झारखंड विधानसभा चुनाव 2019 : पांच साल में बदल गयी 27% सीटों की राजनीतिक तस्वीर

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 02 Nov 2019 8:44 AM

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मनोज सिंह रांची : पिछले पांच साल में राज्य की कई विधानसभा सीटों की राजनीतिक तसवीर बदल गयी है. कई विधायक जिस दल के टिकट से जीते थे, उसे छोड़ कर दूसरी पार्टी में शामिल हो गये. कई विधायकों को बीच में जेल जाना पड़ा या सजा हो गयी. इस कारण सीट खाली करनी पड़ी. […]

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मनोज सिंह
रांची : पिछले पांच साल में राज्य की कई विधानसभा सीटों की राजनीतिक तसवीर बदल गयी है. कई विधायक जिस दल के टिकट से जीते थे, उसे छोड़ कर दूसरी पार्टी में शामिल हो गये. कई विधायकों को बीच में जेल जाना पड़ा या सजा हो गयी. इस कारण सीट खाली करनी पड़ी. कुछ सीटों पर विधायक के आकस्मिक निधन के बाद सीट खाली हो गयी. करीब 17 फीसदी सीटों में जीतने वाले विधायक दलों को छोड़ दूसरे दल में चले गये. वहीं कुल 27 प्रतिशत सीटों की राजनीतिक परिस्थिति बदल गयी.
विधायकों ने बदला पाला
लातेहार : लातेहार सीट के विधायक प्रकाश राम 2014 के चुनाव में झारखंड विकास मोर्चा की टिकट से जीते थे. हाल ही में उन्होंने भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली है.
सिमरिया : इस सीट के विधायक गणेश गंझू भी झाविमो की टिकट पर 2014 में विधायक बने थे. बाद में छह विधायकों साथ श्री गंझू भाजपा में चले गये. श्री गंझू का भाजपा जाने को सदन के अंदर चुनौती दी गयी. सुनवाई का बाद इन विधायकों का भाजपा में विलय मान लिया गया है. श्री गंझू ने पिछले चुनाव में भाजपा के सुजीत कुमार भारतीया के ही प्रत्याशी को हराया था.
लोहरदगा : लोहरदगा विधानसभा के वर्तमान विधायक सुखदेव भगत इस सीट से 2014 में चुनाव हार चुके थे. 2014 में इस सीट पर आजसू के कमल किशोर भगत ने कब्जा जमाया था. जीतने के कुछ साल के बाद श्री भगत को एक मामले में सजा हो गयी थी. इसके बाद सीट खाली करनी पड़ी थी. उप चुनाव में श्री भगत की पत्नी को आजसू ने उतारा था. इसमें कमल किशोर की पत्नी हार गयी थी. कांग्रेस के टिकट से सुखदेव भगत विधायक बन गये थे. हाल ही में सुखदेव भगत भाजपा में चले गये हैं.
हटिया : झारखंड विकास मोर्चा के छह विधायकों के साथ हटिया के विधायक नवीन जायसवाल भी भाजपा में चले गये हैं. 2014 के चुनाव में नवीन जायसवाल झाविमो की टिकट से विधायक बने थे. 2014 के चुनाव से पहले समझौते में यह सीट भाजपा के खाते में चली गयी थी. यहां से भाजपा से सीमा शर्मा चुनाव लड़ी थी. उनको नवीन जायसवाल ने चुनाव हराया था. अब नवीन जायसवाल भाजपा में चले गये हैं.
बहरागोड़ा : हाल ही में कुणाल षाडंगी भाजपा में चले गये हैं. श्री षाडंगी ने 2014 का चुनाव झारखंड मुक्ति मोर्चा की टिकट पर जीता था. इनके पिता डॉ दिनेश षाडंगी भी इस विधानसभा क्षेत्र का नेतृत्व कर चुके हैं. झारखंड मुक्ति मोर्चा की टिकट पर 2014 में उन्होंने भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ दिनेशानंद गोस्वामी को हराया था.
