सरकार जिद छोड़े, वरना बैंकों में अनिश्चितकालीन हड़ताल
Updated at : 13 Oct 2019 1:40 AM (IST)
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रांची : मोदी सरकार एक के बाद एक जो भी बड़े फैसले ले रही है, उसके खिलाफ बैंकर्स में नाराजगी दिख रही है. रिम्स ऑडिटोरियम में आयोजित बैंक ऑफ इंडिया अधिकारी संघ की वार्षिक आमसभा में भी यह मुद्दा छाया रहा. एआइबीओसी के चेयरमैन और फेडरेशन ऑफ इंडिया ऑफिसर्स के जेनरल सेक्रेटरी सुनील कुमार ने […]
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रांची : मोदी सरकार एक के बाद एक जो भी बड़े फैसले ले रही है, उसके खिलाफ बैंकर्स में नाराजगी दिख रही है. रिम्स ऑडिटोरियम में आयोजित बैंक ऑफ इंडिया अधिकारी संघ की वार्षिक आमसभा में भी यह मुद्दा छाया रहा.
एआइबीओसी के चेयरमैन और फेडरेशन ऑफ इंडिया ऑफिसर्स के जेनरल सेक्रेटरी सुनील कुमार ने कहा कि हम बैंकर्स सरकार की ओर उम्मीद टिकाये हैं. अगर वह अपनी जिद पर अड़ी रही, तो नवंबर में सभी बैंक अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जायेंगे.
उन्होंने कहा कि झारखंड में विधानसभा चुनाव को लेकर कोड ऑफ कंडक्ट लागू होता है, तो वह चुनावी ड्यूटी का भी बहिष्कार करेंगे. झारखंड इकाई के महासचिव सुनील लकड़ा ने कहा कि हम आम जनता के सवालों पर आवाज उठा रहे हैं.
अर्थव्यवस्था को सुधारने के नाम पर सरकारी बैंकों का विलय करने की घोषणा की जा रही है, जिसके भयावह परिणाम सामने आयेंगे. इस मौके पर संघ के अध्यक्ष राजकुमार श्रीवास्तव, कमलाकर सिंह, रवींद्र कुमार सिन्हा, अभिजीत मलिक, देबाशीष सेनगुप्ता, कमलजीत मोहापात्रा, चंद्रशेखर सहाय, संजीव कुमार सरकार, तेजेश्वर पटनायक, उमेश कुमार रथ, अनिल कुमार, प्रकाश उरांव सहित 1550 अधिकारी शामिल हुए.
फंसे 1 लाख 33 हजार करोड़ रुपये : एआइबीओसी की बैठक में बैंकों के ऊपर सरकार का भारी दबाव होने की बात सामने आयी. अधिकारियों ने कहा कि पीएमसी बैंक की जो स्थिति है, यह हमारे सरकार की नीतियों की ही देन है.
सरकार बैंकों से जबरन अपनी योजनाओं पर पैसा खर्च करने को लेकर अनावश्यक प्रेशर डालती है और जब जनता का पैसा डूब जाता है, तो वह इसका ठीकरा बैंकों पर फोड़ देते हैं. बैंकों का 1 लाख 33 हजार करोड़ रुपये जो कर्ज लौटा सकते हैं, उनके पास फंसा हुआ है.
मुख्य मांगें
स्केल-1 से लेकर स्केल 7 तक अन्य केंद्रीय कार्यालयों की तर्ज पर समान वेतन
चार्टर ऑफ डिमांड के अनुरूप वेतन समझौता
सप्ताह में 5 दिनों का कार्य दिवस, रोजाना का समय तय किया जाये
पारिवारिक पेंशन एवं पेंशन का अपडेशन सहित 11 अन्य तर्कसंगत मांगों पर विचार
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