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अब हेमंत सरकार की पहल : ...तो उम्मीद है, आज से नहीं कटेगी रांची में बिजली

Updated at : 20 Jan 2020 8:43 AM (IST)
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अब हेमंत सरकार की पहल : ...तो उम्मीद है, आज से नहीं कटेगी रांची में बिजली

मुख्य सचिव का निर्देश रांची : मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर मुख्य सचिव डॉ डीके तिवारी ने रविवार को बिजली विभाग के आला अधिकारियों की आपात बैठक बुलायी. इसमें श्री तिवारी ने विभाग के अधिकारियों से कहा कि बिजली की आंखमिचौनी से राजधानी रांची के लोग परेशान हैं. इस समस्या को प्राथमिकता के रूप […]

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मुख्य सचिव का निर्देश
रांची : मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर मुख्य सचिव डॉ डीके तिवारी ने रविवार को बिजली विभाग के आला अधिकारियों की आपात बैठक बुलायी. इसमें श्री तिवारी ने विभाग के अधिकारियों से कहा कि बिजली की आंखमिचौनी से राजधानी रांची के लोग परेशान हैं. इस समस्या को प्राथमिकता के रूप में लेते हुए इसका समाधान किया जाये.
मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे हर हाल में सोमवार से राजधानी में निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करायें. यहां पावर कट की समस्या नहीं होनी चाहिए. अब इस निर्देश के बाद राजधानी के लोग उम्मीद कर सकते हैं कि उन्हें 24 घंटे बिजली मिलेगी. हालांकि जमीनी सच्चाई यह उम्मीद करने की इजाजत नहीं देती. वर्तमान इंफ्रास्ट्रक्चर में यह अब भी सपना ही लगता है.
दरअसल, मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव को बिजली आपूर्ति से जुड़ी समस्या के समाधान का निर्देश दिया है. कहा है कि अनियमित बिजली आपूर्ति से न सिर्फ राजधानी, बल्कि पूरे राज्य की जनता परेशान है.
जितनी जल्द हो सके इस समस्या का समाधान किया जाना चाहिए. इसी निर्देश के आलोक में मुख्य सचिव ने छुट्टी का दिन होने के बावजूद रविवार को ऊर्जा विभाग के अपर मुख्य सचिव एल खंयाग्ते, विद्युत वितरण निगम के एमडी राहुल पुरवार, संचरण निगम के एमडी निरंजन कुमार सहित अन्य अफसरों को बैठक के लिए बुलाया था.
रांची : पांच साल में इंफ्रास्ट्रक्चर पर करोड़ों खर्च, पर बिजली संकट है बरकरार
रांची : पिछले पांच साल से शहर में चल रहे इलेक्ट्रिक रिफॉर्म वर्क के बावजूद बिजली की लाइन में फॉल्ट का ग्राफ कम नहीं हो पाया है. राजधानी सहित आसपास के विभिन्न हिस्सों में प्रतिदिन दर्जनों फॉल्ट से जुड़ी शिकायतें दर्ज हो रही हैं. उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली नहीं मिल रही है.
पिछले पांच वर्ष में शहर में बिजली रिफॉर्म के नाम पर 350 करोड़ रुपये केबल बिछाने में खर्च हो चुके हैं. इंफ्रास्ट्रक्चर सुधारने के नाम पर अब तक अरबों रुपये खर्च हुए हैं. लेकिन पूरे राज्य की तो बात ही छोड़ दें, राजधानी में भी निर्बाध बिजली नहीं मिल रही है. लाइनों में लगातार हो रहे फॉल्ट को लेकर बिजली कंपनी के अधिकारी बेफिक्र हैं. उनकी क्षमता और कुशलता को लेकर ही सवाल उठने लगे हैं.
यह हाल तब है, जब झारखंड में प्रति व्यक्ति सबसे कम बिजली की खपत होती है. विद्युत क्षेत्र रांची, खूंटी, गुमला, लोहरदगा और सिमडेगा में पिछले पांच साल में लाखों की संख्या में नये बिजली उपभोक्ता जुड़े हैं. पांच साल पहले इस क्षेत्र में 270 मेगावाट बिजली की खपत होती थी, लेकिन अब इसमें लगभग 100 मेगावाट का इजाफा दर्ज किया गया है. बढ़ते उपभोक्ताओं के हिसाब से विभाग की तैयारी नहीं हो रही है.
आपूर्ति क्षेत्र से संबंधित जिलों में अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिये गये हैं. भविष्य में पावर कट न हो, इसका ध्यान रखा जायेगा.
प्रभात कुमार श्रीवास्तव, प्रभारी महाप्रबंधक सह मुख्य अभियंता, विद्युत आपूर्ति क्षेत्र, रांची.
बोले मुख्य सचिव
फरवरी के लिए बनायें
शेड्यूल, उसी के अनुसार, किया जाये मेंटेनेंस का काम
शाम चार बजे से पहले
मेंटेनेंस कार्य पूरा करायें, ताकि लोग अंधेरे में नहीं रहें
मेंटेनेंस पूरा होते ही
बहाल हो बिजली,
लोगों को न करना
पड़े लंबा इंतजार
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