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CUJ के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में वीसी प्रो क्षिति भूषण दास ने दिया विकसित भारत का मंत्र

Updated at : 22 Mar 2025 10:23 PM (IST)
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CUJ international conference

अतिथि को सम्मानित करते CUJ के वीसी प्रो क्षिति भूषण दास

केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड (CUJ) के ऑडिटोरियम में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का शनिवार को समापन हो गया. केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड के कुलपति प्रो क्षिति भूषण दास ने कहा कि किसी देश को नष्ट करना हो, तो उसकी शिक्षा प्रणाली को नष्ट कर दो. शिक्षा राष्ट्रीय विकास का सबसे महत्वपूर्ण आधार है.

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रांची-केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड (CUJ) के ऑडिटोरियम में शनिवार को ‘विकसित भारत-2047 की ओर भारत की यात्रा: एक टिकाऊ और लचीले भविष्य के लिए सामाजिक समानता, आर्थिक विकास और वैश्विक अंतर्निर्भरता के बीच तालमेल की खोज’ विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का समापन हुआ. यह सम्मेलन विद्वानों, नीति-निर्माताओं और उद्योग विशेषज्ञों के लिए भारत के विकास का रोडमैप और सतत आर्थिक प्रगति पर विचार-विमर्श करने का एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ. सम्मेलन की शुरुआत भारत की औद्योगिक प्रगति: वैश्विक पारस्परिकता, तकनीकी व्यवधान और सतत विकास के बीच संतुलन विषय पर चर्चा से हुई. इस सत्र का संचालन डॉ नितेश भाटिया (डीबीए, सीयूजे) ने किया. इसमें प्रो अजय सिंह (दिल्ली विश्वविद्यालय), इंद्रजीत यादव (निदेशक, एमएसएमई, रांची), संजीव कुमार (सेवानिवृत्त कार्यकारी निदेशक, मेकॉन, रांची) और प्रो भगवान सिंह (डीबीए, सीयूजे) ने भाग लिया. केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड के कुलपति प्रो क्षिति भूषण दास ने कहा कि किसी देश को नष्ट करना हो, तो उसकी शिक्षा प्रणाली को नष्ट कर दो.

सम्मेलन में तकनीकी सत्रों का आयोजन


सम्मेलन के दौरान तकनीकी सत्रों का आयोजन किया गया. इनमें मानव पूंजी विकास, शासन और नीति रूपरेखा, तथा वैश्विक अंतर्निर्भरता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई. शोधकर्ताओं ने उद्यमिता, वित्तीय समावेशन, सतत वित्त, वैश्विक व्यापार नीति और वित्तीय संकटों के दौरान आर्थिक लचीलापन जैसे विषयों पर अपने शोध प्रस्तुत किए. विद्वानों ने उन नई नीतिगत रणनीतियों और आर्थिक मॉडलों पर विचार किया जो भारत को अधिक सतत और समृद्ध भविष्य की ओर ले जा सकते हैं. समापन सत्र का शुभारंभ दोपहर 1 बजे डॉ बटेश्वर सिंह (संयोजक) द्वारा स्वागत संबोधन से हुआ. इसके बाद गुरु घासीदास विश्वविद्यालय (बिलासपुर) के कुलपति प्रो आलोक कुमार चक्रवाल ने समापन भाषण दिया. उन्होंने विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए उद्यमशील मानसिकता को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि एक छात्र को लें, उसे तैयार करें. वह हमें विकसित भारत की ओर ले जाएगा.

उपदेश को व्यवहार में भी लाएं-प्रो चक्रवाल


प्रो चक्रवाल ने नौकरी चाहने वालों की बजाय अधिक उद्यमियों और अर्थशास्त्रियों को विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया. उन्होंने कहा कि समस्याओं की पहचान कर उनके व्यावहारिक समाधान निकालने वाले व्यक्तियों की आवश्यकता है. उन्होंने यह भी कहा कि जो उपदेश दिया जाए, उसे व्यवहार में भी लाना चाहिए. प्रो अजय कुमार सिंह (अधिष्ठाता और प्रमुख, वाणिज्य और व्यवसाय संकाय, दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स, दिल्ली विश्वविद्यालय) ने अपने संबोधन में कहा कि भारत हमेशा से अवसरों की भूमि रहा है. उन्होंने कहा कि विकसित भारत हमारे लिए कोई नया विचार नहीं है. भारत पहले भी विकसित था जब व्यापारी यहां व्यापार करने के लिए आते थे. उन्होंने महाकुंभ मेले का उदाहरण देते हुए इसे प्रबंधन के एक उत्कृष्ट केस स्टडी के रूप में प्रस्तुत किया, जिससे भारत की संगठनात्मक दक्षता का परिचय मिलता है. प्रो रवि नारायण कर ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) पर चर्चा की और छात्रों में पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया. उन्होंने कहा कि शिक्षा प्रणाली में वैश्विक दृष्टिकोण को शामिल करना आवश्यक है, लेकिन साथ ही भारतीय शैक्षिक परंपराओं का संरक्षण भी महत्वपूर्ण है.

शिक्षा राष्ट्रीय विकास का सबसे महत्वपूर्ण आधार


केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड के कुलपति प्रो क्षिति भूषण दास ने अपने अध्यक्षीय भाषण में उद्यमशीलता और सांस्कृतिक विकास को बढ़ावा देने की आवश्यकता को दोहराया. उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनना ही किसी राष्ट्र को विकसित बनाने की कुंजी है. यदि हमें स्वतंत्र बनना है, तो हमें पहले आंतरिक रूप से आत्मनिर्भर बनना होगा. प्रो दास ने ऑर्गेनिक थिंकिंग को नीति-निर्माण और आर्थिक सुधारों में शामिल करने की आवश्यकता पर बल दिया. उन्होंने शिक्षा को राष्ट्रीय विकास का सबसे महत्वपूर्ण आधार बताया और कहा कि यदि किसी देश को नष्ट करना हो, तो उसकी शिक्षा प्रणाली को नष्ट कर दो. उन्होंने कहा कि विकसित भारत का अर्थ विकसित केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड भी होना चाहिए.

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Guru Swarup Mishra

लेखक के बारे में

By Guru Swarup Mishra

मैं गुरुस्वरूप मिश्रा. फिलवक्त डिजिटल मीडिया में कार्यरत. वर्ष 2008 से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से पत्रकारिता की शुरुआत. आकाशवाणी रांची में आकस्मिक समाचार वाचक रहा. प्रिंट मीडिया (हिन्दुस्तान और पंचायतनामा) में फील्ड रिपोर्टिंग की. दैनिक भास्कर के लिए फ्रीलांसिंग. पत्रकारिता में डेढ़ दशक से अधिक का अनुभव. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एमए. 2020 और 2022 में लाडली मीडिया अवार्ड.

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