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सुधर रहा है रांची पॉलिटेक्निक का माहौल

13 Dec, 2016 1:13 am
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सुधर रहा है रांची पॉलिटेक्निक का माहौल

रांची: प्रभात खबर में राजकीय पॉलिटेक्निक, चर्च रोड की दुर्दशा से संबंधित खबर 25 मई 2015 को छपी थी. उक्त खबर….सर, रांची पॉलिटेक्निक को बचाइये…के बाद तत्कालीन विभागीय सचिव ने एक उच्च स्तरीय बैठक बुलायी थी. उस बैठक में लिये गये निर्णय के अालोक में रांची पॉलिटेक्निक का माहौल अब सुधर रहा है. इसके परिसर […]

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रांची: प्रभात खबर में राजकीय पॉलिटेक्निक, चर्च रोड की दुर्दशा से संबंधित खबर 25 मई 2015 को छपी थी. उक्त खबर….सर, रांची पॉलिटेक्निक को बचाइये…के बाद तत्कालीन विभागीय सचिव ने एक उच्च स्तरीय बैठक बुलायी थी. उस बैठक में लिये गये निर्णय के अालोक में रांची पॉलिटेक्निक का माहौल अब सुधर रहा है. इसके परिसर में रोशनी की व्यवस्था की गयी है.

साथ ही पुलिस की गश्त भी बढ़ायी गयी है. संस्थान के प्राचार्य कामेश्वर सिंह के अनुसार अब बाहरी लोगों की आवाजाही थमी है तथा असामाजिक गतिविधियों पर नियंत्रण लगा है. वर्तमान विभागीय सचिव अजय कुमार सिंह भी रांची सहित अन्य पॉलिटेक्निक संस्थानों के सुधार में रुचि ले रहे हैं.

वहीं निरसा पॉलिटेक्निक को छोड़ सभी राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थानों के भवन के जीर्णोद्धार सहित अन्य विकास कार्यों के लिए भवन निर्माण ने डीपीआर बनाया है. इसके जरिये सिविल व इलेक्ट्रिकल सहित कैंपस डेवलपमेंट व सोलर पैनल लगाने जैसे अन्य कार्य भी होंगे. बोकारो जिले के पॉलिटेक्निक संस्थानों में तो काम शुरू भी हो गया है. वहीं चर्च रोड रांची स्थित राजकीय तथा थड़पखना स्थित महिला पॉलिटेक्निक में 15-20 दिनों में काम शुरू हो सकता है. कुल मिला कर पठन-पाठन की बुनियादी सुविधा, जो बहुत पहले मिल जानी चाहिए थी, कम-से-कम अब मुहैया करायी जा रही है.
अभी तक नहीं हो सका है चहारदीवारी का निर्माण
सुधार का सबसे बड़ा काम संस्थान की चहारदीवारी निर्माण है, जो आज तक लटका है. वर्ष 2010-11 में रांची पॉलिटेक्निक का अतिक्रमण हटाने के बाद संस्थान की चहारदीवारी निर्माण के लिए विज्ञान व प्रावैधिकी (अब उच्च व तकनीकी शिक्षा) विभाग ने 46 लाख रुपये भवन निर्माण विभाग को उपलब्ध कराये थे, पर यह काम आज तक पूरा नहीं हो सका है. संस्थान के प्लॉट संख्या 125 व 126 की 1.05 एकड़ भूमि पर विवाद सहित लॉ एंड अॉर्डर की समस्या को इसका कारण बताया जाता है. भूमि विवाद तो भू-अर्जन पदाधिकारी के दस्तावेज के आधार पर खारिज कर दिया गया है, पर सरकार चहारदीवारी नहीं बना सकी है, जो पठन-पाठन के माहौल सहित सुरक्षा के लिए सबसे जरूरी है.
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