परिसीमन के संभावित असर पर राज्यपाल से मिले आदिवासी प्रतिनिधि, पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों की स्थिति पर जतायी चिंता
झारखंड के पूर्व मंत्री बंधु तिर्की.
पूर्व मंत्री बंधु तिर्की के नेतृत्व में आदिवासी प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से मुलाकात कर पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों में परिसीमन के संभावित प्रभावों पर चिंता जताई. उन्होंने सीटों के अनुपात में बदलाव से आदिवासी राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर पड़ने वाले असर पर भी ध्यान दिलाया.
रांची. पूर्व मंत्री बंधु तिर्की के नेतृत्व में आदिवासी प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को लोकभवन में राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार से मुलाकात की. प्रतिनिधिमंडल ने उन्हें ज्ञापन सौंपकर पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों में परिसीमन के संभावित प्रभाव, जनसांख्यिकीय बदलाव, विस्थापन, पलायन और आदिवासी समाज के राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़े मुद्दों पर ध्यान आकृष्ट कराया.
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि परिसीमन की प्रक्रिया में केवल वर्तमान जनसंख्या को आधार नहीं बनाया जाना चाहिए. पांचवीं अनुसूची की संवैधानिक भावना, ऐतिहासिक परिस्थितियों तथा आदिवासी क्षेत्रों की सामाजिक और भौगोलिक संरचना को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए. प्रतिनिधिमंडल ने विकास परियोजनाओं के कारण हुए विस्थापन और दशकों से जारी पलायन को भी परिसीमन के संदर्भ में विचार करने की मांग की.
एसटी-एससी सीटों का मौजूदा अनुपात बरकरार रखने की मांग
प्रतिनिधिमंडल ने आशंका जतायी कि परिसीमन के दौरान विधानसभा सीटों के अनुपात में बदलाव होने से आदिवासी समाज का राजनीतिक प्रतिनिधित्व प्रभावित हो सकता है. इसलिए एसटी और एससी के लिए मौजूदा सीट अनुपात को बरकरार रखते हुए ही विधानसभा सीटों में वृद्धि करने की मांग की गयी.
प्रतिनिधिमंडल का कहना था कि झारखंड के आदिवासी क्षेत्रों की सामाजिक संरचना और ऐतिहासिक परिस्थितियों को देखते हुए परिसीमन को केवल आंकड़ों के आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए. इसमें जनसंख्या के साथ विस्थापन और पलायन जैसे पहलुओं को भी शामिल किया जाना जरूरी है.
परिसीमन की मांगें मुख्यमंत्री के समक्ष रखने का सुझाव
राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने प्रतिनिधिमंडल को सुझाव दिया कि इन मांगों और चिंताओं को मुख्यमंत्री के समक्ष भी रखा जाये तथा इस विषय पर गंभीरता से चर्चा हो. उन्होंने झारखंड विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर परिसीमन को लेकर स्पष्ट प्रस्ताव पारित करने और उसे राज्यपाल के माध्यम से भारत सरकार को भेजने की दिशा में पहल करने की बात कही.
राज्यपाल ने इसे गंभीर और समयबद्ध विषय बताते हुए कहा कि समय रहते ठोस पहल नहीं हुई, तो आदिवासी समाज के सामने जनसंख्या, भाषा, संस्कृति, पहचान और राजनीतिक प्रतिनिधित्व के संरक्षण की चुनौती बढ़ सकती है.
पांचवीं अनुसूची के तहत राष्ट्रपति को रिपोर्ट भेजने की मांग
प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से आग्रह किया कि संविधान की पांचवीं अनुसूची के पैरा तीन में प्रदत्त संवैधानिक दायित्व का उपयोग करते हुए इस विषय पर अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति को भेजें. प्रतिनिधिमंडल में डॉ बासवी किडो, शशि पन्ना, रमा खलखो, लक्ष्मी नारायण मुंडा, दयामनी बारला, डॉ रामचंद्र उरांव, अजय तिर्की, शिवा कच्छप और अनिल उरांव शामिल थे.
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