CBI ने बढ़ायी लालू यादव की मुश्किलें, CRPC 427 को आधार बना जमानत का किया विरोध
Author : Prabhat Khabar Digital Desk Published by : Prabhat Khabar Updated At : 15 Sep 2020 12:37 PM
पटना : राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव की मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. लालू यादव की ओर से दायर की गयी जमानत के खिलाफ सीबीआई ने हलफनामा दायर कर उनकी मुश्किलें बढ़ा दी है. लालू यादव के वकील के मुताबिक, लालू प्रसाद यादव को अक्टूबर में जमानत मिल सकती है. वहीं, सीबीआई ने जमानत के खिलाफ अदालत में हलफनामा दायर कर दिया है.
पटना : राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव की मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. लालू यादव की ओर से दायर की गयी जमानत के खिलाफ सीबीआई ने हलफनामा दायर कर उनकी मुश्किलें बढ़ा दी है. लालू यादव के वकील के मुताबिक, लालू प्रसाद यादव को अक्टूबर में जमानत मिल सकती है. वहीं, सीबीआई ने जमानत के खिलाफ अदालत में हलफनामा दायर कर दिया है.
सीबीआई ने चारा घोटाला मामले में सजायाफ्ता लालू प्रसाद यादव की जमानत के खिलाफ अदालत में हलफनामा दाखिल करते हुए कहा है कि सजा की अवधि पूरी नहीं होने का तर्क दिया है. अपने हलफनामे में सीबीआई ने सीआरपीसी की धारा 427 को आधार बनाया है.
हलफनामे में सीबीआई ने कहा है कि लालू प्रसाद यादव को चारा घोटाला के चार मामलों में अलग-अलग सजा हुई है. लेकिन, अदालत ने सभी सजा अलग-अलग चलाने का आदेश दिया है. इस कारण सभी सजा एक साथ नहीं दी सकती.
साथ ही कहा गया है कि लालू प्रसाद यादव की ओर से सभी सजा एक साथ चलाने के लिए अदालत में कोई आवेदन नहीं दिया गया है. ऐसे में सीआरपीसी की धारा 427 के तहत उन्हें आधी सजा काट लेने के आधार पर जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता है.
इधर, लालू प्रसाद यादव की ओर से भी हलफनामे का विरोध करते हुए कहा गया है कि सीबीआई ने चारा घोटाला के किसी मामले में यह मुद्दा नहीं उठाया गया है. इससे पहले लालू प्रसाद यादव को दो मामले में आधी सजा काटने पर हाईकोर्ट जमानत दे चुका है. इस कारण सीबीआई की दलील सही नहीं है.
मालूम हो कि चाईबासा कोषागार से अवैध निकासी मामले में लालू प्रसाद यादव की जमानत याचिका पर नौ अक्तूबर को सुनवाई होनी है. लालू प्रसाद यादव की जमानत याचिका का विरोध करते हुए सीबीआई में हाईकोर्ट में अपना हलफनामा दाखिल किया है.
सीआरपीसी की धारा 427 में प्रावधान उन परिस्थितियों से संबंधित है, जहां पहले से ही सजा भुगत रहे दोषी को दूसरे अपराध में सजा सुनायी जाये. धारा 427 (1) में कहा गया है कि बाद की सजा आमतौर पर पिछले सजा की निरंतरता में यानी क्रमवार होती है. अर्थात् बाद की सजा पिछली सजा की समाप्ति के बाद ही शुरू होगी. हालांकि, सजा देनेवाली अदालत यह निर्दिष्ट कर सकती है कि बाद की सजा पिछली सजा के साथ समवर्ती रूप से चलेगी. जब तक सजा देनेवाली अदालत यह निर्दिष्ट नहीं करती, तब तक बाद के वाक्य को ‘क्रमवार’ माना जायेगा.
झारखंड में चारा घोटाला के पांच मामलों में लालू प्रसाद यादव को आरोपित किया गया है. इनमें से चार मामलों में लालू प्रसाद यादव को सजा सुनायी जा चुकी है. वहीं, रांची के डोरंडा कोषागार से अवैध निकासी के मामले में सुनवाई जारी है.
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लालू प्रसाद यादव समेत 44 अभियुक्तों को चाईबासा कोषागार से अवैध तरीके से 37.7 करोड़ रुपये निकासी मामले में दोषी ठहराते हुए पांच साल की सजा मिली है.
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देवघर कोषागार से 84.53 लाख रुपये की अवैध निकासी में साढ़े तीन साल की सजा और पांच लाख का जुर्माना लगाया गया है.
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चाईबासा कोषागार से 33.67 करोड़ रुपये की अवैध निकासी मामले में पांच साल की सजा सुनायी गयी है.
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दुमका कोषागार से 3.13 करोड़ रुपये की अवैध निकासी मामले में दो अलग-अलग धाराओं में सात-सात साल की सजा और 60 लाख रुपये जुर्माना किया गया है.
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