ePaper

बांग्ला सांस्कृतिक मेला: सीएम हेमंत सोरेन बोले, सभी भाषा-संस्कृति के लोगों को है सम्मान के साथ जीने का अधिकार

Updated at : 08 May 2023 6:08 AM (IST)
विज्ञापन
बांग्ला सांस्कृतिक मेला: सीएम हेमंत सोरेन बोले, सभी भाषा-संस्कृति के लोगों को है सम्मान के साथ जीने का अधिकार

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि झारखंड के कमोबेश सभी जिलों की सीमा किसी न किसी राज्य के साथ जुड़ी हुई है. विशेष कर पश्चिम बंगाल के साथ झारखंड के सबसे ज्यादा जिले जुड़े हैं. ऐसे में बांग्ला भाषा और संस्कृति का यहां प्रभाव पड़ना लाजिमी है.

विज्ञापन

रांची: हर भाषा-संस्कृति की अपनी अलग अहमियत है. इससे उस भाषा से जुड़े समुदाय को अलग पहचान मिलती है. इसे संरक्षित और आगे बढ़ाना हम सभी की जिम्मेदारी है. भाषा की पकड़ जितनी मजबूत होगी, हमारा समाज और राज्य उतना ही मजबूत हमारा होगा. ये बातें मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन ने रविवार को मोरहाबादी स्थित डॉ रामदयाल मुंडा स्टेडियम में कही. श्री सोरेन यहां आयोजित तीन दिवसीय बांग्ला सांस्कृतिक मेला के समापन समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे. मुख्यमंत्री ने कहा : हर किसी को अपनी भाषा और संस्कृति पर गर्व होना चाहिए. झारखंड की संरचना के हिसाब से यहां अलग-अलग भाषाओं और संस्कृतियों का व्यापक प्रभाव है. हमारी सरकार भाषा और संस्कृति के साथ राज्य को आगे ले जाने का लगातार प्रयास कर रही है. यहां रहनेवाले हर भाषा संस्कृति के लोगों को मान-सम्मान के साथ जीने का अधिकार मिलना चाहिए. हमारी सरकार इसके लिए प्रतिबद्ध है.

झारखंड में बांग्ला भाषा का विशेष प्रभाव : मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड के कमोबेश सभी जिलों की सीमा किसी न किसी राज्य के साथ जुड़ी हुई है. विशेष कर पश्चिम बंगाल के साथ झारखंड के सबसे ज्यादा जिले जुड़े हैं. ऐसे में बांग्ला भाषा और संस्कृति का यहां प्रभाव पड़ना लाजिमी है. यहां ऐसे कई लोग हैं, जिनकी संपत्ति झारखंड और बंगाल दोनों राज्यों में है. सबसे बड़ी बात की बंगाल से ओड़िशा और बिहार राज्य बना एवं बिहार से झारखंड अलग राज्य बना. ऐसे में किसी न किसी रूप में बांग्ला भाषा-संस्कृति यहां की धरती में रची बसी है. ऐसे में बिना बांग्ला के झारखंड के सांस्कृतिक विकास की कल्पना नहीं की जा सकती है.

मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड में 10 से ज्यादा स्थानीय और क्षेत्रीय भाषाएं बोली जाती हैं. यहां के ग्रामीण परिवेश में हिंदी से ज्यादा क्षेत्रीय भाषाएं बोली जाती हैं. ऐसे में राज्य के विकास में अहम जिम्मेदारी निभाने वाले हमारे अधिकारी अगर स्थानीय और क्षेत्रीय भाषाओं को नहीं समझेंगे, नहीं सीखेंगे और नहीं जानेंगे, तो वे स्थानीय लोगों से कैसे संवाद स्थापित कर पायेंगे. इन्हीं बातों को ध्यान में रखकर हमने अपने अधिकारियों को कम से कम क्षेत्रीय भाषाओं को समझने और जानने को कहा है, ताकि वे ग्रास रूट पर लोगों के साथ सीधा संवाद कर उन्हें विकास योजनाओं का लाभ दे सकें.

विज्ञापन
Prabhat Khabar News Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar News Desk

यह प्रभात खबर का न्यूज डेस्क है। इसमें बिहार-झारखंड-ओडिशा-दिल्‍ली समेत प्रभात खबर के विशाल ग्राउंड नेटवर्क के रिपोर्ट्स के जरिए भेजी खबरों का प्रकाशन होता है।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola