रांची में 9.30 एकड़ की अवैध जमीन खरीद बिक्री मामले में पूर्व DC की भूमिका संदिग्ध, सरकार ने दिये जांच के आदेश

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दिसंबर 2022 में भू-राजस्व विभाग ने रांची के उपायुक्त से खासमहाल जमीन की अवैध खरीद-बिक्री के लिए की गयी कार्रवाई से संबंधित रिपोर्ट मांगी थी. जनवरी 2023 में रांची के उपायुक्त ने विभाग को रिपोर्ट सौंपी.

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रांची के नामकुम अंचल में खासमहाल की 9.30 एक़ड़ जमीन अवैध तरीके से खरीद-बिक्री के मामले में रांची के पूर्व उपायुक्त छवि रंजन की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है. राज्य सरकार ने छवि रंजन द्वारा मामले में किये गये विरोधाभाषी निर्णयों की जांच करने का आदेश दिया है. दक्षिणी छोटानागपुर प्रमंडल के आयुक्त को तत्कालीन उपायुक्त द्वारा अवर निबंधक व अन्य के विरुद्ध तथ्य छुपा कर रजिस्ट्री करने के लिए कार्रवाई की अनुशंसा करने और बाद में अपने न्यायालय में उक्त भूमि से संबंधित कपटपूर्ण निबंधन वाद खारिज करने के विरोधाभाषी फैसले के बिंदुओं पर जांच करने को कहा है.

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भू-राजस्व विभाग द्वारा रिपोर्ट मांगने पर खुला मामला :

दिसंबर 2022 में भू-राजस्व विभाग ने रांची के उपायुक्त से खासमहाल जमीन की अवैध खरीद-बिक्री के लिए की गयी कार्रवाई से संबंधित रिपोर्ट मांगी थी. विभाग द्वारा जिला या निबंधन कार्यालय द्वारा कपटपूर्ण निबंधन के संबंध में की गयी कार्रवाई से अवगत कराने को कहा गया.

जनवरी 2023 में रांची के उपायुक्त ने विभाग को रिपोर्ट सौंपी. बताया कि वर्ष 2020-21 में खासमहाल भूमि की अवैध तरीके से की गयी खरीद-बिक्री के लिए कपटपूर्ण निबंधन वाद उपायुक्त के न्यायालय में शुरू किया गया था. मई 2022 में तत्कालीन उपायुक्त ने आदेश पारित कर वाद समाप्त कर दिया. उन्होंने वाद को स्वीकार योग्य नहीं बताते हुए खारिज कर दिया. इस पर संज्ञान लेते हुए जांच का आदेश दिया गया है.

क्या है पूरा मामला:

दिसंबर 2020 में रांची के तत्कालीन उपायुक्त छविरंजन ने नामकुम अंचल के पुगड़ु मौजा में खाता संख्या 93, प्लॉट संख्या 543, 544, 548 व 547 में कुल रकबा 9.30 एकड़ जमीन को खासमहाल बताते हुए इसकी रजिस्ट्री को अवैध करार दिया था. उपायुक्त ने खासमहाल जमीन की अवैध बिक्री के लिए रांची के अवर निबंधक व खासमहाल पदाधिकारी सह भूमि सुधार उपसमाहर्ता को दोषी बताते हुए कार्रवाई की अनुशंसा की थी, लेकिन, मई 2022 में तत्कालीन उपायुक्त ने अपने न्यायालय में चल रहे उक्त भूमि के कपटपूर्ण निबंधन वाद को ही स्वीकार योग्य नहीं बताते हुए खारिज कर दिया.

प्रतिबंधित है लीज पर दी गयी खासमहाल जमीन की खरीद-बिक्री :

अंग्रेजी हुकूमत में खासमहाल इस्टेट बनाया गया था. जमींदारी प्रथा समाप्त होने के बाद जब्त जमीन को भी इसमें शामिल किया गया. खास महाल जमीन का मालिकाना हक भारत सरकार के पास होता है. इसके अंतर्गत सरकारी और रैयती दोनों तरह की जमीन आती है. 60 के दशक में सरकार ने कुछ लोगों और संस्थानों को खासमहाल की भूमि लीज पर दी थी.

80 के दशक में भी रांची में करीब एक हजार लोगों को जीविकोपार्जन के लिए खासमहाल जमीन लीज पर दी गयी थी. लीज की अनिवार्य शर्त के मुताबिक जमीन का हस्तांतरण किसी भी हाल में नहीं किया जा सकता है. खासमहाल भूमि की खरीद-बिक्री पूरी तरह से प्रतिबंधित है.

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