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बोर्ड न रद्द कर रही और न ही फ्रेंचाइजी दे रही है, 34 करोड़ की संरचना तैयार

4 Feb, 2015 7:00 am
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बोर्ड न रद्द कर रही और न ही फ्रेंचाइजी दे रही है, 34 करोड़ की संरचना तैयार

रांची: रांची में बिजली वितरण की फ्रेंचाइजी की आस में सीइएसइ अब तक 34 करोड़ रुपये की आधारभूत संरचना खड़ी कर चुकी है. हाल यह है कि झारखंड ऊर्जा विकास निगम की ओर से न तो फ्रेंचाइजी को रद्द किया जा रहा है और न ही इसे सौंपा जा रहा है. कंपनी ने सरकार से […]

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रांची: रांची में बिजली वितरण की फ्रेंचाइजी की आस में सीइएसइ अब तक 34 करोड़ रुपये की आधारभूत संरचना खड़ी कर चुकी है. हाल यह है कि झारखंड ऊर्जा विकास निगम की ओर से न तो फ्रेंचाइजी को रद्द किया जा रहा है और न ही इसे सौंपा जा रहा है. कंपनी ने सरकार से इस मुद्दे पर फैसला लेने का गुहार लगायी है. वहीं कोर्ट में भी याचिका दायर कर रांची की बिजली आपूर्ति कंपनी को सौंपने की मांग की है. सीइएसइ द्वारा रांची में रांची पावर लिमिटेड कंपनी का गठन किया गया है.
क्या है मामला : पांच दिसंबर 2012 को झारखंड सरकार ने रांची में बिजली आपूर्ति करने के लिए सीइएसइ व जमशेदपुर के लिए टाटा पावर के साथ एग्रीमेंट किया था. इसके बाद लगातार इसे लेकर विरोध के स्वर यूनियनों द्वारा उठता रहा और सरकार इसे टालती रही. तत्कालीन ऊर्जा मंत्री राजेंद्र सिंह ने अपने स्तर से एग्रीमेंट ही रद्द कर दिया था. हालांकि कोर्ट ने कहा था कि इस पर फैसला बिजली बोर्ड ले सकता है.
इसके बाद से बोर्ड द्वारा अब तक कोई फैसला नहीं लिया जा सका है. कंपनी के एक अधिकारी बताते हैं कि रांची में बिजली बोर्ड के समानांतर आधारभूत संरचना कंपनी द्वारा खड़ी की गयी है. क्लब रोड में कॉरपोरेट ऑफिस बनाया गया है. चार डिविजन ऑफिस कांटा टोली, रातू रोड, मेन रोड व खूंटी में बनाये गये हैं. वहीं 19 सब डिविजन ऑफिस भी सब स्टेशन के समानांतर बनाया गया है, जहां उपभोक्ता बिल को जमा या नया कनेक्शन ले सकते हैं. ऐसे ऑफिस मांडर, सिल्ली, तोरपा में भी खोले गये हैं. कमड़े में एक वेयर हाउस बनाया गया है, जहां ट्रांसफारमर व अन्य उपकरण रखे गये हैं. काम न होता देख इसे कोलकाता भेज दिया गया है.
मीटर को लेकर है अड़चन
बिजली कंपनी व सीइएसइ में करार के तहत प्रत्येक ग्रिड में ज्वाइंट मीटर लगाना है. सीइएसइ मीटर लगा चुकी है, पर बिजली कंपनी द्वारा अब तक मीटर नहीं लगाया गया है. बार-बार इसी का हवाला देते हुए फ्रेंचाइजी को टाला जाता है. वहीं, अर्नेस्ट एंड यंग द्वारा एसेट को लेकर की जा रही ऑडिट का रुकना भी एक वजह बतायी जा रही है. कंपनी के अधिकारी ने बताया कि करार के तहत रांची में बिजली वितरण सुधार के लिए कंपनी द्वारा 160 करोड़ रुपये खर्च किये जाने हैं, पर जब तक फ्रेंचाइजी को हैंडओवर नहीं किया जाता, तब तक कंपनी खर्च नहीं कर सकती है. इधर, ऊर्जा विकास निगम के अधिकारी का कहना है कि फ्रेंचाइजी मामले में सरकार से कोई निर्देश नहीं मिला है. नयी सरकार बनी है, जब तक कोई निर्णय नहीं हो जाता, तब तक कुछ नहीं किया जा सकता.
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