला, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की नेता महबूबा मुफ्ती, राष्ट्रीय लोक दल के अध्यक्ष जयंत चौधरी, और कई अन्य विपक्षी नेताओं के अलावा माकपा महासचिव सीताराम येचुरी, भाकपा महासचिव डी राजा और भाकपा (माले) के प्रमुख दीपंकर भट्टाचार्य ने भी समारोह में भाग लिया.
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ज्ञात हो कि हिमाचल प्रदेश के बाद कर्नाटक दूसरा राज्य है, जहां कांग्रेस पार्टी ने अपने दम पर सत्ता में वापसी की है. कर्नाटक में 224 सदस्यीय विधानसभा के लिए 10 मई को हुए चुनाव में कांग्रेस ने 135 सीटें जीतीं थीं. सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा नीत जनता दल (सेक्युलर) ने क्रमश: 66 और 19 सीटें हासिल कीं थीं.
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By Mithilesh Jha
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