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राजभवन के जरिए सरकार को अपदस्थ करने का हुआ प्रयास, पिंजरे से तूफान निकलेगा, तो आप हो जाएंगे ध्वस्त : सुदिव्य

Updated at : 06 Feb 2024 8:13 PM (IST)
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मंत्री सुदिव्य सोनू, File Photo

मंत्री सुदिव्य सोनू, File Photo

सुदिव्य सोनू ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष कहते हैं कि परिवारवाद से मुक्ति मिल गई. झामुमो विधायक ने कहा कि संघर्ष के बूते भाजपा को आगे ले जाने वाले नेता आज बैकबेंचर हैं. आयातित नेता को नेता प्रतिपक्ष बनाया गया है.

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झारखंड विधानसभा के दो दिवसीय विशेष सत्र का मंगलवार (6 फरवरी) को समापन हो गया. राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर हुई चर्चा में दोनों पक्षों की ओर से एक-दूसरे पर तीर चलाए गए. झामुमो और कांग्रेस ने भाजपा के साथ-साथ राज्यपाल पर भी निशाना साधा. झामुमो विधायक सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि विपरीत परिस्थितियों में यह विशेष सत्र आहूत हुआ.

राजभवन की भूमिका संदिग्ध : सुदिव्य सोनू

उन्होंने विशेष सत्र के प्रयोजन पर भी प्रकाश डाला. कहा कि आमतौर पर बजट सत्र में ही राज्यपाल के अभिभाषण की परंपरा रही है. कौन-सी परिस्थितियां उत्पन्न हुईं कि आज विशेष सत्र बुलाना पड़ा. इस विशेष सत्र में नेता प्रतिपक्ष ने सारगर्भित भाषण दिया. सुदिव्य सोनू ने कहा कि हमें जो लोग संविधान बताने की कोशिश कर रहे हैं, वे खुद संविधान की प्रस्तावना को भूल गए हैं. उन्होंने राजभवन की भूमिका को भी संदिग्ध करार दिया.

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राजतंत्र नहीं कि गलत राजभवन के गलत काम पर सवाल न खड़े करें

राज्यपाल के प्रति सत्ता पक्ष के व्यवहार की विपक्ष की ओर से आलोचना पर उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र है. राजतंत्र नहीं कि राजभवन की गलत भूमिका पर हम सवाल खड़े न करें. प्रदेश की सर्वोच्च पंचायत ने राजभवन को अपने आक्रोश से अवगत कराया. सूबे ने बगैर मुख्यमंत्री के 18 से ज्यादा घंटे गुजारे. 31 जनवरी की रात हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी को सुदिव्य सोनू ने सत्ता हड़पने की कोशिश करार दिया. कहा कि राजभवन के माध्यम से सरकार को अपदस्थ करने का प्रयास किया गया.

आयातित नेता हैं नेता प्रतिपक्ष, प्रदेश अध्यक्ष और मुख्य सचेतक

सुदिव्य सोनू ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष सदन में कहते हैं कि परिवारवाद से मुक्ति मिल गई. झामुमो विधायक ने विपक्ष को आयातित बताया. कहा कि संघर्ष के बूते भाजपा को आगे ले जाने वाले नेता आज बैकबेंचर हैं. आयातित नेता को नेता प्रतिपक्ष बनाया गया है. मुख्य सचेतक से प्रदेश अध्यक्ष तक आयातित हैं. उन्होंने भाजपा के परिवारवाद पर भी निशाना साधा. कहा कि उन्हें भ्रष्टाचार सिर्फ इधर दिखता है, उसी तरह परिवारवाद भी उधर नहीं दिखता.

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प्रतिरोध की जमीन है झारखंड

झामुमो विधायक ने कहा कि हेमंत सोरेन को जेल भेजना बहुत महत्वपूर्ण कर्तव्य था. भाजपा, इसके आईटी सेल ने इस काम को बड़ी संजीदगी से अंजाम दिया. इनका मानना था कि हेमंत सोरेन को दबोच लिया, तो सरकार अपने आप अपने हाथों में आ जाएगी. उन्होंने कहा कि झारखंड प्रतिरोध की जमीन है. जल-जंगल-जमीन की रक्षा करने के लिए लड़ने वाला प्रदेश है. सुदिव्य सोनू ने कहा कि जब पूरा हिंदुस्तान मुगलों का गुलाम था, तब भी झारखंड स्वाधीन था.

