चाईबासा सर्किट हाउस का केयरटेकर निकला नक्सलियों का गुर्गा, गिरफ्तार

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चाईबासा सर्किट हाउस का केयरटेकर निकला नक्सलियों का गुर्गा, गिरफ्तार

रांची: माओवादियों के लिए मुखबिरी करने के आरोप में मुफस्सिल थाना पुलिस ने चाईबासा सर्किट हाउस (परिसदन) के केयरटेकर वीरेंद्र दास को गिरफ्तार कर लिया है. वीरेंद्र के साथ-साथ ही मेसर्स तिरुपति सेल्स बड़ा नीमडीह चाईबासा तथा नक्सली शंकर सिरका के खिलाफ 17 सीएलए एक्ट, धारा 468, 470, 471, 120 के तहत मामला दर्ज किया […]

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रांची: माओवादियों के लिए मुखबिरी करने के आरोप में मुफस्सिल थाना पुलिस ने चाईबासा सर्किट हाउस (परिसदन) के केयरटेकर वीरेंद्र दास को गिरफ्तार कर लिया है. वीरेंद्र के साथ-साथ ही मेसर्स तिरुपति सेल्स बड़ा नीमडीह चाईबासा तथा नक्सली शंकर सिरका के खिलाफ 17 सीएलए एक्ट, धारा 468, 470, 471, 120 के तहत मामला दर्ज किया गया है. गुरुवार को आरोपी वीरेंद्र को मीडिया के समक्ष पेश किया गया. उस पर सर्किट हाउस में आने वाले बड़े नेताओं के साथ-साथ पुलिस व सीआरपीएफ के बड़े अधिकारियों की रेकी करने तथा उनसे संबंधित सूचनाएं नक्सलियों तक पहुंचाने का आरोप है.
डीएसपी हेडक्वाटर प्रकाश कुमार सोय ने गुरुवार को पत्रकारों को बताया कि 21 सितंबर को पुलिस अधीक्षक चाईबासा द्वारा मुफस्सिल थाना पुलिस को सूचना दी गयी कि फोन संख्या 7482982923 का धारक लगातार भाकपा माओवादी के शीर्ष नेता के मोबाइल 7684946633 के संपर्क में है. उसके द्वारा सर्किट हाउस चाईबासा में ठहरनेवाले विशिष्ट व्यक्ति व पुलिस के वरीय पदाधिकारियों के संबंध में माओवादियों को सूचना दी जा रही है. इसके बाद पुलिस ने संबंधित फोन की सीडीआर निकाला. पुलिस ने पाया कि वह सिम तांतनगर थाना क्षेत्र के कुंभराम निवासी निर्मला कुई के नाम पर है.
सिम मेसर्स तिरुपति सेल्स बड़ा नीमडीह चाईबासा से खरीदा गया है. जांच में पाया गया कि निर्मला की मौत 11 फरवरी 2016 को ही हो चुकी है. उसके पति ने बताया कि उक्त नंबर का मोबाइल उनके पास नहीं है. इसके बाद यह साफ हो गया था कि फरजी नाम से सिम निकाला गया है. इसके बाद पुलिस ने उक्त सिम से जीतेंद्र महतो (8603575727) व सत्येंद्र दास (7250875255) द्वारा किये गये फोन की जांच शुरू की. पुलिस ने उक्त दोनों लोगों से पूछताछ की, तो उन्होंने बताया कि संबंधित नंबर(7482982923) सर्किट हाउस के केयरटेकर वीरेंद्र दास का है. इसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया.
मुख्यमंत्री रघुवर दास व पुलिस अफसर थे निशाने पर!
चाईबासा सर्किट हाउस के केयरटेकर वीरेंद्र दास के सहयोग से नक्सली बड़ी वारदात को अंजाम देने की फिराक में थे. वीरेंद्र को सर्किट हाउस में ठहरनेवाले सीएम से लेकर राज्य के मंत्री और पुलिस प्रशासन के अधिकारियों की पूरी खबर रहती थी. उसके ऊपर सभी वीआइपी को ठहराने व भोजन आदि कराने की व्यवस्था की जिम्मेवारी होती थी. पुलिस सूत्रों की मानें, तो वीरेंद्र के जरिये नक्सली सीएम व मंत्री से लेकर पुलिस व अन्य अधिकारियों को टारगेट में लेनेवाले थे. नौ सितंबर को मुख्यमंत्री रघुवर दास के चाईबासा आने से पहले उसी दिन सुबह शहर के सरायकेला मोड़ के पास पुल पर उनकी हत्या की धमकी भरा बैनर नक्सलियों ने लगाया था. इसके बाद पुलिस के कान खड़े हो गये थे. पुलिस जांच कर रही थी. नक्सलियों के फोन सर्विलांस के जरिये टेप किये जा रहे थे. वीरेंद्र ने मुख्यमंत्री रघुवर दास के चाईबासा आगमन पर मंच पर न केवल चाय परोसी थी, बल्कि रांची लौटने से पूर्व सर्किट हाउस में दोपहर का खाना भी खिलाया था. वीरेंद्र को पूर्व के सीएम, मंत्री व अधिकारी भी व्यक्तिगत रूप से जानते और नाम से पुकारते थे.
पुलिस अधिकारियों व वीआइपी के बारे में देता था सूचना
पूछताछ में बीरेंद्र ने बताया कि वह 7684946633 पर माओवादियों के शीर्ष नेता तथा जेटिया के जामझुई निव��सी शंकर सिरका से बात करता है. उन्हें वह सर्किट हाउस में ठहरने वाले वीआइपी व पुलिस पदाधिकारियों की सूचना देता था. पुलिस द्वारा उसके फोन की छानबीन किये जाने की वीरेंद्र को सूचना मिलने पर उसने सिम सहित फोन को कुजू नदी में फेंक दिया था. पुलिस ने उसकी बतायी गयी जगह पर कुजू नदी में फोन की तलाश करायी गयी थी, लेकिन फोन बरामद नहीं हुआ.
डेढ़ माह पहले वीरेंद्र का माओवादियों ने किया था अगवा
पुलिस की पूछताछ में वीरेंद्र ने बताया कि डेढ़ माह पहले शाम के लगभग छह बजे उसे सर्किट हाउस से माओवादी ने बहला फुसला कर अगवा कर लिया. इसके बाद उसे जेटिया थाना क्षेत्र के जंगल ले जाया गया. वहां पर माओवादी नेता शंकर सिरका से मिलाया गया. उसे संगठन को सहयोग करने को कहा गया. उसे परिवार को मार डालने की धमकी दी गयी. पूरी रात उसे वहीं पर रखा गया. सुबह चार बजे उसे छोड़ दिया गया. एक सप्ताह बाद फिर उसे पोस्ट ऑफिस चौक से अगवा कर वहीं ले जाया गया. इस बार उसे पैसे का भी लालच दिया गया था. इसके बाद वीरेंद्र उन्हें सूचना देना लगा था.
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