राज्य में 8.56 लाख स्मार्ट मीटर लगे, छह महीने में 10 लाख और लगाने की चुनौती

झारखंड में कुल 54 लाख 35 हजार 260 बिजली उपभोक्ता हैं. रिवैंप्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम(आरडीएसएस) के तहत इनमें से 18 लाख 63 हजार 749 उपभोक्ताओं के यहां ही स्मार्ट मीटर लगाने का लक्ष्य है.
सुनील चौधरी, रांची. झारखंड में कुल 54 लाख 35 हजार 260 बिजली उपभोक्ता हैं. रिवैंप्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम(आरडीएसएस) के तहत इनमें से 18 लाख 63 हजार 749 उपभोक्ताओं के यहां ही स्मार्ट मीटर लगाने का लक्ष्य है. स्मार्ट मीटर लगाने का काम 10 दिसंबर 2024 से शुरू हुआ था और निर्धारित लक्ष्य को पूरा करने के लिए झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (जेबीवीएनएल) के पास मार्च 2026 तक का वक्त है. इधर, अब तक केवल 8.56 लाख उपभोक्ताओं के यहां ही स्मार्ट मीटर लग पाये हैं. यानी जेबीवीएनएल के पास शेष उपभोक्ताओं के यहां स्मार्ट मीटर लगाने के लिए करीब छह माह का ही वक्त बचा हुआ है. बता दें कि झारखंड में बिजली आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत और अत्याधुनिक बनाने के लिए केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना आरडीएसएस के तहत काम चल रहा है. इसका लक्ष्य राज्य के उपभोक्ताओं को निर्बाध, गुणवत्तापूर्ण और स्मार्ट बिजली आपूर्ति उपलब्ध कराना है. इसके तहत जेबीवीएनएल प्राथमिकता के तहत उपभोक्ताओं के यहां स्मार्ट मीटर लगाये जा रहे हैं. राज्य के 54.35 लाख बिजली उपभोक्ताओं में से इनमें करीब 35 लाख 71 हजार 511 उपभोक्ता ऐसे हैं, जिनके यहां बिजली की खपत काफी कम है या सरकार की ‘200 यूनिट मुफ्त बिजली’ योजना के दायरे में आते हैं. इनमें अधिकतर ग्रामीण इलाकों में रहते हैं. इन उपभोक्ताओं को आरडीएसएस के तहत नहीं रखा गया है. रांची शहरी क्षेत्र में स्मार्ट मीटर लगाने की योजना पहले से चल रही थी.
अलग-अलग कंपनियों को मिली जिम्मेदारी
आरडीएसएस योजना के कार्यान्वयन के लिए अलग-अलग कंपनियों को जिलों का जिम्मा सौंपा गया है. इनमें जेमस्टार, टेक्नो, बेनटेक और जीनस जैसी कंपनियां शामिल हैं. जेमस्टार को बोकारो, गिरिडीह, धनबाद, देवघर, गोड्डा, खूंटी, रांची, गुमला, लोहरदगा और सिमडेगा जैसे जिलों का काम सौंपा गया है. टेक्नो कंपनी को पलामू, लातेहार, गढ़वा, हजारीबाग, चतरा, रामगढ़ और कोडरमा का जिम्मा दिया गया है. वहीं बेनटेक कंपनी दुमका, जामताड़ा, पाकुड़, साहिबगंज, सरायकेला-खरसावां, पूर्वी सिंहभूम और पश्चिमी सिंहभूम जिलों में काम करेगी. जीनस कंपनी को रांची सर्किल, शेष रांची और शेष जमशेदपुर का काम सौंपा गया है.घाटे से पाटने के लिए मीटर है जरूरी
जेबीवीएनएल को लगातार घाटा हो रहा है. इसके पीछे बिजली चोरी और लाइन लॉस एक बड़ी वजह है. एटीएंडसी लॉस वित्तीय वर्ष 2024 में 31.17 प्रतिशत रहा है, जिसे वर्ष 2025 में 15.41 प्रतिशत पर लाने का लक्ष्य रखा गया है. इस स्थिति में लाने के लिए स्मार्ट मीटरिंग की जा रही है, ताकि सही समय पर सटीक रीडिंग हो और भुगतान भी तत्काल प्राप्त हो.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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