रांची : रेप व मर्डर के आरोपियों के साथ रखे जा रहे हैं छोटे बच्चे, सरकार के पास नहीं है सुरक्षित जगह
Updated at : 01 Jul 2019 8:11 AM (IST)
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संजय रांची : किसी अपराध या कानून के उल्लंघन के मामले में रिमांड होम (अॉब्जर्वेशन होम या बाल सुधार गृह) में रहने वाले 13 से 15 वर्षीय बच्चों को बड़े अारोपियों के साथ रहना पड़ रहा है. रांची के डुमरदगा स्थित रिमांड होम में रांची सहित लातेहार, खूंटी, गुमला व गढ़वा जिले के करीब 30-35 […]
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संजय
रांची : किसी अपराध या कानून के उल्लंघन के मामले में रिमांड होम (अॉब्जर्वेशन होम या बाल सुधार गृह) में रहने वाले 13 से 15 वर्षीय बच्चों को बड़े अारोपियों के साथ रहना पड़ रहा है.
रांची के डुमरदगा स्थित रिमांड होम में रांची सहित लातेहार, खूंटी, गुमला व गढ़वा जिले के करीब 30-35 अारोपी ऐसे हैं, जिनकी उम्र 16-18 वर्ष से अधिक है तथा जिन पर रेप व मर्डर सहित अन्य गंभीर आरोप हैं. इनके साथ रहने वाले करीब 70 की संख्या में छोटे बच्चे हैं, जिन्हें उन वयस्क लड़कों की मारपीट व अन्य जुल्म सहने पड़ते हैं. प्रभात खबर को मिली जानकारी के अनुसार रिमांड होम के बाथरूम या किसी अन्य जगह पर ऐसे बड़े लड़के, छोटे बच्चों को बंद कर मारते हैं. अक्सर ऐसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है, जिससे किसी अनहोनी की आशंका बनी रहती है.
एक बार तो हालत इतनी बिगड़ गयी थी कि कुछ बड़े लड़कों को डुमरदगा से हटा कर दुमका व हजारीबाग के रिमांड होम भेज दिया गया था. नियमानुसार 18 वर्ष से अधिक के वयस्क हो चुके बच्चों को किसी अलग सुरक्षित जगह (प्लेस अॉफ सेफ्टी) में रखा जाना चाहिए. वहीं जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड को यह अधिकार है कि वह गंभीर अपराध वाले 16 से 18 वर्षीय बच्चों को भी प्लेस अॉफ सेफ्टी में भेज सकता है.
क्या है मामला : यदि 18 वर्ष या अधिक उम्र का कोई वयस्क अपराध करता है, तो उसे जेल भेजा जाता है. अपराध सिद्ध होने पर वह जेल में ही सजा काटता है. पर 18 वर्ष से कम उम्र वाले बच्चों को जेल के बजाय बाल सुधार गृह (रिमांड होम) भेजा जाता है.
जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत ट्रायल के दौरान यह वहीं रहते हैं. अारोप सिद्ध हो जाने पर उन्हें जेल के बजाय विशेष गृह (स्पेशल होम, जो धनबाद में है) में रखा जाता है. वहीं ट्रायल के दौरान ही किसी आरोपी की उम्र 18 वर्ष से अधिक हो जाये, तो उसे रिमांड होम के बजाय किसी अन्य सुरक्षित जगह पर रखना है. जुवेनाइल जस्टिस एक्ट (सेक्शन-2 (46) अॉफ जेजे एक्ट) में इसे प्लेस अॉफ सेफ्टी कहा गया है, जो पुलिस लॉकअप या जेल नहीं हो सकता. बल्कि यह कोई अलग सुरक्षित जगह होनी चाहिए. पर झारखंड में कोई प्लेस अॉफ सेफ्टी है ही नहीं. इसलिए वयस्क हो चुके लड़के बच्चों के साथ रिमांड होम में ही रह रहे हैं.
पहले होटवार जेल में थे
इससे पहले गंभीर अपराध वाले 16 वर्ष या अधिक उम्र वाले बच्चों को होटवार जेल में रखा गया था, जबकि जेजे एक्ट के अनुसार जेल प्लेस अॉफ सेफ्टी नहीं हो सकता. बाद में इस संबंध में गैर सरकारी संस्था बचपन बचाअो आंदोलन की अोर से झारखंड उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की गयी. इस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने जुलाई 2018 में यह आदेश दिया कि होटवार जेल में रखे गये ऐसे सभी बच्चों को उनके जिले या पास के रिमांड होम शिफ्ट किया जाये. पर रिमांड होम में लौटने के बाद वयस्क बच्चे यहीं रह गये.
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