15 साल बाद फिर चंपई का नाम आया सामने, ऐसे मारी थी राजनीति में इंट्री
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 01 Feb 2024 5:51 AM
सरायकेला के विधायक चंपई सोरेन का राजनीतिक सफर संघर्षमय रहा है. 90 के दशक में अलग झारखंड राज्य आंदोलन के माध्यम से चंपई सोरेन ने राजनीति में कदम रखा था.
रांची : तेजी से बदले राजनीतिक घटनाक्रम में चंपई सोरेन को बुधवार को गठबंधन की बैठक में विधायक दल का नेता चुना गया. 15 साल बाद एक बार फिर से चंपई सोरेन विधायक दल के नेता चुने गये हैं. चंपई सोरेन, हेमंत सोरेन के काफी करीबी हैं. चंपई सोरेन को जेएमएम, कांग्रेस और आरजेडी विधायक दल की बैठक में नेता चुना गया. चंपई सोरेन सरायकेला सीट से विधायक हैं और इस समय परिवहन, अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री हैं. साथ ही झारखंड मुक्ति मोर्चा के उपाध्यक्ष हैं.
सरायकेला के विधायक चंपई सोरेन का राजनीतिक सफर संघर्षमय रहा है. 90 के दशक में अलग झारखंड राज्य आंदोलन के माध्यम से चंपई सोरेन ने राजनीति में कदम रखा था. चंपई सोरेन चुनावी राजनीति में भी सफल राजनीतिज्ञ माने जाते हैं. वर्ष 1991 से 2019 तक सरायकेला विस क्षेत्र के लिए हुए विधान सभा चुनावों में एक टर्म को छोड़ कर उन्होंने सभी चुनावों में जीत दर्ज की है. सरायकेला से इन्होंने अब तक छह बार जीत दर्ज की है, जबकि उन्हें वर्ष 2000 के चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था. चंपई सोरेन कोल्हान में ‘झारखंड टाइगर’ के नाम से प्रसिद्ध हैं. झामुमो के संगठन में भी केंद्रीय उपाध्यक्ष हैं. पूर्व में पार्टी में महासचिव जैसे महत्वपूर्ण पदों को संभाल चुके हैं. झामुमो अध्यक्ष शिबू सोरेन व कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन के ये काफी करीबी माने जाते हैं.
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वर्ष 2020 में चंपई सोरेन राज्य में तीसरी बार मंत्री बने. पहली बार वर्ष 2010 में भाजपा झामुमो गठबंधन वाली अर्जुन मुंडा की सरकार में कैबिनेट मंत्री बने थे. इसके बाद वर्ष 2013 में झामुमो-कांग्रेस गठबंधन की सरकार बनी तो इन्हें फिर से मंत्री पद मिला और तीन विभाग उद्योग, परिवहन और आदिवासी कल्याण मंत्रालय के मंत्री रहे. वर्ष 2019 में राज्य में झामुमो-कांग्रेस गठबंधन की सरकार बनी तो हेमंत सोरेन की सरकार में 28 जनवरी 2020 को चंपई सोरेन को फिर एक बार मंत्री बनाया गया. इस बार चंपई सोरेन जनजाती कल्याण व परिवॉहन मंत्रालय के कैबिनेट मंत्री बनाये गये.
चंपई सोरेन पहली बार वर्ष 1991 के सरायकेला विस क्षेत्र से उपचुनाव में बतौर निर्दलीय प्रत्याशी जीत दर्ज कर विधायक बने थे. उस चुनाव में चंपई सोरेन ने सिंहभूम के तत्कालीन सांसद कृष्णा मार्डी की पत्नी मोती मार्डी को हराया था. इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा. वर्ष 1995 के विस चुनाव में झामुमो के टिकट पर चुनाव लड़ कर भाजपा के पंचू टुडू को हरा कर विधायक बने. वर्ष 2000 के विधानसभा चुनाव में भाजपा लहर के कराण अनंत राम टुडू के हाथों पहली बार इन्हें हार का सामना करना पड़ा था.
इसके बाद वर्ष 2005 में चंपई सोरेन ने भाजपा के लक्ष्मण टुडू को 880 वोट के अंतर से जीत दर्ज की. 2009 के चुनाव में भी भाजपा के लक्ष्मण टुडू को 3200 वोट से हरा कर जीत दर्ज की. वर्ष 2014 के विस चुनाव में 1100 तथा 2019 के विस चुनाव में करीब 16 हजार वोट से जीत दर्ज कर विस पहुंचे.
सरायकेला-खरसावां जिले स्थित जिलिंगगोड़ा गांव निवासी आदिवासी सिमल सोरेन खेती किसानी किया करते थे. उनके चार बच्चों में बड़े बेटे का नाम चंपई सोरेन है. चंपई भी अपने पिता के साथ खेती हाथ बंटाते थे. 10वीं क्लास तक सरकारी स्कूल से चंपई ने पढ़ाई की. इस बीच उनका विवाह मानको से कर दिया गया. शादी के बाद चंपई के चार बेटे और तीन बेटियां हुईं. इसी दौरान बिहार से अलग झारखंड राज्य की मांग उठने लगी. शिबू सोरेन के साथ ही चंपई भी झारखंड के आंदोलन में उतर गये. जल्द ही ‘झारखंड टाइगर’ के नाम से मशहूर भी हो गये. इसके बाद चंपई सोरेन ने अपनी सरायकेला सीट से उप चुनाव में निर्दलीय विधायक बनकर अपने राजनीतिक करियर का आगाज किया. भाजपा सरकार में रह चुके मंत्री. भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा की दो साल, 129 दिन की सरकार में चंपई सोरेन को कैबिनेट मंत्री बनाया गया था और अहम मंत्रालय दिये गये थे.
चंपई 11 सितंबर 2010 से 18 जनवरी 2013 तक मंत्री रहे. इसके बाद राष्ट्रपति शासन लग गया था और फिर हेमंत सोरेन की अगुवाई में बनी झारखंड मुक्ति मोर्चा की सरकार में चंपई सोरेन को खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, परिवहन मंत्री बनाया गया. हेमंत सोरेन की सरकार में दूसरी बार मंत्री. दूसरी बार 2019 में फिर से हेमंत सोरेन के मुख्यमंत्री बनने पर चंपई सोरेन को परिवहन, अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री रखा गया है. चंपई झामुमो के उपाध्यक्ष भी हैं.
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