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विधायक का सफरनामा : झारखंड की राजनीति के दादा समरेश सिंह

Updated at : 12 Dec 2019 7:16 AM (IST)
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विधायक का सफरनामा : झारखंड की राजनीति के दादा समरेश सिंह

बोकारो के पूर्व विधायक समरेश सिंह भाजपा के संस्थापक सदस्य हैं. लोग इन्हें दादा बोलते हैं. मुंबई में 1980 में आयोजित भाजपा के प्रथम अधिवेशन में कमल निशान का चिह्न रखने का सुझाव इन्हीं का था, जिसे केंद्रीय नेताओं ने मंजूरी दी थी. दरअसल श्री सिंह को 1977 के चुनाव में कमल निशान पर ही […]

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बोकारो के पूर्व विधायक समरेश सिंह भाजपा के संस्थापक सदस्य हैं. लोग इन्हें दादा बोलते हैं. मुंबई में 1980 में आयोजित भाजपा के प्रथम अधिवेशन में कमल निशान का चिह्न रखने का सुझाव इन्हीं का था, जिसे केंद्रीय नेताओं ने मंजूरी दी थी. दरअसल श्री सिंह को 1977 के चुनाव में कमल निशान पर ही जीत मिली थी. बाद में समरेश भाजपा से 1985 व 1990 में बोकारो से विधायक निर्वाचित हुए.
इससे पहले 1985 में श्री सिंह ने इंदर सिंह नामधारी के साथ मिलकर भाजपा में विद्रोह कर 13 विधायकों के साथ संपूर्ण क्रांति दल का गठन किया था. पर कुछ ही दिनों के बाद संपूर्ण क्रांति दल का विलय भाजपा में कर दिया गया.
वर्ष 1995 में समरेश सिंह ने भाजपा का टिकट नहीं मिलने पर निर्दलीय चुनाव लड़ा व हार गये. इसके बाद वर्ष 2000 का चुनाव उन्होंने झारखंड वनांचल कांग्रेस के टिकट पर लड़ा. फिर 2009 में झाविमो के टिकट पर विधायक बने. बाद में भाजपा में शामिल हो गये. पर 2014 में भाजपा का टिकट नहीं मिलने पर वह निर्दलीय लड़े व हारे.
समरेश सिंह का सफर
1980 व बाद में : भाजपा में
1985 : बोकारो से विधायक
1990 : बोकारो से विधायक
2000 : झारखंड वनांचल कांग्रेस पार्टी से बोकारो के विधायक
2009 : झाविमो के टिकट पर बोकारो से विधायक
2014 : निर्दलीय लड़े व हारे
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