कॉलेजों में फैकल्टी आधी

By Prabhat Khabar Digital Desk
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रांची: राज्य सरकार को अपने मेडिकल कॉलेजों में पठन-पाठन संबंधी कमियां दूर नहीं करना महंगा पड़ा है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने रिम्स रांची, एमजीएम जमशेदपुर व पीएमसीएच धनबाद की कुल 160 सीटें कम कर दी हैं.

रिम्स की 60 और एमजीएम व पीएमसीएच की 50-50 सीटें कम की गयी हैं. मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआइ) ने इन कॉलेजों में शिक्षकों, लाइब्रेरी व स्तरीय क्लास रूम सहित अन्य कमियां गिनायी है. रिम्स में बेहतर लाइब्रेरी की स्थापना तीन वर्ष में भी नहीं की जा सकी, जबकि एमसीआइ लगातार यह कहता रहा. उधर एमजीएम व पीएमसीएच दोनों में फैकल्टी जरूरत की 45 फीसदी ही है. पीएमसीएच की लाइब्रेरी में कोई लाइब्रेरियन ही नहीं है. यहां मेडिकल स्टाफ की भी कमी है. एमसीआइ के निरीक्षण के दिन अस्पताल की सीटी स्कैन मशीन काम नहीं कर रही थी. लगभग यही हाल एमजीएम का भी है.

एक-दूसरे पर कर रहे दोषारोपण : झारखंड में कॉलेजों के प्राचार्य, विभाग और विभागीय अधिकारी, प्राचार्यो पर दोषारोपण कर रहे हैं. एक प्राचार्य ने ऑफ द रेकॉर्ड कहा कि समय पर पहल करने का काम विभाग का था. वैसे भी एमसीआइ किसी प्राचार्य की अंडरटेकिंग नहीं मानेगा. यह सरकार ही दे सकती है. वहीं, स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी ने सभी प्राचार्यो को कह दिया है कि यदि सीटें नहीं बढ़ी, तो वे दोषी माने जायेंगे. रिम्स निदेशक डॉ एसके चौधरी ने कहा कि अगर दूरदर्शिता के साथ खामियों के निराकरण का प्रयास किया गया होता तो यह नौबत नहीं आती.

बिहार ने बचा ली सीटें

एक विभागीय अधिकारी के अनुसार, जो काम स्वास्थ्य विभाग आज कर रहा है, वह 15 जुलाई तक कर लिया गया होता, तो बढ़ी हुई सीटें घटायी नहीं जाती. दरअसल बिहार सरकार ने समय पर पहल कर अपनी 100 सीटें बचा ली, जिसे कम करने की अनुशंसा कर दी गयी थी. स्वास्थ्य विभाग ने बिहार सरकार से जानना चाहा था कि वहां की सीटें कैसे बची. इस पर स्वास्थ्य विभाग, बिहार के सचिव ने दूरभाष पर बताया कि उन्होंने 12 जुलाई से पहले ही केंद्र को अंडरटेकिंग दी थी कि सरकार अपने कॉलेजों की कमियां यथाशीघ्र दूर कर लेगी.

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