रांची: व्यापारिक प्रतिष्ठानों, संस्थानों, रेस्तरां, होटल, मेडिसीन सेंटर और अन्य ट्रांजेक्शन के लिए प्वाइंट ऑफ सेल (पीओएस) टर्मिनल एक अच्छा विकल्प है. इससे कुछ ही मिनटों में किसी भी तरह की खरीदारी का तुरंत सेटेलमेंट (समझौता) हो जाता है. इस मशीन से कोई भी ग्राहक जिनके पास एटीएम अथवा क्रेडिट कार्ड है, उससे तत्काल भुगतान संभव है.
यह एक लोकप्रिय साधन है, जिसे तकनीकी रूप से व्यापारियों को उपलब्ध कराया जाता है. ग्राहकों को अपनी वस्तुएं अथवा सेवाएं प्रदान करने के लिए कैशलेस वातावरण में ले जाने में यह सहायक साबित होता है. इसे बिक्री प्वाइंट भी माना जाता है. ग्राहकों को इस सुविधा के लिए रिटेलरों को अपना कार्ड देकर उसे स्वाइप करना पड़ता है. सभी बैंक इस मशीन को अपने ग्राहकों के लिए जारी करते हैं.
कैसे मिलता है पीओएस : पीओएस टर्मिनल के लिए व्यापारियों अथवा विक्रेताओं को अपने संबंधित बैंक में आवेदन देना पड़ता है. खाताधारकों के लिए पीओएस मशीन की आवश्यकता को देखते हुए उसे निर्गत किया जाता है. इसमें ट्रांजेक्शन का संतोषजनक होना जरूरी है. बैंक के हेल्पडेस्क के माध्यम से इसकी स्थापना में भी मदद की जाती है.
इस मशीन के लिए किसी प्रकार का कोई अप्रत्यक्ष शुल्क बैंक की तरफ से नहीं लिया जाता है. कई बैंकों की तरफ से प्रत्येक ट्रांजैक्शन पर 2.5 प्रतिशत अथवा 10 रुपये या दोनों में जो भी अधिक हो, का अधिभार लगता है.
पीओएस मशीन में वीसा, मास्टर, रूपे कार्ड होते हैं स्वीकार : पीओएस टर्मिनल में बैंकों की तरफ से जारी मास्टर कार्ड, वीसा कार्ड, रूपे कार्ड अथवा अन्य एटीएम अथवा क्रेडिट कार्ड स्वीकार किये जाते हैं.
कैसे मिलता है पीओएस मशीन : व्यापारियों के संतोषजनक खातों के संचालन के साथ-साथ बैंकों में करेंट एकाउंट का होना इसके लिए जरूरी है. कोई भी व्यापारी अपने काउंटर पर या रिटेल दुकानों पर यह टर्मिल लगा सकता है. वीसा अथवा मास्टरकार्ड के निगेटिव रहने पर यह टर्मिनल उपलब्ध नहीं कराया जाता है. कार्ड के माध्यम से एक व्यापारी दूसरे व्यापारी के साथ 50 हजार रुपये तक का कारोबार कर सकता है. इसके लिए लैंडलाइन कनेक्शन लेना जरूरी है. यह एक साधारण प्रक्रिया है, जहां व्यापारी एक आवेदन फाॅर्म भर कर बैंक के साथ एक समझौता करता है. समझौते के बाद ही व्यापारियों के करेंट एकाउंट से यह ट्रांजैक्शन शुरू की जाती है.

