दीवाली नहीं मनायेंगे शिक्षक छह नवंबर को होगा मुख्यमंत्री आवास का घेराववरीय संवाददातारांची : झारखंड राज्य वित्तरहित शिक्षा संयुक्त संघर्ष मोरचा के तत्वावधान में शनिवार को राजभवन के समक्ष धरना दिया गया. सैकड़ों शिक्षकों व कर्मचारियों ने उपवास भी रखा. शिक्षकों ने घाटानुदान देने, पूर्ण वेतन, संस्कृत विद्यालयों व मदरसा को बिहार की तर्ज पर अनुदान देने सहित छह सूत्री मांगों से संबंधित ज्ञापन राज्यपाल को सौंपा. मोरचा के आंदोलन का यह दूसरा चरण था. धरना पर बैठे शिक्षाकर्मियों ने मांगें पूरी नहीं होने पर दीवाली नहीं मनाने की घोषणा की. आगामी विधानसभा चुनाव में सत्ताधारी पार्टी के विधायकों के क्षेत्र में विरोध स्वरूप जनजागरण अभियान चलाया जायेगा. चुनाव के दौरान किसी भी सरकारी कार्य (मतदान) में शामिल नहीं होने का निर्णय भी लिया गया. धरना का नेतृत्व रघुनाथ सिंह, सुरेंद्र झा, हरिहर प्रसाद कुशवाहा, मो हासमी, अरविंद कुमार सिंह, नरोत्तम सिंह, कांता मिश्रा, प्रताप यादव, विजय झा, नरेश घोष, बलदेव पांडेय, चंद्रशेखर पाठक, डा देवनाथ सिंह ने किया.मोरचा के प्रतिनिधियों ने कहा कि राज्य सरकार माध्यमिक शिक्षा और उच्च शिक्षा में भेदभाव कर रही है. इस भेदभाव का वित्तरहित शिक्षण संस्थानों के 25 हजार से अधिक कर्मी हर स्तर पर विरोध करेंगे. धरना कार्यक्रम के बाद मोरचा अध्यक्ष मंडल की बैठक हुई. तय हुआ कि शिक्षक व कर्मचारी दीपावली नहीं मनायेंगे. छठ पर्व के समय सत्ताधारी पार्टी के विधायकों के क्षेत्र में घेराव किया जायेगा. छह नवंबर को मुख्यमंत्री आवास के घेराव के बाद मोरचा के सदस्य आमरण अनशन करेंगे. मेयर व डिप्टी मेयर धरना स्थल पहुंचेमेयर आशा लकड़ा व डिप्टी मेयर संजीव विजयवर्गीय धरना स्थल पर पहुंच कर शिक्षकों की मांगों व आंदोलन का समर्थन किया. इस अवसर पर जयंत कुमार सिंह, अशोक सिंह, सिबिरिया टोप्पो, मंजू रानी डे, हरिहर प्रसाद कुशवाहा, रेशमी कुमारी, प्रो मेघा वर्मा, ममता मेहता, अर्जुन पांडेय, योधो हजाम, बाबूलाल महतो, आरपी मिश्रा, आरके महतो, पीके सिंह, भोला दत्ता, मनीष कुमार, विनय कश्यप, अभय कुमार, विनय यादव सहित राज्य के विभिन्न जिलों से आये हुए लगभग दो हजार से अधिक शिक्षक व कर्मचारी उपस्थित थे. इन मांगों को लेकर चल रहा है आंदोलन-इंटर कॉलेजों का अधिग्रहण या घाटानुदान दिया जाये. – 30 संस्कृत विद्यालय व 591 मदरसों को बिहार की तर्ज पर अनुदान मिले.- स्थापना अनुमति प्राप्त हाइस्कूलों के शिक्षाकर्मियों को पूर्ण वेतन का भुगतान किया जाये.- सेवानिवृत्ति की उम्र सीमा 65 वर्ष की जाये.- कामेश्वर समिति की अनुशंसाओं को लागू किया जाये.
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शिक्षकों का राजभवन के समक्ष उपवास-धरना
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Prabhat Khabar Digital Desk
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