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यह है जेवीएम कार्यालय : कभी थी गहमागहमी, आज है सन्नाटा

Updated at : 19 Feb 2020 6:47 AM (IST)
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यह है जेवीएम कार्यालय : कभी थी गहमागहमी, आज है सन्नाटा

रांची : लंबे इंतजार के बाद बाबूलाल मरांडी एक बार फिर भाजपा के साथ हैं. वहीं भाजपा में विलय के बाद डिबडीह स्थित झाविमो मुख्यालय में सन्नाटा पसरा हुआ है. आमतौर पर नेताओं और पार्टी कार्यकर्ताओं से गुलजार रहनेवाला झाविमो मुख्यालय मंगलवार को खाली दिखा.यहां एक – दो गार्ड को छोड़ नेताओं और कार्यकर्ताओं की […]

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रांची : लंबे इंतजार के बाद बाबूलाल मरांडी एक बार फिर भाजपा के साथ हैं. वहीं भाजपा में विलय के बाद डिबडीह स्थित झाविमो मुख्यालय में सन्नाटा पसरा हुआ है. आमतौर पर नेताओं और पार्टी कार्यकर्ताओं से गुलजार रहनेवाला झाविमो मुख्यालय मंगलवार को खाली दिखा.यहां एक – दो गार्ड को छोड़ नेताओं और कार्यकर्ताओं की भीड़ नदारद है. विधानसभा चुनाव के दौरान और इससे पहले हर दिन यहां नेताओं की गहमा-गहमी देखी जा रही थी. लेकिन मंगलवार को कुछ मीडियाकर्मियों को छोड़ कर झाविमो मुख्यालय में कोई नहीं आया.
बाबूलाल जी को अब बड़ी जिम्मेदारी निभानी है. लोगों को लग रहा है कि अब भाजपा के नेतृत्व में राज्य को आगे बढ़ाया जायेगा. सभी को विश्वास है, वह पार्टी और कार्यकर्ताओं के भविष्य को ध्यान में रखेंगे.
शोभा यादव, हटिया सीट से प्रत्याशी थीं.
देश-काल, परिस्थतियों के अनुसार राज्य की जनता बाबूलाल के विश्वास और भरोसे के नाम पर मुहर लगायेंगे. बाबूलाल के भाजपा में आने से पार्टी और स्थानीय नेतृत्व की ताकत बढ़ेगी.
रामचंद्र केसरी, पूर्व केंद्रीय उपाध्यक्ष, झाविमो.
झारखंड में उनसे बढ़िया नेता कोई हो भी नहीं सकता है, उनके भाजपा में शामिल होने से हर समाज के लोगों में अपेक्षाएं बढ़ी हैं. उन्होंने ही सिखाया है, बिना पद, बिना स्वार्थ काम करना.
राजीव रंजन मिश्रा, पूर्व महासचिव, झाविमो.
बाबूलाल जी अकेले लड़ रहे थे. हमें पद का लालच नहीं, हमें उनके ऊपर भरोसा है, उन्हें हर वर्ग का प्यार मिलेगा. आएसएस से जुड़े रहे बाबूलाल जी का झारखंड के आदिवासी समुदायों के बीच काफी प्रभाव है.
सुनीता सिंह, पूर्व केंद्रीय सचिव, झाविमो.
गुरुजी के बाद झारखंड में बाबूलाल जी का जनाधार है. याद कीजिए किता स्टेशन की घटना, जब इंतजार अली को विस्फोटक के साथ गिरफ्तारी के बाद एकमात्र नेता बाबूलाल मरांडी ही अल्पसंख्यकों के साथ मजबूती से खड़े रहे.
तौहिद आलम, पूर्व सचिव, झाविमो.
इस कार्यालय को हमने अपने हाथों से बनाया है, यह कार्यालय भी चलता रहेगा. हमें भरोसा है कि बाबूलाल जी भाजपा प्रदेश कार्यालय से आकर पुराने पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं का हौसला जरूर बढ़ायेंगे.संतोष कुमार, पूर्व केंद्रीय महासचिव, झाविमो.
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