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गलत रिपोर्टिंग के कारण टैगोर हिल और नंदन कानन राष्ट्रीय स्मारक के दर्जे से वंचित, सांसद महेश पोद्दार ने राज्य सभा में उठाया मामला

Updated at : 05 Feb 2020 5:58 AM (IST)
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गलत रिपोर्टिंग के कारण टैगोर हिल और नंदन कानन राष्ट्रीय स्मारक के दर्जे से वंचित, सांसद महेश पोद्दार ने राज्य सभा में उठाया मामला

पुरातत्व सर्वेक्षण ने नहीं किया राष्ट्रीय धरोहर घोषित रांची : भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा टैगोर हिल और नंदन कानन को राष्ट्रीय महत्व का धरोहर घोषित नहीं किये जाने से राष्ट्रीय स्मारक के दर्जे से वंचित हुआ़ राज्यसभा सांसद महेश पोद्दार ने कहा है कि त्रुटिपूर्ण रिपोर्टिंग के कारण ही रांची स्थित टैगोर हिल के ब्रह्म […]

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पुरातत्व सर्वेक्षण ने नहीं किया राष्ट्रीय धरोहर घोषित
रांची : भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा टैगोर हिल और नंदन कानन को राष्ट्रीय महत्व का धरोहर घोषित नहीं किये जाने से राष्ट्रीय स्मारक के दर्जे से वंचित हुआ़ राज्यसभा सांसद महेश पोद्दार ने कहा है कि त्रुटिपूर्ण रिपोर्टिंग के कारण ही रांची स्थित टैगोर हिल के ब्रह्म मंदिर एवं जामताड़ा के करमाटांड़ स्थित ईश्वरचंद विद्यासागर की कर्मस्थल नंदन कानन को अब तक धरोहर स्थल के रूप में विकसित नहीं किया जा सका है़
ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण झारखंड के इन दोनों स्थलों को धरोहर स्थल के रूप में विकसित कराने का उनका प्रयास जारी रहेगा़ राज्यसभा सांसद श्री पोद्दार ने एक प्रश्न के माध्यम से भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा किसी स्मारक स्थल को धरोहर स्थल के रूप में चिह्नित या विकसित करने के लिए निर्धारित शर्तों की जानकारी मांगी थी़ उन्होंने सरकार से जानना चाहा था कि निर्धारित शर्त के अनुरूप रांची के टैगोर हिल स्थित ब्रह्म मंदिर एवं जामताड़ा के करमाटांड़ स्थित ईश्वरचंद विद्यासागर की कर्मस्थली नंदन कानन को धरोहर स्थल के रूप में विकसित करेगी या नही़ं
श्री पोद्दार के प्रश्न पर संस्कृति और पर्यटन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रहलाद सिंह पटेल ने सदन को बताया कि प्राचीन स्मारक तथा पुरातत्वीय स्थल और अवशेष अधिनियम, 1958 की धारा-दो के तहत राष्ट्रीय धरोहर घोषित होते है
कोई रचना, संस्मारक, स्तूप, मकबरा, गुफा, शैल रूपकृति, उत्कीर्ण लेख या एकाश्मक ऐतिहासिक, पुरातत्वीय या कलात्मक रूचि का है और कम से कम 100 वर्षों से विद्यमान है, तो उसे राष्ट्रीय महत्व का स्मारक घोषित किया जा सकता है़ मंत्री श्री पटेल ने कहा कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा अब तक राष्ट्रीय महत्व का स्मारक घोषित न हो पाने के कारण इन दोनों स्थलों को धरोहर स्थल के रूप में विकसित करने पर विचार नहीं किया जा रहा है़ इस पर श्री पोद्दार ने कहा कि झारखंड के इन दोनों ऐतिहासिक स्थलों के बारे में सही रिपोर्टिंग नहीं होने के कारण ही ये राष्ट्रीय धरोहर का दर्जा नहीं पा सके है़ं
उन्होंने कहा कि यह निर्विवादित तथ्य है कि जामताड़ा जिले के करमाटांड स्थित नंदन कानन ईश्वरचंद्र विद्यासागर की कर्मस्थली रही है़ विद्यासागर जी का निधन 29 जुलाई 1891 को हुआ है, अर्थात उनके द्वारा करमाटांड में बनवाये गये भवन एवं अन्य निर्माण हर हाल में 100 साल से ज्यादा पुराने है़
उन्होंने कहा कि कोलकाता से प्रकाशित तत्व बोधिनी नामक पत्रिका के 1832 शकाब्द यानी वर्ष 1910 के अंक में रांची के टैगोर हिल स्थित ब्रह्म मंदिर का जिक्र है़ इससे स्पष्ट है कि यह संरचना भी 1910 से पहले निर्मित थी और अब 100 साल से ज्यादा पुरानी हो चुकी है़ श्री पोद्दार ने कहा कि इन तथ्यों की रोशनी में झारखंड के ये दोनों ऐतिहासिक स्मारक धरोहर स्थल का दर्जा पाने की अहर्ता रखते है़ं
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