रांची में 16 जून को निकलेगी घरेलू कामगारों की रैली, फिर होगी जनसभा

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प्रेस वार्ता करते घरेलू कामगार राष्ट्रीय मंच की पदाधिकारी. फोटो: प्रभात खबर

Ranchi News: अंतरराष्ट्रीय घरेलू कामगार दिवस पर रांची में घरेलू कामगार राष्ट्रीय मंच के बैनर तले रैली और जनसभा आयोजित होगी. कामगार न्यूनतम वेतन, सामाजिक सुरक्षा, पेंशन, स्वास्थ्य सुविधा और अलग कानून बनाने समेत विभिन्न मांगों को सरकार के सामने रखेंगे. आईएलओ कन्वेंशन-189 की 15वीं वर्षगांठ भी मनाई जाएगी. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

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रांची से प्रवीण मुंडा की रिपोर्ट

Ranchi News: अंतरराष्ट्रीय घरेलू कामगार दिवस के अवसर पर 16 जून को राजधानी रांची में घरेलू कामगारों की ओर से रैली और जनसभा का आयोजन किया जाएगा. घरेलू कामगार राष्ट्रीय मंच के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम के माध्यम से कामगार अपनी विभिन्न मांगों को सरकार और समाज के समक्ष रखेंगे. कार्यक्रम को लेकर सोमवार को पुरुलिया रोड स्थित एसडीसी सभागार में संवाददाता सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें संगठन के पदाधिकारियों ने इसकी विस्तृत जानकारी दी.

जयपाल सिंह स्टेडियम से निकलेगी रैली

घरेलू कामगार राष्ट्रीय मंच की राज्य संयोजक सिस्टर अंशू ने बताया कि मंगलवार को दिन के 12 बजे जयपाल सिंह स्टेडियम से रैली की शुरुआत होगी. यह रैली शहर के विभिन्न मार्गों से गुजरते हुए नागा बाबा खटाल के समीप पहुंचेगी, जहां एक जनसभा का आयोजन किया जाएगा. उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य घरेलू कामगारों की समस्याओं और मांगों को सरकार तथा समाज के सामने प्रभावी ढंग से रखना है. अक्सर घरों में काम करने वाले लाखों श्रमिकों का योगदान दिखाई तो देता है, लेकिन उनके अधिकारों की चर्चा उतनी नहीं होती जितनी होनी चाहिए.

यूनियन पदाधिकारियों ने रखी अपनी बात

संवाददाता सम्मेलन में झारखंड घरेलू कामगार यूनियन की अध्यक्ष अनिपा देवी, कोषाध्यक्ष रेणु लिंडा और सचिव आशा देवी भी मौजूद थीं. उन्होंने कहा कि रैली और जनसभा के माध्यम से घरेलू कामगार अपनी आवाज बुलंद करेंगे. पदाधिकारियों ने कहा कि घरेलू कामगारों को अभी भी कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है. ऐसे में सरकार से अपेक्षा है कि उनकी समस्याओं के समाधान के लिए ठोस कदम उठाए जाएं.

क्या हैं घरेलू कामगारों की प्रमुख मांगें

घरेलू कामगार राष्ट्रीय मंच की ओर से कई महत्वपूर्ण मांगें उठाई गई हैं. इनमें नियोक्ता के घर को कार्यस्थल घोषित करने, घरेलू कामगारों के मानसिक और शारीरिक शोषण पर रोक लगाने तथा उनके लिए अलग राज्य स्तरीय कानून बनाने की मांग प्रमुख है. इसके अलावा संगठन ने सेवानिवृत्त घरेलू कामगारों के लिए पेंशन की व्यवस्था, उचित मजदूरी का भुगतान, रोजगार का पंजीकरण, न्यूनतम वेतन और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी मांग की है. मंच का कहना है कि घरेलू कामगारों को स्वास्थ्य सुविधा, दुर्घटना बीमा, कार्यस्थल पर सम्मान और शिकायत निवारण की प्रभावी व्यवस्था भी उपलब्ध कराई जानी चाहिए.

आइएलओ कन्वेंशन-189 की 15वीं वर्षगांठ

सिस्टर अंशू ने बताया कि इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) के कन्वेंशन-189 की 15वीं वर्षगांठ मनाई जा रही है. उन्होंने कहा कि 15 वर्ष पहले इस कन्वेंशन के माध्यम से घरेलू कामगारों को सम्मानजनक श्रमिक के रूप में मान्यता प्रदान की गई थी. हालांकि, आज भी देश और झारखंड के लाखों घरेलू कामगारों को उनके श्रम के अनुरूप सम्मान और पर्याप्त कानूनी सुरक्षा नहीं मिल पा रही है. उन्होंने कहा कि घरेलू कामगारों के अधिकारों को सुनिश्चित करने के लिए ठोस नीतिगत पहल की आवश्यकता है.

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सम्मान और सुरक्षा की मांग

संगठन का कहना है कि घरेलू कामगार समाज और अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, लेकिन लंबे समय से वे संगठित क्षेत्र के श्रमिकों की तरह सुविधाओं और सुरक्षा से वंचित हैं. ऐसे में रोजगार का पंजीकरण, न्यूनतम वेतन, पेंशन, स्वास्थ्य सुविधाएं और सामाजिक सुरक्षा जैसी व्यवस्थाओं को लागू करना समय की आवश्यकता है. घरेलू कामगारों का मानना है कि सम्मानजनक कार्य परिस्थितियां और कानूनी संरक्षण सुनिश्चित होने से उनके जीवन स्तर में सुधार आएगा और उन्हें समाज में उचित पहचान मिल सकेगी.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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