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Agriculture: आईसीएआर की चयन प्रक्रिया को बनाया गया पारदर्शी और योग्यता आधारित 

आईसीएआर के कामकाज में व्यापक सुधार के लिए जुलाई 2025 में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग(यूजीसी) के पूर्व प्रमुख प्रोफेसर वेद प्रकाश की अध्यक्षता में उच्च-स्तरीय समिति का गठन किया था. इस समिति में प्रमुख कृषि वैज्ञानिकों और चयन विशेषज्ञों को शामिल किया गया था और दिसंबर 2025 में रिपोर्ट सरकार को सौंप दी. अब इन सिफारिशों के आधार पर चयन पर ही चयन होगा.

Agriculture: भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) में चयन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और योग्यता-आधारित बनाने के लिए शुरू की गयी पहल का असर दिख रहा है. सरकार ने आईसीएआर के कामकाज में व्यापक सुधार के लिए जुलाई 2025 में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग(यूजीसी) के पूर्व प्रमुख प्रोफेसर वेद प्रकाश की अध्यक्षता में उच्च-स्तरीय समिति का गठन किया था. इस समिति में प्रमुख कृषि वैज्ञानिकों और चयन विशेषज्ञों को शामिल किया गया था और दिसंबर 2025 में रिपोर्ट सरकार को सौंप दी. समिति ने आईसीएआर के कामकाज और चयन प्रक्रिया में बदलाव लाने के लिए कई सिफारिश की थी. 

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय समिति की सिफारिशों को लागू करने का काम कर रहा है ताकि चयन में पारदर्शिता और गुणवत्ता दोनों सुनिश्चित हो सके. केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में आईसीएआर ने अपने ढांचे में ऐतिहासिक सुधार करने का काम किया है. आईसीएमआर के निदेशक डॉक्टर मांगी लाल जाट ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मानना है कि देश के किसानों और कृषि वैज्ञानिक आत्मनिर्भर भारत के वास्तविक निर्माता हैं. इसी सोच के तहत आईसीएआर का नया चयन ढांचा तैयार किया गया है, जो पारदर्शिता, योग्यता और पद की प्रासंगिकता को महत्व देता है. 

योग्यता के आधार पर चयन को दिया जा रहा है महत्व


सिफारिशों के तहत आईसीएआर में अब चयन प्रक्रिया ‘पद-केंद्रित’ होगी, यानी जिस पद के लिए चयन हो रहा है, उसके अनुरूप योग्यता और अनुभव को महत्व दिया जाएगा. चयन में वैज्ञानिक संतुलन स्कोरकार्ड और इंटरव्यू का अंक निर्धारित होगा. नये स्कोरिंग मॉडल में वस्तुनिष्ठता को सुनिश्चित करने के लिए स्कोरकार्ड और साक्षात्कार का वैज्ञानिक संतुलन तय किया गया है. अनुसंधान प्रबंधन पद(आरएमपी) के लिए 70:30, गैर-आरएमपी के लिए 75:25, प्रधान एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक के लिए  80:20 का मानक लागू होगा. यही नहीं अब केवल शोध पत्रों की संख्या नहीं, बल्कि शोध के वास्तविक प्रभाव का मूल्यांकन होगा. साथ ही नेतृत्व कौशल और प्रबंधन क्षमता को भी महत्व मिलेगा. 


उन वैज्ञानिकों को विशेष वेटेज दिया जायेगा, जिन्होंने देश के कठिन और दुर्गम क्षेत्रों में सेवा देने का काम किया है. भारतीय प्रवासी वैज्ञानिकों एवं अन्य संस्थानों की श्रेष्ठ प्रतिभाओं के लिए भी चयन प्रक्रिया अधिक खुली और सुलभ होगी. चयन का हर चरण पारदर्शी और योग्यता-आधारित होगा. नए ढांचे में किसान-केंद्रित और उद्योग-उन्मुख शोध, बहुविषयक अनुसंधान को प्राथमिकता दी गयी है. इससे कृषि अनुसंधान का सीधा लाभ किसानों और स्टार्टअप सेक्टर तक मिलेगा. इन सुधारों के जरिये आईसीएआर अब विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में निर्णायक भूमिका निभाने को तैयार है. 

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