तमाड़ : तमाड़ सीट की राजनीतिक स्थिति भी 2014 के चुनाव के बाद बदल गयी है. यहां से आजसू की टिकट से चुने गये विधायक विकास मुंडा अब झामुमो के हो गये हैं. करीब एक साल पहले आजसू से उन्होंने बगावत कर ली थी. निर्दलीय राजा पीटर को हरानेवाले विकास मुंडा अब झामुमो की टिकट से इस सीट पर दावेदारी करेंगे. राजा पीटर भी एक मामले में जेल में बंद हैं.
सारठ : झारखंड विकास मोर्चा छोड़ छह विधायकों के साथ सारठ से जीतनेवाले रणधीर सिंह भी भाजपा के साथ हैं. 2014 की चुनाव में उन्होंने झाविमो की टिकट पर भाजपा के उदयशंकर सिंह को हराया था. भाजपा में आने के बाद सरकार ने उन्हें कृषि मंत्री भी बनाया था. अब श्री सिंह की तैयारी भाजपा की टिकट से सारठ से चुनाव लड़ने की है.
चंदनकियारी : 2014 की चुनाव में आजसू के पूर्व मंत्री व विधायक उमाकांत रजक को अमर बाउरी ने हराया था. अमर बाउरी उस वक्त झारखंड विकास मोर्चा की टिकट पर चुनाव जीते थे. राज्य में सरकार बनने के कुछ माह के बाद श्री बाउरी भी झाविमो के छह विधायकों के साथ भाजपा में चले गये थे. रघुवर दास के नेतृत्व वाली भाजपा की सरकार ने श्री बाउरी को मंत्री बनाया था.
बरही : 2014 के चुनाव में भाजपा को हरानेवाले कांग्रेस के विधायक मनोज यादव अब खुद भाजपा के साथ हैं. कांग्रेस की टिकट पर चुनाव जीत कर वहां की जनता ने इन्हें विधानसभा भेजा था. करीब पांच साल श्री यादव ने विपक्षी की भूमिका निभायी. चुनाव से ठीक पहले पहले वह भाजपा के हो गये हैं.
बरकट्टा : झारखंड विकास मोर्चा की टिकट पर 2014 में चुनाव जीतने वाले जानकी यादव भाजपा के साथ हैं. भाजपा ने उनको आवास बोर्ड का अध्यक्ष बनाया है. 2014 चुनाव के बाद बने रघुवर सरकार को झाविमो के छह विधायकों ने समर्थन किया था. सभी भाजपा में विलय का दावा करते हैं. श्री यादव ने पिछले चुनाव में भाजपा के अमित यादव को हराया था.
मांडू : झामुमो से बगावत कर टेकलाल महतो के पुत्र जय प्रकाश भाई पटेल भाजपा के हो गये हैं. करीब एक साल पहले उन्होंने झामुमो से बगावत कर दी थी. पिछले चुनाव से पहले झामुमो कोटे से सरकार में मंत्री भी थे. 2014 में झामुमो की टिकट से जीत कर विधायक भी बने थे. अब वह भाजपा के साथ हैं.
भवनाथपुर : जनवादी नौजवान सभा की टिकट से 2014 में जीतने वाले भानुप्रताप शाही अब भाजपा के सदस्य हैं. श्री शाही ने हाल ही में भाजपा की सदस्यता ग्रहण की है. 2005 में वह राज्य में मंत्री हुआ करते थे. 2009 के चुनाव में वह हार गये थे. आने वाले चुनाव में उनकी नजर भाजपा के टिकट पर है.
डालटनगंज : आलोक चौरसिया भी 2014 की चुनाव में पहली बार झाविमो की टिकट पर चुनाव जीते थे. सरकार के बनने के कुछ माह के बाद ही छह विधायकों के साथ श्री चौरसिया ने भी भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली. श्री चौरसिया ने पिछले चुनाव में कांग्रेस के केएन त्रिपाठी को हराया था.
लिट्टीपाड़ा : लिट्टीपाड़ा सीट की कहानी अनोखी है. इस सीट से 2014 की चुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्चा के प्रत्याशी डॉ अनिल मुर्मू जीते थे. उन्होंने भाजपा प्रत्याशी साइमन मरांडी को हराया था. श्री मुर्मू के असामयिक निधन के बाद यहां उप चुनाव हुआ. उप चुनाव में साइमन भाजपा छोड़ झामुमो की टिकट से चुनाव जीत गये. सीट झामुमो के पास ही रह गयी है.
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