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प्रदीप यादव झारखंड विकास मोर्चा से निष्कासित, कांग्रेस से नजदीकी की मिली सजा

Updated at : 06 Feb 2020 5:25 PM (IST)
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प्रदीप यादव झारखंड विकास मोर्चा से निष्कासित, कांग्रेस से नजदीकी की मिली सजा

रांची : झारखंड विकास मोर्चा प्रजातांत्रिक (जेवीएम-पी) के नेता प्रदीप यादव को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है. पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त होने की वजह से प्रदीप को पार्टी की प्राथमिकता सदस्यता और सभी पदों से मुक्त कर दिया गया है. 4 फरवरी को पार्टी सुप्रीमो बाबूलाल मरांडी ने प्रदीप यादव से 48 […]

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रांची : झारखंड विकास मोर्चा प्रजातांत्रिक (जेवीएम-पी) के नेता प्रदीप यादव को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है. पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त होने की वजह से प्रदीप को पार्टी की प्राथमिकता सदस्यता और सभी पदों से मुक्त कर दिया गया है. 4 फरवरी को पार्टी सुप्रीमो बाबूलाल मरांडी ने प्रदीप यादव से 48 घंटे के अंदर स्पष्टीकरण मांगा था. प्रदीप यादव ने इसका कोई जवाब नहीं दिया और कहा कि उन्हें किसी प्रकार का कारण बताओ नोटिस नहीं मिला है.

प्रदीप यादव के इस बयान को जेवीएम-पी के प्रधान महासचिव अभय सिंह ने 5 फरवरी को खारिज कर दिया था. उन्होंने कहा कि पार्टी के विधायक प्रदीप यादव का यह कहना कि उनको जारी कारण बताओ नोटिस उन्हें नहीं मिला है, सरासर गलत है. अभय सिंह ने कहा कि प्रदीप यादव के रांची आवास पर उन्हें पत्र दिया गया था और उसकी रिसीविंग की कॉपी भी उपलब्ध है. इतना ही नहीं, वाट्सएप्प (WhatsApp) के अलावा रजिस्ट्री से भी उन्हें पत्र भेजा गया.

यहां बताना प्रासंगिक होगा कि पार्टी ने जो पत्र लिखा है, उसमें कहा गया है कि प्रदीप यादव ने पार्टी और पार्टी अध्यक्ष के खिलाफ टिप्पणियां की हैं. पत्र में कहा गया है कि 20 जनवरी, 2020 को श्री यादव ने गोड्डा में संशोधित नागरिकता कानून (CAA) के खिलाफ आयोजित जनसभा में पार्टी की अनुमति के बगैर भाग लिया. इतना ही नहीं, 23 जनवरी को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी से मुलाीकात की, जिसमें कांग्रेस के झारखंड प्रभारी आरपीएन सिंह भी मौजूद थे.

प्रदीप यादव को लिखे पत्र में कहा गया है कि 30 जनवरी, 2020 को उन्होंने गोड्डा में प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कांग्रेस पार्टी में शामिल होने के संकेत दिये थे. प्रिंट एवं विजुअल मीडिया की कई अन्य खबरें भी यह दर्शाती हैं कि वह कांग्रेस पार्टी में शामिल होना चाहते हैं. इन्हीं कारणों से जेवीएम-पी के अध्यक्ष के निर्देश पर पार्टी के केंद्रीय प्रधान महासचिव अभय सिंह ने पत्र लिखकर प्रदीप यादव से 48 घंटे में जवाब देने के लिए कहा था.

ज्ञात हो कि 30 जनवरी, 2020 को जेवीएम-पी के विधायक प्रदीप यादव ने सोनिया गांधी और राहुल गांधी को देश का नेता बताया था. एक समाचार पत्र में उनके इस बयान के साथ उम्मीद जतायी गयी थी कि पोड़ैयाहाट के विधायक प्रदीप यादव 2 फरवरी को कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं.

उल्लेखनीय है कि बाबूलाल मरांडी के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने की चर्चा लंबे समय से चल रही है. प्रदीप यादव और बंधु तिर्की की वजह से जेवीएम-पी के भाजपा में विलय में कुछ अड़चनें आ रही हैं. हालिया झारखंड विधानसभा चुनाव में सभी सीटों पर चुनाव लड़ने वाली जेवीएम-पी सिर्फ 3 सीटें ही जीत पायीं. बिना किसी शर्त के हेमंत सोरेन की सरकार को समर्थन देने की घोषणा की.

इसके कुछ ही दिनों बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा शुरू हुई कि बाबूलाल मरांडी भाजपा में शामिल हो सकते हैं. फिर चर्चा हुई कि जेेवीएम-पी का भाजपा में विलय हो सकता है. लेकिन, प्रदीप यादव और बंधु तिर्की इसके लिए तैयार नहीं थे. इसके बाद बंधु तिर्की और प्रदीप यादव की कांग्रेस से करीबी बढ़ने लगी. इसी आलोक में पार्टी ने प्रदीप यादव को पहले कारण बताओ नोटिस जारी किया और अब उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया.

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