14 जिलों में बारिश या रोपा सामान्य से 60 फीसदी कम

Updated at : 24 Aug 2019 7:57 AM (IST)
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14 जिलों में बारिश या रोपा सामान्य से 60 फीसदी कम

ट्रिगर-1 के आधार पर होगा सूखे का आकलन रांची : राज्य के 14 जिले ऐसे हैं, जहां बारिश या धान की रोपनी सामान्य से 60 फीसदी से कम हुई है. राज्य सरकार इन जिलों में सूखे की स्थिति का आकलन करेगी. इनमें से कुछ जिलों में अभी तक सामान्य से 60 फीसदी से कम बारिश […]

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ट्रिगर-1 के आधार पर होगा सूखे का आकलन
रांची : राज्य के 14 जिले ऐसे हैं, जहां बारिश या धान की रोपनी सामान्य से 60 फीसदी से कम हुई है. राज्य सरकार इन जिलों में सूखे की स्थिति का आकलन करेगी. इनमें से कुछ जिलों में अभी तक सामान्य से 60 फीसदी से कम बारिश हुई है. वहीं कुछ जिलों में रोपा की स्थिति भी अच्छी नहीं है. आपदा प्रबंधन विभाग को स्थिति का आकलन करने की जिम्मेदारी दी गयी है.
सूखे के लिए तय मैनुअल के ट्रिगर-1 (वर्षापात का पारामीटर) के आधार पर आकलन किया जायेगा. 31 अगस्त के बाद ट्रिगर-2 (फसल रोपा, रिमोट सेंसिंग, मिट्टी की नमी और जमीन स्थिति ) का आकलन होगा.
ट्रिगर-1 के पैमाने के आधार पर राज्य में 14 जिलों की स्थिति प्राथमिक तौर पर अच्छी नहीं है. जिला प्रशासन को इन जिलों में प्रखंड स्तर पर वर्षा की रिपोर्ट के आधार पर गणना करने के लिए कहा गया है. जिला प्रशासन वर्षा, नमी और रोपा का आकलन कर मुख्यालय को रिपोर्ट करेगा. रिपोर्ट का आकलन कर राज्य सरकार अक्तूबर तक भारत सरकार से संबंधित जिलों को सूखा घोषित करने की अनुशंसा करेगी.
ट्रिगर-1 में सूखे का आकलन वर्षापात के साथ-साथ वर्षा की अवधि में गैप का भी होता है. अगर दो बारिश के बीच का गैप अधिक हो, तो भी सूखे की रिपोर्ट में इसका जिक्र होता है. इसके अतिरिक्त स्टैंडर्ड पार्टिसिपेटरी इंडेक्स वैल्यू का अध्ययन भी किया जाता है. सभी का मिलान करने के बाद ही राज्य सरकार केंद्र से सूखा घोषित करने की अनुशंसा करती है.
मालूम हो कि मानसून की वर्तमान स्थिति को देखते हुए विगत 22 जुलाई को मुख्य सचिव डॉ डीके तिवारी ने बैठक बुलाकर संबंधित अधिकारियों को किसानों से बात कर उनकी जरूरत के अनुसार उन्हें सहायता पहुंचाने की रणनीति एक सप्ताह के भीतर बनाने का निर्देश दिया था. उन्होंने सभी उपायुक्तों को इस मसले पर अलर्ट करते हुए हर जिले में दलहन और तिलहन के बीज, खाद आदि की उपलब्धता की व्यवस्था करने को कहा था.
मुख्य सचिव ने कम पानी में होने वाली फसल का दायरा बढ़ाने का निर्देश देते हुए जिलों में बीज और खाद की उपलब्धता की भौतिक स्थिति से अवगत कराने को भी कहा था. उन्होंने कृषि विभाग को निर्देश दिया था कि अगर आगे भी अच्छी बारिश नहीं हुई और सूखे की स्थिति बनी, तो किसानों को राहत पहुंचाने के लिए इंतजार नहीं करें, बल्कि अभी से अपनी तैयारी रखें, ताकि ससमय राहत उपलब्ध हो सके.
31 अगस्त के बाद ट्रिगर-2 का आकलन होगा
सूबे में बीते साल भी पड़ा था सूखा
राज्य में पिछले साल के खरीफ मौसम में भी सूखा पड़ा था. 129 प्रखंड को सूखाग्रस्त घोषित किया गया था. इसमें 93 प्रखंडों की स्थिति ज्यादा खराब थी. 36 पर आंशिक असर था. भारत सरकार की टीम ने भी सूखे की अनुशंसा की थी. सूखा राहत के लिए राज्य सरकार को केंद्र ने 256 करोड़ रुपये दिये. जिला प्रशासन को इस राशि से किसानों को सहयोग करना है.
आपदा प्रबंधन विभाग की तैयारी जारी
अभी ट्रिगर-1 पैमाने के आधार पर जिलों का आकलन होगा. पहले चरण में 14 जिलों का आकलन होगा. उम्मीद है एक सितंबर से पहले ट्रिगर-1 का काम पूरा हो जायेगा. उसके बाद ट्रिगर-2 का आकलन शुरू होगा.
मनीष तिवारी, संयुक्त सचिव,
आपदा प्रबंधन विभाग
सामान्य से 60% से कम बारिश या रोपा वाले जिले
जिला बारिश रोपा
कोडरमा 42 62
बोकारो 46 30
दुमका 43 84
देवघर 42 63
गोड्डा 30 45
पाकुड़ 29 90
गढ़वा 99 43
पलामू 84 35
सरायकेला 72 44
खूंटी 76 50
लातेहार 55 60
गिरिडीह 55 65
जामताड़ा 56 52
साहेबगंज 54 83
नोट : बारिश व रोपा प्रतिशत में
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