रांची : स्वच्छ भारत मिशन में हुए गबन की फिर होगी जांच

Updated at : 16 Oct 2019 6:01 AM (IST)
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रांची : स्वच्छ भारत मिशन में हुए गबन की फिर होगी जांच

सचिव ने गुमला के उपायुक्त सह जिला जल व स्वच्छता समिति के अध्यक्ष को जांच करने को कहा रांची : पेयजल व स्वच्छता विभाग की सचिव आराधना पटनायक ने गुमला में स्वच्छ भारत मिशन की योजना में हुए गबन के मामले की दोबारा जांच कराने का निर्देश दिया है. उन्होंने गुमला के उपायुक्त सह जिला […]

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सचिव ने गुमला के उपायुक्त सह जिला जल व स्वच्छता समिति के अध्यक्ष को जांच करने को कहा
रांची : पेयजल व स्वच्छता विभाग की सचिव आराधना पटनायक ने गुमला में स्वच्छ भारत मिशन की योजना में हुए गबन के मामले की दोबारा जांच कराने का निर्देश दिया है.
उन्होंने गुमला के उपायुक्त सह जिला जल व स्वच्छता समिति के अध्यक्ष को मामले की जांच कराने को कहा है. साथ ही वित्तीय प्रबंधन पर विशेष ध्यान देेते हुए स्वच्छ भारत मिशन में आवश्यक सुधार लाने का निर्देश देने को कहा है. साथ ही यह लिखा है कि मामले की विशेष जांच व अॉडिट के लिए योजना सह वित्त विभाग से अनुरोध किया गया है.
ऐसे हुआ था मामला उजागर : सचिव ने डीसी को पत्र लिखा है. इसमें कहा गया है कि गुमला पेयजल व स्वच्छता मिशन प्रकल्प के कार्यपालक अभियंता ने राशि गबन से संबंधित मामलों को प्रकाश में लाया था. संबंंधित खाता से फर्जी हस्ताक्षर कर सरकारी राशि को विभिन्न खातों में ट्रांसफर कर गबन किया गया है.
कमेटी बनी, पर जांच पूरी नहीं हुई : उपायुक्त ने मामले की जांच के लिए एक कमेटी बनायी थी. साथ ही मामले की उच्च स्तरीय जांच के लिए सक्षम एजेंसी से जांच कराने की अनुशंसा की है. जांच कमेटी ने अपने प्रतिवेदन में भी प्रशासनिक खामियों को उजागर किया है. इसके तहत स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) की गाइड लाइन का अनुपालन नहीं किया गया.
कैश बुक का समय से संधारण व मिलान भी नहीं हुआ. निकासी व व्ययन पदाधिकारी द्वारा मॉनिटरिंग व कंट्रोल भी नहीं किया गया. समसुद्दीन शेख, दीपक कुमार, पुष्कर कुमार, अशोक कुमार महली, गोपाल साहू, ग्रामीण उद्योगों जैसे आरइ इंडस्ट्रीज, किरण ब्रिक्स, वीडब्ल्यूएसी बसुआ, इर्रोफटकपुर आदि के नाम व खाता से रुपये की निकासी निरंतर की गयी, लेकिन ये व्यक्ति कौन हैं.
उनकी पहचान व पता के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गयी. उनका पक्ष व जवाब भी नहीं है. मुखिया व जलसहिया का पक्ष भी नहीं है. यह भी स्पष्ट नहीं है कि राशि का उपयोग स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय निर्माण में हुआ या कहीं और. कई बिंदु छूटे हुए हैं.
ऑडिट की आपत्तियों को भी गंभीरता से नहीं लिया
निदेशक लेखा प्रशासन व स्व नियोजन डीआरडीए गुमला के द्वारा मामले में जे सिंह एंड एसोसिएट चार्टड एकाउंटेंट से कराये गये अॉडिट की रिपोर्ट दी गयी है. इसमें कहा गया है कि अंकेक्षण प्रतिवेदन में उठाये गये आपत्तियों को जिला स्तर पर गंभीरता से नहीं लिया गया. अॉडिट में पाया गया कि कैश बुक का उचित रूप से संधारण नहीं किया गया. इसके साथ ही नियम विरुद्ध किये गये कई कार्यों पर प्रकाश डाला.
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