राज्य के 13 बालू घाटों को सिया से पर्यावरण स्वीकृति, इधर, 10 से एनजीटी की रोक

Updated at : 06 Jun 2024 11:25 PM (IST)
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Birsa Munda

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राज्यभर में 13 बालू घाटों को स्टेट इनवायरमेंट इंपेक्ट असेसमेंट अथॉरिटी (सिया) से पर्यावरण स्वीकृति (इसी) मिल गयी है.

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रांची.राज्यभर में 13 बालू घाटों को स्टेट इनवायरमेंट इंपेक्ट असेसमेंट अथॉरिटी (सिया) से पर्यावरण स्वीकृति (इसी) मिल गयी है. पर इसके बावजूद घाटों से बालू की निकासी नहीं की जा सकती. वजह है कि 10 जून से 15 अक्तूबर तक बालू घाटो से बालू की निकासी पर रोक लग जायेगी. वहीं इन 13 बालू घाटों को प्रदूषण नियंत्रण पर्षद से कंसेट टू ऑपरेट (सीटीओ) व सीटीइ लेना भी है. जिसमें भी एक से दो दिन का समय लग जाता है. हालांकि राज्य के कई जिलों में स्टॉकिस्ट का लाइसेंस दिया गया है. ताकि जेएसएमडीसी से बालू लेकर वो स्टॉक में रखे सके और मॉनसून के दौरान बालू की आपूर्ति कर सके. ये स्टॉक राज्य में पूर्व से संचालित 23 घाटों से किया जा रहा है. जेएसएमडीसी द्वारा सभी डीएमओ को पत्र भेज कर कह दिया गया है कि नौ जून को शाम पांच बजे तक ही बालू घाटों से बालू की निकासी की जा सकती है. 10 जून से 15 जून तक एनजीटी के आदेश से बालू की निकासी किसी भी सूरत में नहीं की जायेगी और इसे डीएमओ सुनिश्चित करेंगे.

रांची जिले में 14 स्टॉकिस्ट लाइसेंस धारी

रांची जिले में 14 स्टॉकिस्ट लाइसेंस जारी किये गये हैं. जिसमें सोनाहातू में पांच को लाइसेंस दिया गया है. यहां हेतमसरिया प्लास्टिक लिमिटेड को दो, एवरग्रीन इंटरप्राइजेज, भूतनाथ महतो व एसएस इंटरप्राइजेज को एक-एक स्टॉकिस्ट लाइसेंस मिला है. इसके अलावा बुंडू में चार, बुढ़मू में तीन व सिल्ली तथा नगड़ी में एक-एक को लाइसेंस मिला है. जिनके द्वारा बालू का स्टॉक किया जा रहा है.

ब्लैक में बालू 40 से 45 हजार रुपये हाइवा

रांची में अभी भी ब्लैक में बालू मिल रहा है. वह भी 40 से 45 हजार रुपये प्रति हाइवा की दर से. मांग के अनुरूप बालू न मिलने की वजह से दर अधिक है. बालू कारोबारी ने बताया कि प्रत्येक थाने में सुविधा शुल्क देते हैं, तब बमुश्किल बालू शहर में ला पाते हैं. बिहार से वैध चालान होने के बावजूद थाने-थाने में में 500 से 1000 रुपये देते हैं, तब बालू रांची तक ला पाते हैं. रांची में यदि वैध रूप से बालू घाट संचालित होने लगे तो यह समस्या नहीं रहेगी. रांची में 19 बालू घाटों में से 18 बालों घाटों के लिए टेंडर कर माइंस डेवलपर ऑपरेटर की नियुक्ति कर ली गयी है. जिसमें अब तक दो घाटों को ही इसी मिली है. बालू कारोबारी बताते हैं कि अब एनजीटी की रोक लगने के बाद स्टॉकिस्ट से भी यदि उचित दर पर बालू उपलब्ध होगा, तब भी दर कम होने का अनुमान कम है.

444 बालू घाटों में 116 का माइनिंग प्लान मंजूर

राज्यभर के 444 बालू घाटों में 130 के माइंस डेवलपर ऑपरेटर(एमडीओ) की नियुक्ति कर ली गयी है. 242 एमडीओ के चयन की अंतिम प्रक्रिया पूरी कर ली गयी है. इन्हें लेटर ऑफर इंटेंट (एलओआइ) दे दिया गया है. इन सभी घाटों में 116 घाटों का माइनिंग प्लान डीएमओ द्वारा मंजूर कर लिये गये हैं. 75 अन्य घाटों के माइनिंग प्लान मंजूरी के लिए डीएमओ के पास भेजा गया है, 41 घाटों का मामला पेंडिंग है. गौरतलब है कि इसी लेने के पूर्व माइनिंग प्लान की मंजूरी, ग्राम सभा की मंजूरी लेनी पड़ती है. इसके बाद सिया के पास आवेदन देकर इसी लेना पड़ता है. फिर सीटीओ और सीटीइ लेने के बाद ही घाटों से बालू की निकासी की जा सकती है.

इन घाटों को मिली सिया से इसी

घाट-जिला-एरिया(हेक्टेयर में)बांसेहार-जामताड़ा-4.91

अमलाचाता-जामताड़ा-3.42हरीपुर-दुमका-2.39

बानकाटा-पूर्वी सिंहभूम-4.40नोर्थ कोयर-गढ़वा-4.38

कांकेर खुर्द-पलामू-4.08चोकेरसारंग-3.50

सुंडील-रांची-4.00सिरसा-दुमका-1.65

बरमसिया-दुमका-3.65नौरांगी-दुमका-3.65

कटानई-दुमका-4.95

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