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झारखंड में विवादों के भेंट चढ़ा स्वास्थ्य बीमा योजना, अगले माह से हो सकता है बंद, जानें क्या है वजह

Updated at : 28 Jan 2022 9:52 AM (IST)
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झारखंड में विवादों के भेंट चढ़ा स्वास्थ्य बीमा योजना, अगले माह से हो सकता है बंद, जानें क्या है वजह

झारखंड में चल रही स्वास्थ्य बीमा योजना स्थिति संकट में है. ऐसा इसलिए क्योंकि बीमा कंपनी चुनने के लिए में निजी कंपनियों को शामिल करने पर जंग छिड़ी हुई है. इधर बन्ना गुप्ता ने निजी बीमा कंपनियों को शामिल करने के लिए टेंडर प्रक्रिया स्थगित कर दी है.

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Jharkhand News, Ranchi News रांची : राज्य में फरवरी से स्वास्थ्य बीमा योजना के बंद होने का खतरा पैदा हो गया है. यह स्थिति बीमा कंपनी चुनने के लिए खुल चुके टेंडर में निजी कंपनियों को शामिल करने के मुद्दे पर छिड़ी विभागीय जंग की वजह से पैदा हुई है. बीमा कंपनी चुनने के लिए टेंडर का टेक्निकल बिड खुल चुका है. मंत्री बन्ना गुप्ता ने इस टेंडर में निजी बीमा कंपनियों को शामिल करने के लिए टेंडर प्रक्रिया स्थगित कर दी है. टेंडर के बीच में नियम को नहीं बदला जा सकता है. इसलिए विभाग इसे नियमविरुद्ध मान रहा है.

झारखंड स्टेट आरोग्य सोसाइटी (जासस) के कार्यकारी निदेशक टेंडर प्रक्रिया में निजी कंपनियों को शामिल करने के लिए कैबिनेट से अनुमोदन लेने के लिए विभाग को पत्र लिख रहे हैं. राज्य में स्वास्थ्य बीमा योजना के टेंडर में सिर्फ सरकारी बीमा कंपनियों को ही शामिल करने का नियम लागू है.

इसी नियम के आलोक में टेंडर के सहारे मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना और आयुष्मान भारत योजना के लिए नेशनल इंश्योरेंस कंपनी का चयन किया गया था. कंपनी को सितंबर 2021 तक काम करना था. इसलिए नयी बीमा कंपनी चुनने के लिए टेंडर निकाला गया. इसमें सिर्फ नेशनल इंश्योरेंस कंपनी, यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी, ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी और न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी ने हिस्सा लिया.

टेक्निकल बिड 24 नव‍ंबर और फाइनांशियल बिड 25 नवंबर 2021 को खोलने की तिथि निर्धरित थी. नौ नवंबर को निजी बीमा कंपनी रिलायंस जेनरल इंश्योरेंस, बजाज एलिएंज जेनरल इंश्योरेंस कंपनी, केयर हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी और 16 नवंबर को यूनिवर्सल संपो जेनरल इंश्योरेंस ने विभाग के अलावा जासस में ज्ञापन देकर टेंडर प्रक्रिया में निजी कंपनियों को शामिल करने की मांग की. नौ नवंबर को निजी बीमा कंपनियों का पत्र मिलने के बाद टेंडर प्रक्रिया में उन्हें भी शामिल करने की कवायद शुरू हुई.

मंत्री ने तीन पीत पत्र लिखे. बिड खोलने की तिथि बदली गयी. इसके बाद ही निजी कंपनियों को टेंडर में शामिल करने के लिए पत्राचार शुरू हुआ. साथ ही टेंडर खोलने की तिथि में बदलाव किया गया. निजी कंपनियों को शामिल करने के मामले में बात नहीं बनने पर मंत्री ने नौ दिसंबर को टेंडर प्रक्रिया को अगले आदेश तक स्थगित कर दिया. इससे नयी बीमा कंपनी चुनने की प्रक्रिया ठप पड़ गयी. बीमा योजना को जारी रखने के लिए पहले से काम कर रही नेशनल इंश्योरेंस कंपनी को 31 जनवरी तक काम करने की अनुमति दी गयी.

मंत्री ने पीत पत्र के सहारे टेंडर प्रक्रिया स्थगित की :

स्वास्थ्य मंत्री ने विभाग के अपर मुख्य सचिव अरुण कुमार सिंह को संबोधित करते हुए 13 नवंबर को पहला पीत पत्र लिखा. इसमें उन्होंने टेंडर में निजी बीमा कंपनियों की सहभागिता सुनिश्चित करने की समीक्षा करने को कहा. साथ ही वार्षिक प्रीमियम की राशि में से 8-10 प्रतिशत का प्रावधान योजना के प्रचार-प्रसार के लिए करने की शर्त को भी शामिल करने की बात कही.

मंत्री ने दूसरा पीतपत्र नौ दिसंबर को लिखा. इसमें उन्होंने टेंडर प्रक्रिया को स्थगित कर दिया और निजी कंपनियों की भागीदारी सुनिश्चित करने को कहा. विभाद द्वारा असहमति जताये जाने पर मंत्री ने तीसरा पीत पत्र छह जनवरी 2022 को लिखा. इसमें उन्होंने लिखा कि क्या निजी कंपनियों को शामिल नहीं करना नैसर्गिक न्याय के अनुकूल होगा.

विभाग ने टेंडर की शर्तों में बदलाव को बताया विवादास्पद :

मंत्री के पीत पत्रों में वर्णित तथ्यों पर विभाग ने विचार करने पर अपनी असहमति जतायी. विभाग ने समीक्षा के बाद पाया कि कैबिनेट ने बीमा योजना में सिर्फ सरकारी बीमा कंपनियों को ही कार्यकारी एजेंसी के रुप में चुनने का फैसला किया था. इस फैसले के आलोक में निविदा आमंत्रित की जा चुकी है.

टेक्निकल बिड खुल चुका है. तकनीकी बिड खोले जाने के बाद निविदा शर्तों में बदलाव से मामला विवादास्पद हो सकता है. जासस के कार्यकारी निदेशक भुनेश प्रताप सिंह ने विभाग के अपर मुख्य सचिव को लिखा कि टेंडर में निजी बीमा कंपनियों की सहभागिता के लिए प्रस्ताव पर मंत्री परिषद की स्वीकृति अनिवार्य है. इसके आलोक में अग्रेतर कार्रवाई करें.

Posted By : Sameer Oraon

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