क्लोनल प्रौद्योगिकी व पौधे लगाना जरूरी
Updated at : 29 Aug 2025 9:49 PM (IST)
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वानिकी हस्तक्षेप विषय पर क्षेत्रीय अनुसंधान सम्मेलन का आयोजन किया गया.
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पिस्कानगड़ी.
नगड़ी के लालगुटवा स्थित भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद-वन उत्पादकता संस्थान में शुक्रवार को वानिकी हस्तक्षेप विषय पर क्षेत्रीय अनुसंधान सम्मेलन का आयोजन किया गया. संस्थान के निदेशक डॉ अमित पांडेय भारतीय कृषि अनुसंधान और भारतीय कृषि जैव विविधता संस्थान के निदेशक डॉ सुजय रक्षित व अन्य अतिथियों दीप जला कर सम्मेलन की शुरुआत की. डॉ पांडेय ने अनुसंधान परियोजनाओं द्वारा समस्याओं के निराकरण के महत्व पर प्रकाश डाला. जैव विविधता बोर्ड हैदराबाद के निदेशक, इ वेंकट रेड्डी, भारतीय वन सेवा ने आभासीय मंच से सम्मेलन की महत्ता पर चर्चा करते हुए भूमि प्रबंधन और वनीय क्षेत्रों के ग्रामीणों की आजीविका सुधार के लिए क्लोनल प्रौद्योगिकी को आवश्यक बताया. झारखंड में वनीय भूमि के क्षरण पर चिंता व्यक्त की गयी और कृषि के साथ वनीय पौधों का रोपण कर पर्यावरण को संरक्षित करने का आह्वान किया. डॉ सुजय रक्षित ने झारखंड में वनीय भूमि का ह्रास, बढ़ती जनसंख्या, वनीय जीवों के भोजन पर प्रतिकूल प्रभाव और वनों के घनत्व में कमी पर चिंता व्यक्त करते हुए वनीय भूमि की व्यवस्था में सुधार के लिए निरंतर शोध कार्यों को जरूरी बताया..डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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By Prabhat Khabar News Desk
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