सुनील चौधरी, रांची : राज्य सरकार ने ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर करने के लिए प्रयोग के तौर पर तीन अस्पतालों को पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मोड पर दिया था. पर तीनों अस्पतालों में कोई सुधार नहीं है. एनएचएम के एमडी डॉ शैलेश कुमार चौरसिया ने तीनों अस्पताल के भ्रमण के बाद यह बात जांच रिपोर्ट में लिखी है.
उन्होंने रिपोर्ट स्वास्थ्य सचिव को सौंप दी है. एमडी ने 27 जुलाई को अस्पतालों की जांच की थी. इसके बाद स्वास्थ्य सचिव डॉ नितिन कुलकर्णी ने गिरिडीह और धनबाद के सिविल सर्जन को जांच रिपोर्ट भेज कर उनका मंतव्य मांगा है.
रेफरल अस्पताल डुमरी : एमडी ने लिखा है कि रेफरल अस्पताल डुमरी को पीपीपी मोड पर दीपक फाउंडेशन को दिया गया था. लेकिन यह पुरानी स्थिति में ही चल रहा है.
शायद ही कोई नया प्रयास किया गया हो. आधारभूत संरचना में भी बदलाव नहीं है. सरकार के डॉक्टर और दीपक फाउंडेशन के स्टाफ के बीच कोई समन्वय नहीं दिखाई दिया. अस्पताल में 24 घंटे के लिए कोई क्लिनिकल स्टाफ नहीं है. हालांकि फाउंडेशन द्वारा रखे गये मैनेजर उपस्थित थे. वोल्टेज की कमी के कारण एक्स-रे रूम में ताला बंद था.
पर इसके लिए तीन फेज का कनेक्शन लेने के लिए कोई प्रयास नहीं किया गया. लेबर रूम छोटा और अस्वच्छ था. एक सौ से अधिक डिलेवरी एक माह में किये गये पर सी-सेक्शन केवल एक किया गया. एमडी ने लिखा है कि पीपीपी मोड ठीक से तरीके से काम नहीं कर रहा है. इसमें परिवर्तन की जरूरत है.
पीएचसी तोपचांची
इसे अपग्रेड कर सीएचसी साहूबहियार में शामिल किया गया है. जो यहां से 4.5 किमी की दूरी पर है. लेकिन स्थानीय लोगों के विरोध के कारण शिफ्ट नहीं किया गया है. तोपचांची में अस्पताल बुरी हालत में है. स्टाफ क्वार्टर जर्जर हैं. मेडिकल अफसर डॉ जयंत कुमार धनबाद में रहते हैं और उनका काम संतोषजनक नहीं है.
उनके खिलाफ कार्यरत स्टाफ व एमपीडब्ल्यू ने प्रताड़ना का आरोप भी लगाया है. स्थानीय लोग एक बिरहोर महिला की मौत का कारण भी डॉ जयंत को ही बता रहे हैं. यहां पर पदस्थापित महिला डॉक्टर लंबी छुट्टी पर चली गयी हैं.
सीएचसी साहूबहियार : एमडी ने लिखा है कि नया भवन 10 वर्षों से खाली है. स्टाफ क्वार्टर को सीआरपीएफ ने अपने कब्जे में ले लिया है. एमडी ने वहां तत्काल मैटरनिटी वार्ड, आइपीडी, एमटीसी को शिफ्ट करने की अनुशंसा की है.
