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सीएम से मिले गुमला विधायक भूषण तिर्की, इंटर महिला कॉलेज की स्थायी प्रस्वीकृति की मांग

Updated at : 12 Aug 2021 12:42 PM (IST)
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सीएम से मिले गुमला विधायक भूषण तिर्की, इंटर महिला कॉलेज की स्थायी प्रस्वीकृति की मांग

विधायक भूषण तिर्की बुधवार को रांची में सीएम हेमंत सोरेन से मिले. मांग पत्र प्रेषित कर इंटर महिला महाविद्यालय गुमला को स्थायी प्रस्वीकृति देने की मांग की है.

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गुमला : गुमला के विधायक भूषण तिर्की बुधवार को रांची में सीएम हेमंत सोरेन से मिले. मांग पत्र प्रेषित कर इंटर महिला महाविद्यालय गुमला को स्थायी प्रस्वीकृति देने की मांग की है. विधायक ने कहा है कि इंटर महिला कॉलेज गुमला में जनजातीय बहुल जिले का एकमात्र महिला कॉलेज है. जिसकी स्थापना के साथ ही तत्कालीन बिहार सरकार की नीति के तहत यह निर्णय लिया गया था कि प्रत्येक जिला मुख्यालय में एक महिला कॉलेज हो.

जून 1983 में यहां उच्च नारी शिक्षा की पहल की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए स्थानीय जिला प्रशासन द्वारा यहां के प्रबुद्धजनों के सहयोग से कॉलेज शुरू किया गया.

अपने स्थापना काल से अब तक यह कॉलेज अपने कर्तव्य पथ पर अग्रसर जनजातीय बालाओं के बीच निर्बाध गति से उच्च नारी शिक्षा का अलख जगा रहा है. कॉलेज केशर-ए-हिंद की भूमि मौजा करमटोली में स्थित है, जो मुख्यमंत्री बिहार सरकार के द्वारा देय राशि पांच लाख द्वारा निर्मित भवन है. जमीन पर चहारदीवारी के साथ स्वामित्व भी है. तत्कालीन मुख्यमंत्री बिंदेश्वरी दूबे द्वारा शिलान्यास तथा भागवत झा आजाद द्वारा उद्घाटन किया गया था.

वर्तमान में इस भूमि के अतिरिक्त मौजा करौंदी में तीन एकड़ टोकन मूल्य पर बंदोबस्ती करने हेतु भूमि राजस्व विभाग के प्रधान सचिव के पास विचाराधीन है. उक्त भूमि को टोकन राशि पर हस्तांतरित करने की मांग मुख्यमंत्री जनसंवाद के द्वारा दर्ज करायी गयी है. जो कि अभी तक विचाराधीन है.

ज्ञात हो कि टोकन राशि के संबंध में झारखंड सरकार की राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के प्रधान सचिव द्वारा प्रेस विज्ञप्ति जारी की गयी है. महाविद्यालय सोसाइटी रजिस्ट्रेशन एक्ट के अधीन निंबंधित है. पुस्तकालय, प्रयोगशाला, खेल मैदान, छात्रावास, कला एवं वाणिज्य संकायों हेतु पर्याप्त शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मचारी एवं लगभग 300 छात्राएं अध्ययनरत हैं.

परीक्षाफल हमेशा शत-प्रतिशत होता रहा है. परंतु दुर्भाग्यवश 37 वर्षों के उपरांत भी अब तक स्थायी प्रस्वीकृति नहीं मिल पायी है. उन्होंने आदिवासी बहुल गुमला जैसे पिछड़े जिले में स्थित महाविद्यालय से संबंधित सभी नियमों को शिथिल करते हुए इसे स्थायी प्रस्वीकृति प्रदान करने की मांग की है.

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