जनमुद्दों पर भी विपक्षी दलों ने साधी चुप्पी

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 03 Dec 2019 1:11 AM

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रांची : विभिन्न जन संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के मंच, झारखंड जनाधिकार महासभा ने विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा विधानसभा चुनाव के लिए जारी घोषणा पत्रों का आकलन किया है. भारत भूषण चौधरी, डेविड सोलोमन, एलिना होरो, मंथन, मो जियाउल्लाह व सिराज दत्ता ने समीक्षा रिपोर्ट जारी की है. रिपोर्ट में कहा गया है कि विपक्षी […]

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रांची : विभिन्न जन संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के मंच, झारखंड जनाधिकार महासभा ने विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा विधानसभा चुनाव के लिए जारी घोषणा पत्रों का आकलन किया है. भारत भूषण चौधरी, डेविड सोलोमन, एलिना होरो, मंथन, मो जियाउल्लाह व सिराज दत्ता ने समीक्षा रिपोर्ट जारी की है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि विपक्षी दलों ने भुखमरी, कुपोषण और कल्याणकारी योजनाओं के लाभ से वंचित होने के मुद्दों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया है. किसी भी दल ने जन वितरण प्रणाली और सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के कवरेज को बढ़ाने की बात नहीं की है. कल्याणकारी योजनाओं को आधार से जोड़ने के कारण व्यापक स्तर पर लोग अपने अधिकारों से वंचित होते हैं.

लेकिन, किसी भी दल ने आधार को योजनाओं से हटाने की बात नहीं की है. नागरिक अधिकारों पर लगातार हो रहे हमलों पर भी विपक्षी दलों में चुप्पी है. किसी भी दल ने स्पष्ट रूप से देशद्रोह मामलों के क्लोजर, पुलिस छावनियों को स्कूलों को हटाने और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की घोषणा नहीं की है.
समीक्षा रिपोर्ट में विपक्षी दलों कांग्रेस, झारखंड मुक्ति मोर्चा, झारखंड विकास मोर्चा और भाकपा (माले) द्वारा कई जन मुद्दों को घोषणा पत्र में जोड़ने का स्वागत किया गया है. पर कांग्रेस, झामुमो और झाविमो के घोषणा पत्रों में अनेक जन मांगों पर चुप्पी बतायी गयी है. लैंड बैंक नीति केे लगातार विरोध के बावजूद किसी भी दल ने इसे निरस्त करने की बात नहीं करने पर आश्चर्य जताया गया है.
कहा गया है कि वर्तमान डोमिसाइल नीति को रद्द कर आदिवासियों- मूलवासियों के हित में नीति बनाने पर भी किसी भी दल ने स्पष्ट घोषणा नहीं की है. विपक्षी दलों ने अपने घोषणा पत्रों में जिन जन मुद्दों को शामिल किया है, वे भी उनके चुनावी अभियान में नहीं झलक रहा है. समीक्षा में सभी विपक्षी दलों द्वारा माॅब लिंचिंग के विरुद्ध कानून बनाने की घोषणा का स्वागत किया गया है.
कहा गया है कि गोवंश पशु हत्या निषेध कानून को निरस्त करने की मांग पर सभी दलों में चुप्पी है. यह दिखाता है कि है कि विपक्षी दलों की राजनीति में भी धर्मनिरपेक्षता व समानता के मूल्यों के विपरीत धार्मिक हुसंख्यकवाद की विचारधारा बढ़ रही है. धर्म स्वतंत्रता कानून रद्द करने के मांग पर दलों की चुप्पी को भी इसका उदाहरण बताया गया है़
समीक्षा रिपोर्ट की नजर में पार्टियों के घोषणा पत्र
भाजपा
जन अधिकारों के लगातार हो रहे हनन के निराकरण के लिए कुछ नहीं किया गया है. घोषणा पत्र से भाजपा की गरीब विरोधी और सांप्रदायिक सोच झलकती है. नाकामियों को छुपाने के लिए राम मंदिर और 370 को मुद्दा बना कर लोगों के ध्रुवीकरण का प्रयास है.
आजसू
आजसू पार्टी के घोषणा पत्र में भी अधिकांश जन मुद्दों पर चुप्पी है. लेकिन, वन अधिकार अधिनियम का कार्यान्वयन, मॉब लिंचिंग के विरुद्ध कानून बनाने और पिछड़ों के लिए आरक्षण लागू करने जैसे कुछ मुद्दों का जिक्र जरूर है.
झामुमो
झामुमो ने माॅब लिंचिंग के विरुद्ध कानून बनाने की बात की है. अडानी पावर प्लांट, मंडल डैम, खरकई डैम जैसी परियोजनाओं की समीक्षा की घोषणा की है. जन वितरण प्रणाली और सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं पर भी ध्यान दिया गया है.
कांग्रेस
कांग्रेस के घोषणा पत्र में जन विरोधी परियोजनाओं जैसे अडानी पावर प्लांट, मंडल डैम व ईचा खरकई डैम परियोजनाएं रद्द करने की घोषणा स्वागत योग्य है. कांग्रेस ने जन वितरण प्रणाली के तहत राशन की मात्रा बढ़ाकर 35 किलो प्रति माह व दाल जोड़ने की बात भी बढ़िया है.
झाविमो
झाविमो इकलौती पार्टी है, जिसके घोषणा-पत्र में पांचवी अनुसूची प्रावधानों को लागू करने की बात कही गयी है. लेकिन, वर्तमान डोमिसाइल नीति को रद्द कर आदिवासियों- मूलवासियों के हित में नीति बनाने के बारे में कुछ नहीं कहा गया है.
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