JPSC Students Protest: रांची में लंबा खिंचेगा आंदोलन, छात्रों को मिल गया नया मंच

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आंदोलनकारी छात्रों को खिचड़ी परोसते रांची के लोग. फोटो: प्रभात खबर

आंदोलनकारी छात्रों को खिचड़ी परोसते रांची के लोग. फोटो: प्रभात खबर

रांची में JPSC परीक्षा में अनियमितताओं के आरोपों को लेकर छात्र आंदोलन जारी है. राज्य सरकार से परीक्षा रद्द करने की अपील के साथ छात्रों को एक नया मंच मिला है, जिससे आंदोलन के लंबा खिंचने के संकेत हैं.

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रांची से राजलक्ष्मी, अभिषेक आनंद और अरविंद कुमार सिंह की रिपोर्ट

JPSC Students Protest: रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में चल रहे छात्र आंदोलन ने शनिवार को नया मोड़ ले लिया. आंदोलनकारी छात्रों ने राज्य सरकार से हाथ जोड़कर अपील की कि कथित अनियमितताओं के आरोपों के बीच JPSC परीक्षा रद्द की जाए और JSSC-CGL परीक्षा की भी निष्पक्ष जांच कराई जाए. छात्रों का कहना है कि वे केवल पारदर्शी और निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया चाहते हैं, ताकि योग्य अभ्यर्थियों के साथ न्याय हो सके. इस बीच, खिचड़ी खाते-खाते आंदोलनकारी छात्रों को अच्छी खबर मिली और वह यह थी कि रांची के उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री ने उन्हें अलग से मंच बनाने की अनुमति दे दी है. उपायुक्त की ओर से मंजूरी मिलने के बाद अब छात्रों का आंदोलन लंबा खिंचने के आसार नजर आ रहे हैं.

तिरपाल लगाने से रोका, धूप-बारिश में डटे रहे छात्र

आंदोलन के दौरान छात्रों ने प्रदर्शन स्थल पर तिरपाल लगाने की कोशिश की, लेकिन प्रशासन ने इसकी अनुमति नहीं दी. इसके बाद छात्रों ने साफ कहा कि वे तेज धूप और बारिश की परवाह किए बिना आंदोलन जारी रखेंगे. उनका कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक वे प्रदर्शन स्थल नहीं छोड़ेंगे.

रांची डीसी से मिली राहत, अब बनेगा अलग मंच

दिनभर के प्रदर्शन के बीच छात्रों को उस समय राहत मिली, जब रांची जिला प्रशासन ने उन्हें अलग मंच बनाने की अनुमति दे दी. छात्र खिचड़ी खाकर आंदोलन जारी रखे हुए थे, तभी यह सूचना मिली. अनुमति मिलने के बाद आंदोलनकारियों ने इसे अपनी आंशिक जीत बताया और कहा कि अब वे अधिक व्यवस्थित तरीके से अपनी बात सरकार और जनता तक पहुंचा सकेंगे.

बारिश में भी नहीं डिगे छात्र, लौटने से किया इंकार

शाम को बारिश शुरू होने के बावजूद छात्र अपने संकल्प पर अडिग रहे. कई छात्र तिरपाल हाथ में लेकर खड़े रहे, जबकि कुछ खुले आसमान के नीचे ही डटे रहे. आंदोलनकारियों ने कहा कि भीग जाना स्वीकार है, लेकिन बिना न्याय के वापस लौटना स्वीकार नहीं. उनका कहना है कि यह लड़ाई केवल एक परीक्षा की नहीं, बल्कि राज्य के लाखों युवाओं के भविष्य की है.

पोस्टर और प्रतीकों से जताया विरोध

प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने अलग-अलग पोस्टर और प्रतीकों के जरिए भी अपना विरोध दर्ज कराया. एक पोस्टर में कथित "रेट चार्ट" दिखाया गया, जबकि दूसरे में नोटों की गड्डियों का चित्र बनाकर भर्ती प्रक्रिया में भ्रष्टाचार के आरोपों पर सवाल उठाए गए. इन प्रतीकों के माध्यम से छात्रों ने अपनी नाराजगी और पारदर्शी चयन प्रक्रिया की मांग को प्रमुखता से सामने रखा.

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जेएलकेएम के मंच से अलग हुए छात्र

आंदोलन के दौरान कुछ छात्रों ने जेएलकेएम के मंच से अलग होकर अपना स्वतंत्र मंच तैयार करने का निर्णय लिया. छात्रों ने कहा कि उनका आंदोलन पूरी तरह गैर-राजनीतिक है और इसे किसी दल से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए. इस दौरान कई छात्रों ने कहा, "हम खांटी झारखंडी हैं, न यूपी से हैं, न बिहार से." उनका कहना था कि उनका संघर्ष केवल झारखंड के युवाओं के अधिकार, पारदर्शी भर्ती व्यवस्था और न्यायपूर्ण चयन प्रक्रिया के लिए है.

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कुमार विश्वत सेन

लेखक के बारे में

By कुमार विश्वत सेन

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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