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Ranchi News : वंचितों को न्याय दिलाने में सहायक बने डालसा : जस्टिस एमएस रामचंद्र राव

Updated at : 23 Mar 2025 6:39 PM (IST)
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Ranchi News : वंचितों को न्याय दिलाने में सहायक बने डालसा : जस्टिस एमएस रामचंद्र राव

चीफ जस्टिस एमएस रामचंद्र राव रविवार को झालसा की ओर से आयोजित जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों की पांचवीं राज्यस्तरीय बैठक को संबोधित कर रहे थे.

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रांची. झारखंड हाइकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस रामचंद्र राव ने कहा कि मुझे जानकर प्रसन्नता हो रही है कि झालसा जरूरतमंद लोगों को विधिक सहायता के माध्यम से न्याय प्रदान करने में अच्छा काम कर रहा है. जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डालसा) विधिक सेवाएं प्रदान करने के लिए प्राथमिक संपर्क बिंदु है और जमीनी स्तर पर न्याय तक पहुंच प्रदान करने की आधारशिला है. डालसा उत्प्रेरक की भूमिका में वंचितों को न्याय दिलाने में सहायक बने. चीफ जस्टिस एमएस रामचंद्र राव रविवार को झालसा की ओर से आयोजित जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों की पांचवीं राज्यस्तरीय बैठक को संबोधित कर रहे थे.

झारखंड शीर्ष प्रदर्शन करनेवाला राज्य

उन्होंने कहा कि झारखंड चौथी राष्ट्रीय लोक अदालत में 99.49 प्रतिशत की उच्चतम निपटान दर हासिल कर शीर्ष प्रदर्शन करने वाला राज्य बन गया है. यह हमारे विधिक सेवा कार्य बल द्वारा की जा रही लगातार कड़ी मेहनत को दर्शाता है तथा उनके योगदान का प्रमाण है. झालसा के कार्यकारी अध्यक्ष जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों के अध्यक्ष के रूप में भाग ले रहे प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीशों से कहा कि वे संबंधित न्यायालयों पर यह प्रभाव डालें कि छोटे अपराधों में व्यक्ति को हिरासत में लेते समय यंत्रवत (मैकनिकली) रिमांड आदेश पारित न किया जाये. इससे पहले चीफ जस्टिस एमएस रामचंद्र राव ने वर्चुअल माध्यम से एमिटी लॉ स्कूल, एमिटी विश्वविद्यालय और इंस्टीट्यूट ऑफ लीगल स्टडीज रांची विश्वविद्यालय में लीगल एड क्लिनिक का उद्घाटन किया.

विभिन्न मुद्दों पर हुई चर्चा

इस कार्यक्रम में हाइकोर्ट के जस्टिस अनिल कुमार चौधरी, जस्टिस संजय द्विवेदी, जस्टिस दीपक रोशन के अलावा झारखंड के सभी जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों के अध्यक्ष एवं सचिव तथा एलएडीसी, मध्यस्थ एवं पीएलवी ने हिस्सा लिया. झालसा की सदस्य सचिव कुमारी रंजना अस्थाना ने धन्यवाद ज्ञापन किया. तकनीकी सत्र में एलएडीसीएस और पैनल प्रणाली के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण विधिक सहायता प्रदान करना, जेल के कैदियों को विधिक सहायता और जेलों में गतिविधियां तथा गिरफ्तारी से पूर्व, गिरफ्तारी और रिमांड चरण में विधिक सहायता प्रदान करने पर चर्चा की गयी. हाइकोर्ट जजों के अलावा सरला विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ आलोक कुमार, सेवानिवृत्त सीनियर डीएजी फैजान अहमद ने रिसोर्स पर्सन के रूप में भाग लिया.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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