कल्पना सोरेन की राजनीति में एंट्री : सेना के कैप्टन की बेटी, शिबू सोरेन की बहू ने की है एमटेक-एमबीए की पढ़ाई

जब भी हेमंत सोरेन किसी मुश्किल में फंसते थे, कल्पना सोरेन उचित फैसला लेने में उनकी मदद करतीं थीं. राजनीति की उनकी समझ अन्य लोगों से अलग है. पत्नी होने के नाते संकट के समय वह हेमंत सोरेन को दिशा दिखाती हैं.
भारतीय सेना के कैप्टन के घर में जन्मी कल्पना मुर्मू सोरेन सोमवार (4 मार्च 2024) को राजनीति में एंट्री कर रहीं हैं. उनका जन्म पंजाब के कपूरथला में हुआ. कपूरथला में जन्मी कल्पना का नाम कपूरथला से ही मिलता-जुलता है. कपूरथला में जन्मीं कल्पना सोरेन ने एमटेक और एमबीए की पढ़ाई की है.
द्रौपदी मुर्मू के जिले मयूरभंज से आतीं हैं कल्पना सोरेन
कल्पना मुर्मू सोरेन ओडिशा के उसी मयूरभंज जिले से आतीं हैं, जहां से भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आतीं हैं. कल्पना सोरेन मूल रूप से मयूरभंज जिले के रायरंगपुर के बहल्दा ब्लॉक के तेनताला की रहने वाली हैं. उनके पिता श्रीलंका में भारतीय शांति सेना का हिस्सा रह चुके हैं.
1976 में कपूरथला में हुआ कल्पना सोरेन का जन्म
कैप्टन मुर्मू की मानें, तो कल्पना का जन्म 1976 में कपूरथला में हुआ था. उस समय वह स्थानीय सेना बेस में तैनात थे. कल्पना नाम, कपूरथला से मिलता-जुलता ही रखा गया था. उनका परिवार आज भी मयूरभंज में ही रहता है. बता दें कि अगस्त 2022 तक कभी यह चर्चा भी नहीं थी कि कल्पना सोरेन राजनीति में आएंगी.
राजनीति में नहीं थी हेमंत सोरेन की पत्नी की दिलचस्पी
तब तक उनकी दिलचस्पी सिर्फ अपने परिवार और स्कूल तक सीमित थी. वह सामाजिक गतिविधियों में हिस्सा लेतीं थीं. राजनीति से बहुत दूर रहतीं थीं. रांची में प्ले स्कूल चलाने वाली कल्पना सोरेन पारिवारिक गतिविधियों में बढ़-चढ़कर अपनी भूमिका निभातीं थीं. परिवार में उनकी अहमियत भी है. राजनीति में सक्रिय नहीं होने के बावजूद राजनीतिक गतिविधियों से वह पूरी तरह से वाकिफ रहतीं थीं.
मुश्किल हालात में हेमंत सोरेन को फैसले लेने में करतीं हैं मदद
कहते हैं कि जब भी हेमंत सोरेन किसी मुश्किल में फंसते थे, कल्पना सोरेन उचित फैसला लेने में उनकी मदद करतीं थीं. राजनीति की उनकी समझ अन्य लोगों से अलग है. पत्नी होने के नाते संकट के समय वह हेमंत सोरेन को दिशा दिखाती हैं. वर्ष 2022 के अगस्त में जब ऐसा लगा कि हेमंत सोरेन को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) गिरफ्तार कर सकती है, तो चर्चा तेज हो गई कि कल्पना सोरेन उनकी जगह झारखंड की नई मुख्यमंत्री बन सकतीं हैं.
7 फरवरी 2006 में हुई हेमंत सोरेन से शादी
हालांकि, तब संकट टल गया और बात आई-गई हो गई. बता दें कि वर्ष 1976 में जन्मीं कल्पना मुर्मू की शादी 7 फरवरी 2006 को दिशोम गुरु शिबू सोरेन के बेटे हेमंत सोरेन से हुई. महिला विकास से जुड़े कार्यक्रमों में दिलचस्पी रखने वालीं कल्पना से एक बार पूछा गया था कि भविष्य में वह राजनीति में कदम रखेंगी, तो तत्कालीन मुख्यमंत्री की पत्नी ने कहा था कि वह फिलहाल अपने परिवार की जिम्मेदारियां निभा रहीं हैं. इसी में खुश हैं.
पिता अम्पा मुर्मू को बेटी की योग्यता व क्षमता पर है पूरा भरोसा
कल्पना सोरेन के पिता को अपनी बेटी और उनकी क्षमता पर पूरा भरोसा है. कल्पना के पिता कैप्टन अम्पा मुर्मू ने एक बार कहा था कि जरूरत पड़ने पर उनकी बेटी अपने पति हेमंत सोरेन की जिम्मेदारी संभालने में सक्षम हैं. वह राजनीतिक बागडोर थामने और सफलतापूर्वक जिम्मेदारी का निर्वाह कर सकतीं हैं. उन्होंने कहा था कि मेरी बेटी शिक्षित है. उसने एमटेक और एमबीए की पढ़ाई की है. किसी बड़ी जिम्मेदारी का निर्वहन करने के लिए इससे ज्यादा क्या योग्यता हो सकती है.
कैप्टन अम्पा मुर्मू को भरोसा- आरोपों से बरी हो जाएंगे दामाद
यहां बताना प्रासंगिक होगा कि हेमंत सोरेन के ससुर और कल्पना सोरेन के पिता कैप्टन अम्पा मुर्मू मानते हैं कि उनके दामाद को राजनीतिक कुचक्र में फंसाया गया है. उनके दामाद सभी आरोपों से मुक्त हो जायेंगे. उनके विशाल हृदय की वजह से वह इन मुश्किलों में घिरे हैं. उन्हें अपने दुश्मनों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करनी चाहिए.
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By Mithilesh Jha
मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.
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