फ्लैशबैक : विक्रमादित्य के वंशज थे ईचागढ़ के विधायक, 90 के बाद चुनाव नहीं लड़ा राज परिवार
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 01 Nov 2019 7:50 AM
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विवेक चंद्र रांची : कोल्हान में ईचागढ़ राजघराने का राजनीतिक इतिहास काफी पुराना है. पातकुम स्टेट के नाम से पहचान रखनेवाले ईचागढ़ राजपरिवार के पूर्वज राजा विक्रमादित्य बताये जाते हैं. वही सिंघासन बत्तीसी पर बैठ कर न्याय करने वाले राजा विक्रमादित्य. राजा विक्रमादित्य के वंशज अविभाजित बिहार में चांडिल पूर्वी सीट से विधायक थे. बाद […]
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विवेक चंद्र
रांची : कोल्हान में ईचागढ़ राजघराने का राजनीतिक इतिहास काफी पुराना है. पातकुम स्टेट के नाम से पहचान रखनेवाले ईचागढ़ राजपरिवार के पूर्वज राजा विक्रमादित्य बताये जाते हैं. वही सिंघासन बत्तीसी पर बैठ कर न्याय करने वाले राजा विक्रमादित्य. राजा विक्रमादित्य के वंशज अविभाजित बिहार में चांडिल पूर्वी सीट से विधायक थे. बाद में ईचागढ़ विधानसभा बनने के बाद भी वह विधायक चुने गये थे.
ईचागढ़ के राजा प्रभात कुमार आदित्य देव 1962 में पहली बार चांडिल पूर्वी से विधायक बने. उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी गोवर्धन महतो को हराया था और स्वतंत्र पार्टी के प्रत्याशी के रूप में चुने गये थे. कांग्रेस पार्टी के प्रत्याशी चुनाव में तीसरे स्थान पर थे. वर्ष 1967 के चुनाव में ईचागढ़ विधानसभा अस्तित्व में आ गया. राजा साहब इस बार बार ईचागढ़ के विधायक बने. लेकिन, स्वतंत्र पार्टी को छोड़ कर वह कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े थे. दो साल बाद 1969 के चुनाव में कांग्रेस के खिलाफ बने माहौल में राजा साहब फॉरवर्ड ब्लॉक के उम्मीदवार घनश्याम महतो से चुनाव हार गये. 1972 के चुनावों में राजा की हार का बदला लेने उनके पिता महाराजा शत्रुघ्न आदित्य प्रताप देव निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनावी दंगल में उतरे.
जनता अपने महाराजा के साथ रही और वह फारवर्ड ब्लॉक के घनश्याम महतो को 10,000 से अधिक वोटों से जीते. 1977 व 1980 के चुनावों में राजा प्रभात कुमार आदित्य देव के हाथ फिर से सफलता नहीं लगी. दोनों ही बार कांग्रेस पार्टी के प्रत्याशी के रूप में वह निर्दलीय चुनाव लड़ रहे घनश्याम महतो से हार गये. लेकिन, राजा साहब ने हार नहीं मानी. आखिर 1985 के चुनाव में उनके हाथ सफलता लगी. उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर झामुमो के निर्मल महतो को हरा कर चुनाव जीत लिया.
90 के बाद राज परिवार चुनाव नहीं लड़ा
राजा साहब 1990 का चुनाव भी लड़े. हालांकि, झामुमो उम्मीदवार सुधीर महतो ने 26,000 से अधिक वोटों से उनको हरा दिया. इसके बाद ईचागढ़ राजपरिवार से किसी ने अब तक चुनाव नहीं लड़ा है. हालांकि, पिछले कुछ वर्षों से राजा साहब के पुत्र प्रशांत कुमार आदित्य देव भाजपा में शामिल होकर राजनीति कर रहे हैं.
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