रांची : आत्महत्या की दर कम करने पर हो विचार

Updated at : 11 Oct 2019 6:03 AM (IST)
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रांची : आत्महत्या की दर कम करने पर हो विचार

विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर कार्यशाला में स्वास्थ्य सचिव ने कहा रांची : भारत में आत्महत्या के आंकड़े ज्यादा हैं, वहीं झारखंड के सभी जिलों को देखें तो जमशेदपुर में आत्महत्या करने की दर सबसे ज्यादा है. इसे कम करने के लिए हमें गंभीरता से काम करना होगा. यह बात स्वास्थ्य सचिव डॉ नितिन कुलकर्णी […]

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विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर कार्यशाला में स्वास्थ्य सचिव ने कहा
रांची : भारत में आत्महत्या के आंकड़े ज्यादा हैं, वहीं झारखंड के सभी जिलों को देखें तो जमशेदपुर में आत्महत्या करने की दर सबसे ज्यादा है. इसे कम करने के लिए हमें गंभीरता से काम करना होगा. यह बात स्वास्थ्य सचिव डॉ नितिन कुलकर्णी ने कही. वह गुरुवार को होटल कैपिटोल हिल में विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर आयोजित कार्यशाला में बोल रहे थे.
उन्होंने कहा कि आज के इस आधुनिक जमाने में हमें मानसिक स्वास्थ्य पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है. हमें अपने मन की बातों को शेयर करने की आदत डालनी चाहिए. साइकोलॉजिकल काउंसेलिंग मानसिक स्वास्थ्य की एक थेरेपी है, पर यदि आप किसी चिकित्सक के पास काउंसेलिंग के लिए जायें, तो लोगों को लगेगा कि इनके दिमाग की हालत ठीक नहीं है. हमें इस सोच से बाहर निकलना होगा.
बच्चों संग मानसिक स्वास्थ्य पर हो चर्चा : स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि सभी स्कूलों में ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए कि मॉर्निंग असेंबली में शिक्षक बच्चों से मानसिक स्वास्थ्य पर चर्चा करें और उन्हें समस्याएं शेयर करने के लिए प्रेरित करें. मौके पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अभियान निदेशक डॉ शैलेश कुमार चौरसिया ने कहा कि हम सभी ऑफिस में काम करते हैं.
शाम होते-होते हम फिजिकली तो नहीं थकते, लेकिन मानसिक रूप से थक जाते हैं. संयुक्त परिवार की प्रथा कम होने से मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या ज्यादा देखी जा रही है. हमें ऐसी चर्चाओं को पब्लिक के बीच लेकर जाना होगा. जिससे उनमें जागरूकता आये और समस्या का समाधान निकल सके. इसे लेकर व्यापक विमर्श करने की जरूरत है.
मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के बारे में बताया : कार्यशाला की शुरुआत करते हुए राज्य नोडल पदाधिकारी डॉ एलआर पाठक ने मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के बारे में विस्तार से बताया.
कार्यशाला में डॉ निशांत गोयल ने चाइल्ड एंड एडोलेसंट मेंटल हेल्थ प्राॅब्लम विषय पर, डॉ अजय बाखला ने सुसाइड ओवरव्यू एंड रोल ऑफ मीडिया पर और डॉ एआर सिंह ने नीड ऑफ प्रोमोशन ऑफ स्कूल मेंटल हेल्थ विषय पर विस्तार से बताया.
इस मामले में सावधानी बरतने की सलाह दी. इस अवसर पर निदेशक प्रमुख स्वास्थ्य सेवाएं डॉ वीएस दास, डॉ यूसी सिन्हा, डॉ आरके वर्मा, डॉ अजीत प्रसाद, परामर्शी शांतना कुमारी, एनएचएम के विभिन्न कोषांगों के उप निदेशक और परामर्शी उपस्थित थे.
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