रांची : मोटापा-कब्ज है हर्निया का कारण : डॉ तमोनस
Author Prabhat khabar digital desk
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लाइव कार्यशाला में आठ मरीजों की सर्जरी रांची : कोलकाता से अाये लेप्रोस्कोपिक सर्जन डॉ तमोनस चौधरी ने कहा कि युवाओं में हर्निया, मोटापा व कब्ज की समस्या तेजी से बढ़ रही है. जीवनशैली ठीक नहीं होने के कारण यह समस्या हो रही है. दिनचर्या व खानपान बिगड़ गया है. जंक फूड व पैक्ड फूड […]
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लाइव कार्यशाला में आठ मरीजों की सर्जरी
रांची : कोलकाता से अाये लेप्रोस्कोपिक सर्जन डॉ तमोनस चौधरी ने कहा कि युवाओं में हर्निया, मोटापा व कब्ज की समस्या तेजी से बढ़ रही है. जीवनशैली ठीक नहीं होने के कारण यह समस्या हो रही है. दिनचर्या व खानपान बिगड़ गया है. जंक फूड व पैक्ड फूड के कारण कब्ज की समस्या हो रही है.
यह धीरे-धीरे हर्निया का रूप ले लेता है. पेशाब की समस्या के कारण भी हर्निया हो सकता है. डॉ चौधरी ने शुक्रवार को एसोसिएशन ऑफ सर्जन ऑफ इंडिया के झारखंड चैप्टर के 18वें वार्षिक सम्मेलन (जेसीकॉन-19) के पहले दिन लाइव सर्जरी कार्यशाला के बाद पत्रकारों को उक्त जानकारी दी. सम्मेलन का समापन 17 नवंबर को होगा. शनिवार को वैज्ञानिक सत्र का शुभारंभ राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू करेंगी.
डॉ तमोनस चौधरी ने कहा कि बड़ों के साथ-साथ बच्चों में भी हर्निया आम बात है. इसका इलाज ऑपरेशन ही है. हर्निया में लेप्रोस्कोपी सर्जरी कारगर है.
इसमें खून कम निकलता है, दर्द कम होता है व अस्पताल में भी कम दिनों तक रहना पड़ता है. इधर, लाइव सर्जरी कार्यशाला में आठ मरीजों की जटिल सर्जरी की गयी. रिम्स के सर्जरी विभाग में हुई सर्जरी का सीधा प्रसारण रिम्स आॅडिटोरियम में किया गया, जहां 250 से ज्यादा डॉक्टरों ने देखा. मौके पर टीएमएच मुंबई के सर्जरी विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ अशोक मेहता, डॉ वीके जैन, डॉ आरएन सिंह, डॉ राजेश श्रीवास्तव, डॉ आरपी श्रीवास्तव, डॉ आरजी बाखला, डॉ ओमप्रकाश, डॉ मो आजाद, डॉ शीतल मलुआ, डॉ निशित एक्का आदि मौजूद थे.
सामान्य विधि से की गयी फिस्टुला की सर्जरी ज्यादा कारगर : डॉ शेख
मुंबई से आये कोलोरेक्टल सर्जन डॉ परवेज शेख ने बताया कि फिस्टुला (भकंदर) की सर्जरी जटिल. अत्याधुनिक सर्जरी के बाद भी मरीज को दोबारा इसके होने की संभावना होती है. मेडिकल साइंस में आॅपरेशन के बाद करीब 20 फीसदी मरीज में यह दोबारा हो सकता है.
एशिया सहित भारत में यह सर्जरी ज्यादा सफल है. अमेरिका व यूरोप में यह सर्जरी असफल है. फिस्टुला हिस्टकटोमी विद स्पिंटियर रिपेयर एक सामान्य सर्जरी है. इससे दोबारा होने की संभावना एक से दो फीसदी ही रहती है. फिस्टुला पैखाना के रास्ते होने वाली बीमारी है, जिसमें अंदर-अंदर सुराग हो जाता है.
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