रांची : पारासिटामोल सिरप का आठ लाख है स्टॉक फिर भी 12 लाख बोतलों का दे दिया गया ऑर्डर

Updated at : 08 Jul 2019 6:24 AM (IST)
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रांची : पारासिटामोल सिरप का आठ लाख है स्टॉक फिर भी 12 लाख बोतलों का दे दिया गया ऑर्डर

संजय दवाअों का आपूर्ति आदेश निकालने में जल्दबाजी, जिलों में भी है स्टॉक, लेने से कर रहे इनकार रांची : झारखंड राज्य मेडिकल हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट एंड प्रोक्योरमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड ने पारासिटामोल की 12 लाख बोतलों का अॉर्डर दिया है. एक बोतल (60 एमएल) की कीमत 6.61 रुपये है. इनमें से करीब पांच लाख बोतलों […]

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संजय
दवाअों का आपूर्ति आदेश निकालने में जल्दबाजी, जिलों में भी है स्टॉक, लेने से कर रहे इनकार
रांची : झारखंड राज्य मेडिकल हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट एंड प्रोक्योरमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड ने पारासिटामोल की 12 लाख बोतलों का अॉर्डर दिया है.
एक बोतल (60 एमएल) की कीमत 6.61 रुपये है. इनमें से करीब पांच लाख बोतलों की आपूर्ति कर दी गयी है, जबकि कॉरपोरेशन के स्टॉक में पहले से आठ लाख बोतलें पड़ी हुई हैं. इन दवाओं का एक्सपायरी डेट जनवरी-फरवरी 2020 है. यानी अगले छह माह में इन आठ लाख बोतलों को खपाना होगा.
दूसरी तरफ, ज्यादातर जिलों के पास भी पारासिटामोल सिरप का बड़ा स्टॉक पड़ा है.हालत यह है कि इससे पहले भेजी गयी खेप को सिविल सर्जन (सीएस) पलामू व गुमला ने लौटा दिया था. पलामू के सीएस डॉ जॉन एफ केनेडी तथा पलामू के सीएस डॉ सुखदेव भगत ने कहा कि उनके पास पारासिटामोल की बड़ी खेप पहले से है.
डॉ केनेडी ने कहा कि स्टॉक रहते मुख्यालय से पारासिटामोल का सिरप भेज दिया गया था, जिसे उन्होंने रिसीव करने से इनकार कर दिया. उधर प. सिंहभूम की सीएस डॉ मंजू दुबे ने बताया कि उनके पास अभी पारासिटामोल की 11 हजार बोतलें हैं.
गोड्डा के सिविल सर्जन ने तो अभी दो जुलाई को निगम को पत्र लिख कर कहा है कि उन्हें अगले छह माह तक पारासिटामोल सिरप की जरूरत नहीं है. दरअसल यहां गत मई माह में 109300 बोतल सिरप भेजी गयी थी. सूत्रों के अनुसार, इस दवा की खरीद में हड़बड़ी दिखायी गयी है. पहले के स्टॉक को खाली किये बगैर इतनी बड़ी संख्या में दवाअों की आपूर्ति का आदेश निर्गत करना गलत है.
कॉरपोरेशन के अोएसडी शैलेंद्र श्रीवास्तव की सेवा 30 जून के बाद समाप्त कर दी गयी है तथा उन्हें बिहार विरमित कर दिया गया है. अारोप है कि जाते-जाते उन्होंने दवाअों का आपूर्ति आदेश निकालने में जल्दबाजी दिखायी है. पूर्व में दवाअों की खरीद में कई बार ऐसा भी देखा गया है कि आपूर्ति आदेश निर्गत होने के ठीक एक माह पहले या उसी माह उत्पादित दवाएं भेजी जाती हैं.
इस मुद्दे पर अॉडिट के दौरान भी सवाल उठाया गया था कि आखिर बड़ी संख्या में मंगायी गयी दवाअों का मैन्यूफैक्चरिंग डेट परचेज अॉर्डर के आसपास ही कैसे रहता है. इससे यह शक भी होता है कि दवा बेचनेवाली कंपनियों को आपूर्ति आदेश मिलने का पूरा विश्वास होता है.
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