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एक साल से नहीं खुला है जेनेटिक ओपीडी

6 Aug, 2015 1:43 am
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एक साल से नहीं खुला है जेनेटिक ओपीडी

सिर्फ नाम का रह गया है रिम्स का जेनेटिक विंग रांची : राज्य में अनुवांशिक बीमारी से पीड़ित मरीजों के बेहतर इलाज के लिए खुला रिम्स का जेनेटिक विंग अब सिर्फ नाम का रह गया है. इसे खोलने के पीछे राज्य सरकार की मंशा थी कि अनुवांशिक बीमारी के इलाज के लिए मरीजों को राज्य […]

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सिर्फ नाम का रह गया है रिम्स का जेनेटिक विंग
रांची : राज्य में अनुवांशिक बीमारी से पीड़ित मरीजों के बेहतर इलाज के लिए खुला रिम्स का जेनेटिक विंग अब सिर्फ नाम का रह गया है. इसे खोलने के पीछे राज्य सरकार की मंशा थी कि अनुवांशिक बीमारी के इलाज के लिए मरीजों को राज्य से बाहर नहीं जाना पड़े. 80 लाख रुपये खर्च कर इसके लिए मशीनें मंगायी गयी.
इसे खुले दो साल हो गये हैं, लेकिन एक्का-दुक्का लोगों को ही इसका लाभ मिल पाया है. जेनेटिक विंग को मई 2013 में खोला गया था. इसका ओपीडी भी खुला था, लेकिन यह ज्यादा समय तक नहीं चल सका. सूत्रों की माने तो एक साल से जेनेटिक विंग का ओपीडी बंद है.
मरीज ओपीडी में दिखाने के लिए आते है, लेकिन वहां चिकित्सक नहीं मिलते. जानकारी के अनुसार रिम्स में जेनेटिक विंग खोलने की पहल भी पूर्व मुख्यमंत्री के प्रयास से हुआ था, लेकिन आज विंग की स्थिति अच्छी नहीं है.
चिकित्सक एक, जिम्मेदारी दो
जेनेटिक विंग की जिम्मेदारी शिशु विभाग के चिकित्सक डॉ अमर को दी गयी है. उन्हें इस विभाग का उपनिदेशक बनाया गया. रिम्स प्रबंधन ने इसके लिए अधिसूचना जारी की, लेकिन शिशु विभाग की जिम्मेदारी के साथ जेनेटिक विंग चलाना उनके लिए मुश्किल है. वह शिशु ओपीडी में ही परामर्श देते है.
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