रांची : पहले नहीं मिलते थे ठेकेदार अब दर्जनों डाल रहे हैं टेंडर
Author Prabhat khabar digital desk
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उग्रवाद प्रभावित रांची, लोहरदगा, गुमला, खूंटी इलाके की स्थिति रांची : पहले प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के लिए ठेकेदार नहीं मिलते थे. खास कर उग्रवाद प्रभावित इलाकों में ठेकेदारों की कमी के कारण एक योजना के लिए कई बार टेंडर निकालना पड़ता था. काम कराने के लिए काफी मुश्किल से ठेकेदार मिलते थे. आज उसी […]
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उग्रवाद प्रभावित रांची, लोहरदगा, गुमला, खूंटी इलाके की स्थिति
रांची : पहले प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के लिए ठेकेदार नहीं मिलते थे. खास कर उग्रवाद प्रभावित इलाकों में ठेकेदारों की कमी के कारण एक योजना के लिए कई बार टेंडर निकालना पड़ता था. काम कराने के लिए काफी मुश्किल से ठेकेदार मिलते थे. आज उसी उग्रवाद प्रभावित इलाकों में काम करने के लिए एक-एक योजना में 18-20 ठेकेदार टेंडर डाल रहे हैं.
लोहरदगा की एक योजना में तो 20 से भी ज्यादा ठेकेदारों ने टेंडर भरा है. सामान्य तौर पर 8 से 10 ठेकेदारों ने टेंडर डाला है. यह स्थिति रांची के उग्रवाद प्रभावित ग्रामीण इलाकों के साथ ही खूंटी, लोहरदगा, गुमला सहित अन्य जगहों पर देखने को मिल रही है.
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना का हाल
क्यों हो रहा ऐसा
ठेकेदारों का कहना है कि पहले वे दूसरी योजनाअों में भी टेंडर डालते थे, लेकिन अब दूसरे विभागों से संबंधित सड़क व पुल का काम करने पर भुगतान की समस्या हो रही है. काफी समय तक भुगतान लटका रह जाता है.
काम पूरा करने के बाद भुगतान के इंतजार में बैठना पड़ रहा है. वहीं प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के काम में भुगतान की समस्या नहीं है. पहले इसका इस्टीमेट काफी कम था. ऐसे में काम करने में कठिनाई हो रही थी, लेकिन अब इसके इस्टीमेट में भी सुधार किया गया है. इस तरह इसका काम ज्यादा सरल हो गया है.
10 फीसदी कम रेट पर काम लेने को तैयार
ज्यादातर योजनाअों में ठेकेदारों ने शिड्यूल रेट से 10 फीसदी कम दर भरा है. यानी ठेकेदार वास्तविक इस्टीमेट से 10 फीसदी कम रेट पर काम लेने को भी तैयार हैं. इस्टीमेट में 10 फीसदी ठेकेदार प्रॉफिट जुड़ा रहता है. यानी शिड्यूल रेट पर ठेकेदार काम करे, तो उसे 10 फीसदी राशि का लाभ होगा, लेकिन ठेकेदार 10 फीसदी कम रेट पर भी काम करने को इच्छुक हैं.
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