आदिवासी भाषा व संस्कृति बचाये रखने की है चुनौती

Updated at : 10 Aug 2019 2:56 AM (IST)
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आदिवासी भाषा व संस्कृति बचाये रखने की है चुनौती

अनगड़ा :विश्व आदिवासी दिवस उल्लास के साथ संकल्प का अवसर है. भाषा, संस्कृति, पहचान, परंपरा व पर्यावरण को बनाये रखने की चुनौतियां है. यह बातें पूर्व डिप्टी सीएम सुदेश कुमार महतो ने कही. वे शुक्रवार को विश्व आदिवासी दिवस व अगस्त क्रांति दिवस के अवसर पर प्रोजेक्ट उवि विद्यालय जोन्हा में आयोजित कार्यक्रम में बोल […]

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अनगड़ा :विश्व आदिवासी दिवस उल्लास के साथ संकल्प का अवसर है. भाषा, संस्कृति, पहचान, परंपरा व पर्यावरण को बनाये रखने की चुनौतियां है. यह बातें पूर्व डिप्टी सीएम सुदेश कुमार महतो ने कही. वे शुक्रवार को विश्व आदिवासी दिवस व अगस्त क्रांति दिवस के अवसर पर प्रोजेक्ट उवि विद्यालय जोन्हा में आयोजित कार्यक्रम में बोल रहे थे.
उन्होंने कहा कि अंग्रेज शासकों व खासकर जुल्म, शोषण के खिलाफ विद्रोह का बिगुल फूंकने वाले हर क्रांतिकारी प्रेरणा स्त्रोत बने रहेंगे. सुदेश ने कहा कि आदिवासी समाज द्वारा अंग्रेजों के खिलाफ किया गया हूल विद्रोह विश्व के सबसे बड़े आंदोलनों में से एक है. इस आंदोलन के विस्तृत स्वरूप को हमें सामने लाना है.
इसे पाठ्यक्रम में महत्वपूर्ण स्थान देना होगा. इस अवसर पर सुदेश ने विद्यालय के 600 छात्र-छात्राओं के बीच स्कूली बैग व एक-एक पौधा का वितरण किया. पर्यावरण के संरक्षण की शपथ दिलायी. मौके पर सिदो कान्हो के वंशज मंडल मुर्मू, प्रधानाध्यापक अशोक साहू, सुशील महतो, संजय सिद्धार्थ, जयपाल सिंह सहित अन्य उपस्थित थे.
सुदेश ने जोन्हा क्षेत्र में प्लस टू स्कूल की व्यवस्था करने की भी घोषणा की.ओरमांझी. आदिवासी सरना पड़हा समाज मुन्ना पतरा के तत्वावधान में विश्व आदिवासी दिवस मनाया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता समाज के अध्यक्ष प्रो प्रेमनाथ मुंडा ने की. पंचायत सचिवालय चकला में आयोजित कार्यक्रम में जल, जंगल व जमीन की रक्षा का संकल्प लिया गया. साथ ही पेशा कानून को और सशक्त बनाने की बात कही गयी.
मांडर. विश्व आदिवासी दिवस पर मांडर में प्रभातफेरी निकाली गयी. आदिवासी विकास परिषद मांडर शाखा द्वारा आयोजित यह प्रभातफेरी मांडर बाजारटांड़ से शुरू होकर मिशन चौक होते हुए प्रखंड मुख्यालय पहुंचकर सभा में बदल गयी. सभा में बीडीओ विष्णुदेव कच्छप, जिप सदस्य सुनील उरांव, 20 सूत्री अध्यक्ष रामबालक ठाकुर, मुखिया जयवंत तिग्गा ने आदिवासियों से एकता, परंपरा, संस्कृति व आदिवासियत बचाये रखने तथा शिक्षा तथा रोजगार से जुड़ने का आह्वान किया.
इधर मांडर कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम में आदिवासी एकता बनाये रखने पर बल दिया गया. कॉलेज व एनसीसी के छात्र-छात्राओं ने गीत-नृत्य प्रस्तुत किये. मौके पर प्राचार्या रेणुका प्रसाद, सीनेट के सदस्य व एनसीसी प्रभारी डॉ बुधू उरांव, उत्तम साही, रंजीत उरांव, विकास उरांव, प्रकाश डेविड राम, रीता कुमारी, सुषमा कुमारी, सरस्वती कुमारी, ललिता कुमारी आदि उपस्थित थे.
राज्य के आदिवासी खतरे से गुजर रहे हैं : सुबोधकांत सहाय
नामकुम. विश्व आदिवासी दिवस पर कांग्रेस जिला कमेटी के तत्वावधान में सिदरौल में कार्यक्रम का आयोजन किया गया. पूर्व सांसद सुबोधकांत सहाय ने कहा कि देश में झारखंड के आदिवासी सबसे ज्यादा खतरे से गुजर रहे हैं. आदिवासियों पर पूंजीपतियों की नजर है और राज्य सरकार पूंजीपतियों की चाटुकारिता करती है. उन्होंने आदिवासियों व राज्य के विकास के लिए जागरूक होकर आंदोलन करने की बात कही.
कार्यक्रम को पूर्व विधायक केशव महतो कमलेश, पूर्व मेयर रमा खलखो, ग्रामीण जिला अध्यक्ष सुरेश कुमार बैठा व राजेश कुमार गुप्ता ने भी संबोधित किया. इस दौरान अतिथियों ने पारंपरिक वेशभूषा में आये समाज के लोगों के संग नृत्य भी किये. मौके पर अशोक कुमार चौधरी, अनिल वैद्य, राजेश कच्छप सहित अन्य उपस्थित थे. इधर, सिरी परगना 52 पड़हा समिति के तत्वावधान में खरसीदाग में विश्व आदिवासी दिवस मनाया गया.
मुख्य अतिथि दयामनी बारला ने कहा कि आज सरकार विकास के नाम पर आदिवासियों को भूमिहीन बनाने का काम कर रही है. हम सब को अपने अधिकार के लिए जागरूक होना होगा. इस दौरान समिति के सदस्यों ने पौधरोपण भी किया. कार्यक्रम में 52 पड़हा के अध्यक्ष प्रदीप तिर्की, सुशीला एक्का, सुशीला भुटकुंवर, जुरा पाहन, जगदीश बड़ाइक, ब्रदर जैकब, रजनी तिग्गा उपस्थित थे.
आदिवासी पैसों से नहीं जमीन से अमीर हैं : हेमंत
दीक्षांत मंडप में हुई सभा में पूर्व सीएम नेता हेमंत सोरेन ने कहा कि आदिवासी पैसों से नहीं जमीन-जायदाद से अमीर हैं. दुनिया में जमीन का महत्व कभी नहीं घटा है. विकास की बात भी जमीन पर ही होती है. आज देश पर सामंतवाद का कब्जा है. ऐसे लोग जमीन पर कब्जा जमाना चाहते है़ं सीएनटी-एसपीटी से छेड़छाड़ का प्रयास हुआ है.
वनाधिकार कानून व भूमि अधिग्रहण कानून में बदलाव की कोशिश की जा रही है़ जब जमीन जायेगा, तो रोजगार भी नहीं रहेगा. ऐसे में आत्महत्या के सिवाय कोई विकल्प नहीं बचेगा. आदिवासियत को बचाना है, तो उसे अधिकार दिलाना होगा.
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