झारखंड में बारिश सामान्य, फिर भी 9 जिले सूखे की जद में? आंकड़े खोल रहे मानसून की पूरी कहानी
बारिश की असमानता का असर: कहीं खेत हरे तो कहीं पर्याप्त बारिश का इंतजार.
झारखंड में भले ही मानसून की औसत बारिश सामान्य के करीब हो, लेकिन हकीकत कुछ और है. नौ जिलों में अब भी बारिश की भारी कमी बनी हुई है. जानिए राज्य के औसत आंकड़े जिलों की असली तस्वीर कैसे छिपा देते हैं.
रांची. झारखंड में मानसून की बारिश का औसत आंकड़ा भले ही सामान्य के करीब पहुंच गया है, लेकिन जिलों की तस्वीर एक जैसी नहीं है. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के 10 सितंबर तक के आंकड़ों के मुताबिक, 1 जून से 10 सितंबर के बीच राज्य में 852.3 मिमी बारिश हुई, जबकि सामान्य बारिश 882.2 मिमी है. यानी राज्य स्तर पर बारिश में सिर्फ तीन फीसदी की कमी है और इसे सामान्य श्रेणी में रखा गया है. इसके बावजूद नौ जिलों में बारिश सामान्य से कम रही है.
9 जिलों में सामान्य से कम बारिश
IMD के अनुसार 10 सितंबर तक राज्य के 24 जिलों में से 14 जिलों में बारिश सामान्य रही, जबकि एक जिले में सामान्य से अधिक बारिश हुई. वहीं नौ जिले deficient rainfall श्रेणी में रहे. इसका मतलब है कि राज्य का औसत आंकड़ा भले ही संतोषजनक दिख रहा हो, लेकिन कई जिलों में बारिश की कमी अब भी बनी हुई है.
इससे मानसून की एक अहम तस्वीर सामने आती है. राज्य में बारिश का कुल आंकड़ा सामान्य होने का अर्थ यह नहीं है कि हर जिले में खेती और जलस्रोतों के लिए पर्याप्त बारिश हुई है. अलग-अलग इलाकों में बारिश के वितरण में काफी अंतर है.
एक सप्ताह में 46% कम बारिश
सितंबर के दूसरे सप्ताह में राज्य में बारिश की स्थिति और कमजोर रही. IMD के 4 से 10 सितंबर के आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में झारखंड में सिर्फ 31.8 मिमी बारिश हुई, जबकि सामान्य बारिश 58.5 मिमी होनी चाहिए थी. इस तरह एक सप्ताह में बारिश सामान्य से 46% कम रही. इस अवधि में आठ जिले large deficient और सात जिले deficient श्रेणी में रहे.
हालांकि सप्ताह के अंत में बारिश की गतिविधि में सुधार आया. IMD के अनुसार बंगाल की खाड़ी में बने सिस्टम और उससे जुड़े परिसंचरण के कारण झारखंड में बारिश ने फिर जोर पकड़ा.
औसत आंकड़ा क्यों छिपा देता है असली तस्वीर
बारिश के मामले में राज्य का औसत आंकड़ा कई बार जिलों की वास्तविक स्थिति को सामने नहीं ला पाता. एक इलाके में अधिक बारिश होने से दूसरे इलाकों में हुई कमी का असर राज्य के कुल आंकड़े में कम दिखाई दे सकता है.
इसका असर खेती और स्थानीय जल उपलब्धता पर अलग-अलग तरीके से पड़ सकता है. खासकर वे इलाके जहां लंबे समय तक बारिश में कमी रही है, वहां खेतों में नमी और जलस्रोतों की स्थिति को केवल राज्य के औसत बारिश आंकड़े से नहीं समझा जा सकता.
मानसून की विदाई से पहले अहम समय
देश के स्तर पर भी इस साल मानसून का वितरण असमान रहा है. IMD के मुताबिक सितंबर के मध्य तक देश में मानसूनी बारिश सामान्य से कम रही है और अब मानसून की वापसी की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना जतायी गयी है.
ऐसे में झारखंड के लिए आने वाले दिनों की बारिश महत्वपूर्ण होगी. राज्य का मौसमी आंकड़ा सामान्य के करीब होने के बावजूद नौ जिलों में बनी कमी यह बताती है कि मानसून का आकलन केवल पूरे राज्य के औसत से नहीं, बल्कि जिलेवार बारिश के आंकड़ों से करना ज्यादा जरूरी है.
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