चारागाह नहीं है झारखंड : सुदिव्य कुमार सोनू

उन्होंने कहा कि झारखंड चारागाह नहीं है. हेमंत सोरेन ने कल कहा था कि यहां हड्डियां बहुत ज्यादा हैं. गले में अटक गईं, तो अंतड़ियां भी फट जाएंगी. झारखंड की धरती ने आपके चेहरे पर चढ़े नकाबों को उतरे देख लिया है. दिशोम गुरु शिबू सोरेन ने अंग्रेजों से लड़ाई नहीं लड़ी थी. उनकी पहली लड़ाई महाजनों के खिलाफ थी. वे महाजन आज स्वरूप बदलकर उस पाले में बैठे हैं. उसी महाजनी प्रथा का अंत कराने के बाद झारखंड और झारखंड के लोग संगठित हुए. हमारी उस ताकत को आपने कमजोर आंकने का प्रयास किया.

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अब और ज्यादा गति से चलेगी सरकार

सुदिव्य सोनू ने कहा कि शिबू सोरेन ने कई हेमंत सोरेन और कई चंपाई सोरेन को यहां पैदा किया है, जो सीना ठोंककर कहता है कि मैं चंपाई सोरेन, हेमंत सोरेन पार्ट-2 हूं. पहले जिस गति से सरकार चल रही थी, उससे ज्यादा गति से यह सरकार चलेगी.

चंपाई सोरेन के नेतृत्व में संघर्ष और मजबूत होगा

उन्होंने कहा कि आंदोलन की उपज चंपाई दा के नेतृत्व में संघर्ष और मजबूत होगा. जिन लोगों ने आज तक झारखंड के हितों को बाहरियों को बेचा है, उन्हें हम जनता के बीच बेनकाब करेंगे. आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका और सहायक शिक्षकों के साथ आपने क्या किया, सबने देखा. ईश्वर ने चाहा तो 2024 का लोकसभा चुनाव इतना बड़ा मंजर दिखाएगा, जिसकी आपने कल्पना भी नहीं की होगी.

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बन्ना को बोलने से रोका

सुदिव्य सोनू ने हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी की तुलना ‘पिंजरे में तूफान’ को बंद करने से की. उन्होंने कहा कि पिंजरे से जब तूफान निकलेगा, तो आप ध्वस्त हो जाएंगे. झामुमो की लहर में आप सब ध्वस्त हो जाएंगे. आप अपना सोच लीजिए, कांग्रेस का कांग्रेस वाले सोचेंगे. इस बीच, कांग्रेस नेता बन्ना गुप्ता ने बीच में कुछ कहने की कोशिश की, तो सुदिव्य ने उन्हें रोका.

पीएम को ओबीसी नेता होने पर गर्व, तो आदिवासी होने पर क्यों न गर्व करें हेमंत सोरेन

सुदिव्य ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष ने हेमंत सोरेन के बारे में कहा कि वे आदिवासी नेता हैं, लेकिन आदिवासियों के नेता नहीं हैं. उन्होंने कहा कि पीएम मोदी को अपने ओबीसी होने पर गर्व है, तो क्या आदिवासी होने पर हेमंत सोरेन को गर्व नहीं होना चाहिए. उन्होंने याद दिलाया कि नेता प्रतिपक्ष कभी सदन के बाहर बैठकर मीडिया से कहते थे कि दलित होने की वजह से उनके साथ अन्याय हो रहा है.

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कभी इधर, कभी उधर रहते हैं सुदेश महतो : सुदिव्य सोनू

सुदिव्य सोनू ने आजसू सुप्रीमो सुदेश महतो पर भी सदन में हमला बोला. कहा कि वह बीच में झूल रहे हैं. उनकी झारखंडी विचारधारा एक ओर है, झारखंड विरोधी विचारधारा दूसरी तरफ है. वह कभी इधर आ जाते हैं, तो कभी वह उधर चले जाते हैं.

वाजपेयी ने झारखंड नहीं दिया, शिबू सोरेन ने लड़कर लिया

सुदिव्य सोनू ने कहा कि आप कहते हैं कि अटल बिहारी वाजपेयी ने झारखंड बनाया. सिर्फ झारखंड गठन पर हस्ताक्षर करने की वजह से इसका श्रेय नहीं ले सकते. शिबू सोरेन ने ऐसी परिस्थितियां पैदा कीं कि अटल बिहारी वाजपेयी को अलग झारखंड राज्य देना पड़ा. वो प्रधानमंत्री थे, इसलिए उन्होंने झारखंग अलग राज्य के गठन के दस्तावेज पर दस्तखत किए. उनकी जगह कोई और प्रधानमंत्री होता, तो उसको भी अलग झारखंड राज्य देना पड़ता.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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