रिम्स रांची: सर्जरी के इंतजार में बैठे थे मरीज और डॉक्टर राउंड पर थे, निदेशक ने ऑपरेशन रद्द कराया

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 18 Aug 2019 5:50 AM

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रिम्स निदेशक व अधीक्षक ने ट्रॉमा सेंटर व न्यूरो सर्जरी विभाग का निरीक्षण किया रांची : रिम्स निदेशक डॉ दिनेश कुमार सिंह व अधीक्षक डॉ विवेक कश्यप ने शनिवार की सुबह ट्रॉमा सेंटर व न्यूरो सर्जरी विभाग का निरीक्षण किया. निरीक्षण के दौरान जब दोनों न्यूरो सर्जरी विभाग पहुंचे, तो देखा कि डॉक्टर वार्ड में […]

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रिम्स निदेशक व अधीक्षक ने ट्रॉमा सेंटर व न्यूरो सर्जरी विभाग का निरीक्षण किया
रांची : रिम्स निदेशक डॉ दिनेश कुमार सिंह व अधीक्षक डॉ विवेक कश्यप ने शनिवार की सुबह ट्रॉमा सेंटर व न्यूरो सर्जरी विभाग का निरीक्षण किया.
निरीक्षण के दौरान जब दोनों न्यूरो सर्जरी विभाग पहुंचे, तो देखा कि डॉक्टर वार्ड में राउंड ले रहे हैं और मरीज ऑपरेशन के लिए इंतजार कर रहे हैं. मरीज व उनके परिजन से निदेशक ने पूछा कि ऑपरेशन क्यों नहीं शुरू हुआ, तो परिजनों ने कहा कि हमें बताया गया कि अभी डॉक्टर राउंड ले रहे हैं. जब खाली होंगे, तब ऑपरेशन शुरू करेंगे.
इस पर निदेशक बिफर पड़े. उन्होंने ओटी असिस्टेंट से कहा कि जब ऑपरेशन निर्धारित किया गया है, तो राउंड पहले कर लेना चाहिए. मरीज भूखे-प्यासे ऑपरेशन का इंतजार कर रहे हैं और डॉक्टर का ओटी में पता ही नहीं है. उन्होंने तत्काल ऑपरेशन रद्द करने का आदेश दिया. उन्होंने कहा कि वह अब प्रतिदिन निरीक्षण करने आयेंगे. जो भी अव्यवस्था होगी, उसपर तत्काल कार्रवाई की जायेगी.
रिम्स में मसूड़ों की हो रही है मुफ्त सर्जरी
रांची : रिम्स के कंजरवेटिव डेंटिस्ट्री एंड एंडोडोंटिक्स विभाग में मरीज मसूड़ों की मुफ्त सर्जरी का लाभ उठा रहे हैं. दांत में चोट लगने के बाद मसूड़ा में बने घाव का इलाज मसूड़ाें को ऊपर उठा कर किया जा रह है. विभाग में अभी तक 20 से ज्यादा मरीज अपने मसूड़ाें की सर्जरी करा चुके हैं.
वहीं, राजधानी के निजी क्लिनिक में इसके लिए 5,000 से ज्यादा लिया जाता है. विभाग के इंचार्ज डॉ सुमित मोहन ने बताया कि फिलहाल कुछ मरीजों को इसका लाभ मिल रहा है. कुछ दिनों में इलाज की सुविधा मरीजों को नियमित मिलने लगेगी. पहले चरण में सप्ताह में एक दिन इसके लिए निर्धारित किया जायेगा. इसके बाद सप्ताह में दो दिन इसे शुरू किया जायेगा. हमारा उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा मरीजों को लाभ पहुंचाना है.
यह सर्जरी वैसे मरीजों के लिए ज्यादा लाभकारी है, जिनके मसूड़े का इलाज रूट-कैनाल विधि से नहीं किया जा सकता है.
लेजर फिलिंग से दांतों को बनाया जा रहा सुंदर : विभाग में दांतों को सुंदर बनाने के लिए लेजर फिलिंग (कंपोजिट फिलिंग) का लाभ भी नि:शुल्क मिलने लगा है, जबकि इसके लिए निजी क्लिनिक में दो हजार रुपये खर्च करने पड़ते हैं. जिनके दांत टेढ़े-मेढ़े हैं, उनको भी इस सुविधा का लाभ मिल रहा है. वहीं ब्लीचिंग व विनियरिंग का इलाज भी शीघ्र उपलब्ध कराने की योजना है.
एक सप्ताह में देनी थी रिपोर्ट अभी तक टीम भी नहीं बनी
रांची : राजधानी व आसपास के क्षेत्रों मेेें झोलाछाप डॉक्टरों की प्रैक्टिस पर रोक लगाने का आदेश फिलहाल ठंडे बस्ते में है. सिविल सर्जन डाॅ वीवी प्रसाद ने एक सप्ताह में जांच रिपोर्ट देने का आदेश दिया था, लेकिन आदेश के 15 दिन बाद अभी तक जांच टीम भी गठित नहीं हुई है.
जांच टीम को राजधानी, आसपास व ब्लॉक क्षेत्र के वैसे सभी क्लिनिक की जांच करनी है कि वह क्लीनिकल इस्टेब्लिशमेंट के अधीन पंजीकृत कैसे हो गये. वहीं सिविल सर्जन का कहना है कि ब्लॉक के सभी प्रभारियों को आदेश दिया गया है कि वह जांच रिपोर्ट दें, लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं आया है.
इधर, स्वास्थ्य सचिव डॉ नितिन मदन कुलकर्णी के सख्त निर्देश के बाद सिविल सर्जन कार्यालय से 19 अगस्त को जांच टीम गठित करने की तैयारी की जा रही है. गौरतलब है कि प्रभात खबर ने 30 जुलाई के अंक में प्रमुखता से खबर प्रकाशित की थी कि क्लीनिकल इस्टेब्लिशमेंट एक्ट की खामियों के कारण झोलाछाप डाॅक्टर आसानी से लाइसेंस हासिल कर लेते हैं.
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