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Double Bonanza : माइनिंग एक्सप्लोरेशन एजेंसी बनी मेकॉन, SAIL-ISP से मिला 25 करोड़ का ठेका

Updated at : 22 Mar 2024 7:48 PM (IST)
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प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते संदीप सिन्हा, पीके दास, डीके खांडेकर और एके मिश्रा.

खनन कंपनियों के लिए कंसल्टेंसी का काम करने वाले मेकॉन को भारत सरकार के खनन मंत्रालय ने माइनिंग एक्सप्लोरेशन एजेंसी का दर्जा दिया है. 25 करोड़ का ठेका भी मिला,

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वित्तीय वर्ष के खत्म होने और होली के त्योहार से पहले रांची की प्रतिष्ठित कंपनी मेकॉन के लिए दो बड़ी खुशखबरी है. पहली यह कि कंपनी को 25 करोड़ की कंसल्टेंसी का एक बड़ा ठेका मिला है. वहीं, अब तक खनन एवं खनिज कंपनियों के लिए कंसल्टेंसी का काम करने वाले मेकॉन को माइनिंग एक्सप्लोरेशन एजेंसी का दर्जा भी मिल गया है.

अब भारत में खदानों का भी पता लगाएगा मेकॉन

जी हां. भारत सरकार के खनन मंत्रालय ने रांची की कंपनी मेकॉन को खदानों का पता लगाने की जिम्मेदारी सौंपी है. इसकी अधिसूचना जारी हो चुकी है. अब तक यह कंपनी खनन और खनिज उद्योगों के लिए काम करती थी. इसका काम उद्योगों में अयस्क बॉडी मॉडलिंग से लेकर संसाधन संबंधी अनुमान, खान की योजना और उसकी डिजाइन, मिनरल बेनीफिकेशन समेत अन्य काम हुआ करते थे.

कंसल्टेंसी कंपनी से माइनिंग एक्सप्लोरेशन एजेंसी बनी मेकॉन

भारत सरकार ने अब इस कंपनी को खनिज की खदानों का पता लगाने की भी जिम्मेदारी सौंपी है. मेकॉन में खनन विभाग से जुड़े डीके खांडेकर और एके मिश्रा ने बताया कि हमारी कंपनी अब तक देश-दुनिया की कंपनियों के लिए कंसल्टेंसी का काम करती थी. पहले हम स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया (सेल), नेशनल थर्मल पावर कॉर्पोरेशन (एनटीपीसी), एनएमडीसी और जेएसडब्ल्यू जैसी कंपनियों को परामर्श दिया करते थे.

सटीक खनिज भंडार का पता लगाएगा मेकॉन

उन्होंने बताया कि कई बार ऐसा होता था कि खनिज के भंडार का अनुमान कुछ और होता था और खनिज की मात्रा कुछ और होती थी. लेकिन, मेकॉन के पास ऐसे अत्याधुनिक सॉफ्टवेयर और दक्ष जियोलॉजिस्ट हैं, जो सटीक खनिज भंडार का पता लगा सकते हैं. एके मिश्रा ने कहा कि तीन चरणों में काम होता है. जियोलॉजिस्ट खनिज संपदा की खोज करते हैं. फिर उसकी माइनिंग होती है और उसके बाद उस खनिज को उद्योगों के इस्तेमाल के लायक बनाया जाता है.

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खनिज से जुड़े उद्योगों को भी होगा फायदा

एके मिश्रा ने कहा कि मेकॉन के इस फील्ड में आने के बाद खनन कंपनियों के साथ-साथ उस खनिज से जुड़े उद्योगों को भी फायदा होने वाला है. हमलोग खनिज की खोज के लिए पूरी तरह से तैयार हैं. डीके खांडेकर ने कहा कि हमलोग 6 दशक से खान एवं खनन कंपनियों को कंसल्टेंसी दे रहे हैं. अब हम इस नई जिम्मेदारी के लिए भी तैयार हैं.

