बिरसा मुंडा के नाम से झारखंड में संचालित हैं ये योजनाएं, पढ़ें क्यों हुई थी इसकी शुरुआत

Published by : Sameer Oraon Updated At : 08 Jun 2023 11:42 AM

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बिरसा मुंडा के नाम से पूरा देश 15 नवंबर को जनजातीय गौरव के रूप में मनाता है. आज देश में उनके नाम से कई योजनाएं चलायी जाती है. झारखंड में भी उनके नाम से राज्य सरकार कई योजनाएं संचालित कर रही है

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बिरसा मुंडा का स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने के अलावा झारखंड के आदिवासियों के उत्थान में भी बड़ा योगदान है. उन्होंने अकेले दम पर अंग्रेजों की नाक में दम कर दिया था. कहा जाता है कि भगवान बिरसा उस वक्त ऐसे अकेले आदिवासी नेता थे जिन्होंने अंग्रेजों की नीतियों को अच्छी तरह से पहचान लिया था. उनकी गिरफ्तारी खूंटी के डोम्बारी बुरू में उस वक्त हुई जब वह लोगों को संबोधित कर रहे थे. इसके बाद 9 जून 1900 को जेल में उनकी मृत्यु हो गयी.

उनकी याद में पूरा देश 15 नवंबर को जनजातीय गौरव के रूप में मनाता है. आज देश में उनके नाम से कई योजनाएं चलायी जाती है. झारखंड में भी उनके नाम से राज्य सरकार कई योजनाएं संचालित कर रही है. आज हम उन सभी योजनाओं को शुरुआत करने का मकसद और उनकी स्थितियों पर भी बात करेंगे.

बिरसा हरित ग्राम योजना

झारखंड सरकार ने साल 2020 में इस योजना की शुरूआत की थी. जिसका उद्देश्य अपने इलाके में किसानों की आय बढ़ाना था. इस योजना के तहत फलदार वृक्ष लगाने एवं उसकी देखभाल करने संबंधी रोजगार राज्य के किसानों को मिलता है. वहीं, प्रत्येक परिवार को 50 हजार रुपये की निश्चित वार्षिक आमदनी भी होती है. इस योजना के तहत किसान भाई-बहनों के अलावा बुजुर्गों और विधवा महिलाओं को प्राथमिकता दी जा रही है.

इस योजना के जरिए राज्य सरकार सड़क किनारे, सरकारी भूमि, व्यक्तिगत या गैर मजरुआ भूमि पर फलदार पौधा लगाने के लिए ग्रामीणों को प्रोत्साहित कर रही है. पौधों को सुरक्षित रखने के लिए सरकार सहयोग भी देगी. इसके अलावा लाभुकों को पौधे का पट्टा भी दिया जाता है. जिससे वे आमदनी कर सकें.

बिरसा मुंडा तकनीकी छात्रवृति योजना

बिरसा मुंडा छात्रवृति योजना की शुरूआत झारखंड सरकार ने साल 2001 में की थी. सरकार का मकसद था कि तकनीकी शिक्षा (इंजीनियरिंग और मेडिकल) की पढ़ाई कर रहे आदिवासी बच्चों को आर्थिक रूप से मदद पहुंचाया जाए. हालांकि, इन योजनाओं का लाभ केवल आदिवासी बच्चों को ही मिलता है.

बिरसा मुंडा बागवानी योजना

मनरेगा योजना के तहत संचालित बिरसा मुंडा बागवानी योजना के तहत वैसे लाभुकों का टयन किया जाता है जिनकी आजीविका खेती पर आश्रित है. योजना के अनुरूप एक परिवार को 0.25 से 1 एकड़ जमीन पर ही आम बागवानी करनी है. इससे किसान एक एकड़ आम बागवानी में खेती कर कम से कम 15 से 20 हजार रुपये प्रतिवर्ष आय कर लेते हैं.

भगवान बिरसा मुंडा स्वरोजगार योजना :

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने 6 सितंबर 2022 को भगवान बिरसा मुंडा स्वरोजगार योजना का शुभांरभ किया है. इस योजना के अंतर्गत निर्माण गतिविधियों जैसे एग्रो प्रोसेसिंग, फूड प्रोसेसिंग कोल्ड स्टोरेज, मिल्क प्रोसेसिंग, आदि के लिए 01 लाख से 50 रुपए तक ऋण मिलता है.

समेकित बिरसा ग्राम सह कृषक पाठशाला

झारखंड सरकार ने समेकित बिरसा ग्राम सह कृषक पाठशाला की शुरूआत साल 2021 में की थी. इसका उद्देश्य राज्य के किसानों की आय को बढ़ाने के लिए ट्रेनिंग देना है. इसके तहत उन्नत कृषि और आधुनिक तकनीकों की जानकारी देना है. इसके अलावा मतस्य पालन और सिंचाई की उन्नत तकनीक के बारे में भी जानकारी दी जाती है.

बिरसा सिंचाई कूप संवर्धन योजना

झारखंड में किसानों की सुविधा के लिए बिरसा सिंचाई कूप निर्माण योजना चलाई जा रही है. इसका उद्देश्य एक लाख किसानों की व्यक्तिगत जमीन पर कुंआ का निर्माण का उद्देश्य है. इस योजना के तहत 50 हजार रुपये सामग्री मद के लिए और शेष राशि मनरेगा से देने का प्रावधान है. बजट 2023 में वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव ने इस योजना को लागू करने के लिए प्रस्ताव लिया था.

बिरसा आवास योजना

प्रधानमंत्री आवास योजना के तर्ज पर झारखंड सरकार ने आदिम जनजातियों के लिए बिरसा आवास योजना की शुरूआत की है. सरकार ने तीन वित्तीय वर्ष (2020-21, 2021-22 और 2022-23) के दौरान कुल 4720 बिरसा आवास योजना बनाने का लक्ष्य तय किया था. हालांकि, दिसंबर 2022 तक के आंकड़े के अनुसार सिर्फ 1501 का ही निर्माण हो सका है.

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Sameer Oraon

लेखक के बारे में

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समीर उरांव, डिजिटल मीडिया में सीनियर जर्नलिस्ट हैं और वर्तमान में प्रभात खबर.कॉम में सीनियर कटेंट राइटर के पद पर हैं. झारखंड, लाइफ स्टाइल और स्पोर्ट्स जगत की खबरों के अनुभवी लेखक समीर को न्यूज वर्ल्ड में 5 साल से ज्यादा का वर्क एक्सपीरियंस है. वह खबरों की नब्ज पकड़कर आसान शब्दों में रीडर्स तक पहुंचाना बखूबी जानते हैं. साल 2019 में बतौर भारतीय जनसंचार संस्थान से पत्रकारिता करने के बाद उन्होंने हिंदी खबर चैनल में बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद समीर ने डेली हंट से होते हुए प्रभात खबर जा पहुंचे. जहां उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग और वैल्यू ऐडेड आर्टिकल्स लिखे, जो रीडर्स के लिए उपयोगी है. कई साल के अनुभव से समीर पाठकों की जिज्ञासाओं का ध्यान रखते हुए SEO-ऑप्टिमाइज्ड, डेटा ड्रिवन और मल्टीपल एंगल्स पर रीडर्स फर्स्ट अप्रोच राइटिंग कर रहे हैं.

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