मेकॉन को सेल-आईएसपी बर्नपुर से मिला 25 करोड़ का ठेका

मेकॉन के जीएम (मार्केटिंग) पीके दास ने बताया कि कंपनी को पश्चिम बंगाल के बर्नपुर स्थित इस्को इस्पात संयंत्र से 25 करोड़ का एक ऑर्डर मिला है. जल्द ही कंपनी बर्नपुर आईएसपी से जुड़े दो और बड़े टेंडर में भाग लेगी और उम्मीद है कि इसमें भी उसे सफलता मिलेगी. देश की तरक्की और लोगों को रोजगार प्रदान करने में इसकी अहम भूमिका होगी.

2030 तक स्टील का उत्पादन 300 मीट्रिक टन करने का लक्ष्य

पीके दास ने बताया कि राष्ट्रीय इस्पात नीति के तहत भारत सरकार वर्ष 2030 तक स्टील का उत्पादन बढ़ाकर 300 मीट्रिक टन करना चाहती है. इसी उद्देश्य की प्राप्ति के लिए स्टील संयंत्रों का विस्तार किया जा रहा है. सेल की अनुषंगी इकाई के रूप में काम करने वाली इस्को इस्पात संयंत्र की क्षमता भी बढ़ाई जा रही है. वर्तमान में इस संयंत्र की क्षमता 2.05 मीट्रिक टन प्रति वर्ष है.

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सेल-आईएसपी का बढ़ेगा उत्पादन

इसमें प्रति वर्ष 4.08 मीट्रिक टन अतिरिक्त स्टील का उत्पादन करना है. इस तरह इस्को इस्पात संयंत्र की क्षमता बढ़कर 7.1 मीट्रिक टन प्रति वर्ष हो जाएगी. संयंत्र का विस्तार मौजूदा कैंपस में ही होगा. इससे बड़े पैमाने पर रोजगार का सृजन होगा और भारत के इस्पात उद्योग को बड़ा बूस्ट भी मिलेगा. मेकॉन के

6 दशक से खनिज ए‍वं खनन कंपनियों के साथ काम कर रहा मेकॉन

संदीप सिन्हा चीफ जेनरल मैनेजर (मार्केटिंग) संदीप सिन्हा ने बताया कि पिछले 6 दशक से हमारी कंपनी खनिज एवं खनन से जुड़ी कंपनियों को अपनी सेवा दे रही है. बर्नपुर स्थित सेल-आईएसपी के पिछले विस्तार में भी उनकी इंजीनियरिंग एवं परियोजना प्रबंधन के बारे में परामर्श मेकॉन ने ही दिया था.

सेल-आईएसपी बर्नपुर के नए संयंत्र के लिए कंसल्टेंसी का टेंडर मेकॉन के नाम

उन्होंने बताया कि सेल-आईएसपी बर्नपुर के नए संयंत्र के लिए कंसल्टेंसी का टेंडर मेकॉन के नाम हो चुका है. अब 14 टेक पैकेज के अलावा अन्य 50 पैकेज पर भी कंपनी की नजर है. संदीप सिन्हा ने उम्मीद जताई कि ये सारे टेंडर मेकॉन को ही मिलेंगे, जिसमें बर्नपुर स्थित सेल-आईएसपी में बनने वाले नए ब्लास्ट फर्नेस और अन्य संयंत्रों के उपकरण की खरीद एवं इंजीनियरिंग के टेंडर शामिल हैं.

18 सरकारी, गैर-सरकारी कंपनियों के साथ काम करता रहा है मेकॉन

संदीप सिन्हा ने बताया कि 1960 के दशक से मेकॉन भारत के इस्पात उद्योग का प्रमुख परामर्शदाता (कंसल्टेंट) रहा है. पांच दशक से 18 से अधिक सरकारी और गैर-सरकारी इस्पात संयंत्रों के साथ और उनके लिए काम कर रहा है. उसके पास इस काम के लिए एक्सपर्ट की टीम है. इसलिए उम्मीद है कि सेल-आईएसपी के बाकी टेंडर भी उसी को मिलेंगे.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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